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कहीं आपको भी तो नहीं मिला है बच्चा चोरी करने वाले गिरोह से सावधान करने वाला मेसेज?

कई राज्यों में ऐसे मेसेज वायरल हो रहे हैं. ये मेसेज जानलेवा हैं. कइयों की हत्या करवा चुके हैं.

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दाहिनी तरफ नीलोत्पल दास हैं. बाईं ओर हैं अभिजीत नाथ. शुक्रवार देर शाम असम के कर्बी अंगलॉन्ग जिले में एक भीड़ ने इन दोनों को बच्चा चोर समझकर घेर लिया. फिर पीट-पीटकर इनकी हत्या कर दी (फोटो: फेसबुक)
8 मई, 2018. असम में एक भीड़ ने दो लोगों को पीट-पीटकर मार डाला.
24 मई, 2018. बेंगलुरु में भीड़ ने पीट-पीटकर 25 साल के एक युवक की जान ले ली.
27 मई, 2018. हैदराबाद में आधी रात के करीब भीड़ ने पत्थरों से मारकर एक 52 साल के भिखारी की जान ले ली. उसके साथ के तीन लोग बुरी तरह जख्मी हो गए.
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कम से कम पांच लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर जान ले ली. अलग-अलग घटनाओं में.
मई 2017. झारखंड में भीड़ ने पीट-पीटकर सात लोगों को जान से मार दिया. दो अलग-अलग वारदातों में.
इन सब घटनाओं में कुछ बातें कॉमन हैं. एक, भीड़. दूसरी, सोशल मीडिया. खासतौर पर वॉट्सऐप. तीसरी, बच्चा चोरी की अफवाह.
अभिजीत और नीलोत्पल,
अभिजीत और नीलोत्पल, दोनों असम के ही रहने वाले थे. घूमने के लिए कर्बी आन्गलोंग पहुंचे थे (फोटो: फेसबुक)

