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'टोपी थी तो मुस्लिम समझा', कांवड़ियों ने जिसे पीटा उसने खुद को BJP-RSS का बता दिया

कार के मालिक का नाम प्रताप सिंह है. 10 जुलाई को वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कांवड़िये उनकी कार को पलटते दिख रहे हैं.

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कार में एक महिला बुर्का भी पहने बैठी थीं (फ़ोटो/वायरल वीडियो से स्क्रीनशॉट)

उत्तराखंड के हरिद्वार में कांवड़ियों के एक ग्रुप ने एक कार में तोड़फोड़ की, कार के मालिक के साथ मारपीट की. कार के मालिक पर आरोप था कि उन्होंने कांवड़ (जिसमें कांवड़िये जल लेकर जाते हैं) को टक्कर मार दी थी. अब कार मालिक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह BJP और RSS का सदस्य है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांवड़ियों को लगा कि वो मुस्लिम हैं क्योंकि उन्होंने काली टोपी पहनी थी, दाढ़ी रखी हुई थी. उनके साथ कार में एक महिला बुर्का भी पहने बैठी थीं.

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10 जुलाई को इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. कार के मालिक का नाम प्रताप सिंह है. वीडियो में दिखा था कि कांवड़ियों ने प्रताप सिंह की कार को पलट दिया था, उनको कार से बाहर खींचा था और लाठियों से मारपीट की थी. प्रताप सिंह ने दी इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जो महिला उनके साथ थीं, वो BJP की स्थानीय अल्पसंख्यक मोर्चा की सदस्य हैं. कांवड़ियों ने महिला को जाने दिया, लेकिन उनके साथ मारपीट की. उन्होंने बताया, 

“मैं महिला की मदद कर रहा था. हम उनके बेटे को मदरसा छोड़कर वापस आ रहे थे. रास्ते में, हमने लंच साथ करने का फैसला किया और मैंने अपनी कार सड़क के किनारे पार्क कर दी. जब मैंने कार पार्क की थी तो वहां कुछ भी नहीं था, लेकिन जब तक मैं वापस आया, किसी ने कार के ठीक सामने एक कांवड़ रख दी थी. जब मैंने कार स्टार्ट की तो कार गलती से कांवड़ से टकरा गई. इसके बाद वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और मुझे मुस्लिम कहकर बाहर खींचने की कोशिश की और मेरे साथ मारपीट करने की कोशिश की. मैंने और स्थानीय दुकानदारों ने कांवड़ियों को बताने की कोशिश की कि मैं हिंदू हूं और BJP और RSS का सदस्य हूं.”

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प्रताप सिंह ने आगे बताया कि उन्होंने कांवड़ियों को ताजा गंगा जल लाने की बात भी कही थी. लेकिन वे लोग नहीं माने.

BJP और RSS के सदस्य 

घटना के बाद प्रताप स्थानीय पुलिस स्टेशन गए और शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया. प्रताप को पुलिस ने घर छोड़ दिया. लेकिन उनका फ़ोन खो गया था, जो उनकी कार में था. रिपोर्ट के मुताबिक प्रताप ने दावा किया कि वो 1974 से RSS के सदस्य हैं. 1991 से 2002 के बीच बीजेपी के सदस्य रहे. फिर 2017 से पार्टी के सदस्य हैं. लेकिन BJP और RSS से किसी ने भी उनसे घटना के बारे में पूछताछ करने के लिए फ़ोन नहीं किया.

पुलिस ने क्या कहा?

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद मंगलौर पुलिस स्टेशन में IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया. मामले में हरिद्वार के SSP अजय सिंह ने कहा, 

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“कुछ दिन पहले, स्थानीय निवासी प्रताप सिंह मंगलौर शहर में अपनी कार में थे. उन्होंने गलती से (सड़क पर) रखी एक कांवड़ को टक्कर मार दी थी. जिससे वह टूट गई. विवाद के बाद, कुछ कांवड़ियों ने उनकी कार के साथ तोड़फोड़ की और उसे पलट दिया. कुछ लोग इस मामले में सांप्रदायिक टिप्पणियां कर रहे हैं. घटना को एक धर्म से जोड़ रहे हैं. लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां भी की जाती हैं जो लोगों के मन में नफरत पैदा करती हैं. इसके लिए हम FIR दर्ज़ कर रहे हैं. मैं लोगों से भी अपील करता हूं कि वो पूरी सच्चाई जानें और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले पोस्ट को हटा दें. यदि ऐसा नहीं हुआ तो, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी."

मामले में फर्जी सूचना फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ IPC की धारा-153(A) के तहत एक और FIR भी दर्ज़ की गई थी.  

घटना के बाद BJP के राज्य मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान और पार्टी के हरिद्वार जिला अध्यक्ष संदीप गोयल ने कहा कि उन्हें कांवड़ियों और भाजपा के किसी सदस्य के बीच विवाद की किसी घटना की जानकारी नहीं है.

धारा 153A क्या है?

IPC की धारा 153(A) धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बिगाड़ने के मामले में लगाई जाती है. इसमें 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

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