पहले ये मेसेज देखिए. ये वॉट्सऐप पर शेयर हो रहा एक मेसेज है-
कृपया सावधान रहें राँची,घोराठी,तिलैया,चितरतपुर, गोला,बरवाडीह और रामगढ , ओरमांझी, पतरातू, हज़ारीबाग़, बोकारो, आदि जगोहो पर 15 से 20 लोगों की टोली आई है उनके साथ बच्चे और लेडीस हैं और उनके पास हथियार भी हैं और और आधी रात को किसी भी वक्त आते हैं और बच्चे के रोने की आवाज आती है कृपया दरवाजा ना खोले प्लीज ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में से शेयर करें यह अस्थानीये पुलिस की तरफ से मैसेज है पूरे एरिया में 2 से 3 दिन के अंदर फेल जाना चाहिए। अपनी सूरक्षा अपने हाथ, सावधान रहे, जनहित मे जारी🙏🏼
अब नीचे एक और मेसेज पढ़िए-
कृपया सावधान रहें मटेला गगास मनेला आदि जगोहो पर 15 से 20 लोगों की टोली आई है उनके साथ बच्चे और लेडीस हैं और उनके पास हथियार भी हैं और और आधी रात को किसी भी वक्त आते हैं और बच्चे के रोने की आवाज आती है कृपया दरवाजा ना खोले प्लीज ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में से शेयर करें यह अस्थानीये पुलिस की तरफ से मैसेज है पूरे एरिया में 2 से 3 दिन के अंदर फेल जाना चाहिए। अपनी सूरक्षा अपने हाथ, सावधान रहे, जनहित मे जारी🙏🏼
मेसेज की भाषा एक सी है ऊपर के दोनों मेसेज ध्यान से देखिए. इनमें क्या फर्क है? ऊपर वाले मेसेज में झारखंड की जगहें हैं. नीचे वाले मेसेज में जिन तीन जगहों का जिक्र है, वो सभी अल्मोड़ा जिले में आती हैं. जगहों के नाम के अलावा बाकी पूरा मेसेज एक है. व्याकरण की गलतियां भी एक सी हैं. पिछले तकरीबन एक-डेढ़ साल से ऐसे मेसज खूब शेयर हो रहे हैं. वॉट्सऐप पर. फेसबुक पर. मई 2017 में झारखंड से खबर आई. कि भीड़ ने दो अलग-अलग घटनाओं में सात लोगों को पीट-पीटकर मार डाला. उस भीड़ में ग्रामीण थे. उन्हें वॉट्सऐप पर मेसेज मिला था. कि बच्चा चोरी करने वाला एक गिरोह आया हुआ है. हिंदुस्तान टाइम्स ने तब गांववालों से बात की थी. उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स को वॉट्सऐप पर आया मेसेज दिखाया था. मेसेज में लिखा था-
ये संदिग्ध बच्चा चोर अपने साथ नशीली दवा, इंजेक्शन्स, स्प्रे, रूई और छोटे-छोटे तौलिये लेकर चल रहे हैं. वो हिंदी, बांग्ला और मलयालम बोलते हैं. अगर आपको अपने घर के पास कोई अजनबी दिखता है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को खबर दीजिए. ये अनजान लोग बच्चा चुराने वाले गिरोह के सदस्य हो सकते हैं.
ज्यादातर लोगों को तो पता ही नहीं, कि मेसेज फर्जी भी हो सकता है गांववालों ने समझा कि वॉट्सऐप पर आया है, तो सच ही होगा. सच है कि नहीं, ये सवाल भी उनके दिमाग में नहीं आया. उन्होंने इसे सच ही समझा. उन्हें नहीं पता कि फेक न्यूज नाम की भी कोई चीज होती है. उन्हें मेसेज मिला और वो डर गए. फिर कई मेसेज ऐसे भी थे, जिनके साथ खौफनाक तस्वीरें थीं. खून, लाशें. वो सहम गए. उनको नहीं पता कि फोटोशॉप क्या होता है. कि कहीं का लिंक, कहीं और की तस्वीर उठाकर लोग उसे कहीं और का बताकर चला देते हैं. उन्होंने तो बस मेसेज पढ़ा या किसी के मुंह से उस मेसेज के बारे में सुना और उसपर यकीन कर लिया. फिर उनके लिए हर अजनबी बच्चा चुराने वाले गिरोह का संदिग्ध था. और इसी का नतीजा था कि भीड़ ने मार डाला.
5 मार्च, 2015 को नागालैंड के दीमापुर में एक भीड़ ने जेल के अंदर घुसकर बलात्कार के आरोपी सईद फरीद खान को घसीटते हुए बाहर निकाला. उसे नंगा किया और उसकी परेड निकाली. फिर उसे पीट-पीटकर मार डाला. मॉब लिंचिंग के जिक्र पर ये घटना हमेशा याद रखी जाएगी (फोटो: पीटीआई)
5 मार्च, 2015 को नागालैंड के दीमापुर में एक भीड़ ने जेल के अंदर घुसकर बलात्कार के आरोपी सईद फरीद खान को घसीटते हुए बाहर निकाला. उसे नंगा किया और उसकी परेड निकाली. फिर उसे पीट-पीटकर मार डाला. मॉब लिंचिंग के जिक्र पर ये घटना हमेशा याद रखी जाएगी (फोटो: पीटीआई)

बहुत सारे संयोग एक जैसे थे एक साल बाद. जून 2018. तारीख 8 जून. असम का कर्बी अंगलॉन्ग जिला. यहां एक गांव है- पंजुरी काचारी. ये सुंदर जगह है. मगर बहुत दूर-दराज में. बाहरी लोग न के बराबर ही यहां जाते होंगे. यहां कर्बी जनजाति के लोग रहते हैं. गुवाहाटी के दो युवक- अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास. दोनों पिकनिक मनाने इधर आए थे. अपनी काले रंग की SUV में बैठकर इधर से जा रहे थे. उनके आने से पहले गांववालों के पास अफवाह पहुंच चुकी थी. किसी के वॉट्सऐप पर. फिर उसके मुंह से दूसरों के कान तक. अफवाह ये थी कि बच्चा चुराने वाले गिरोह के दो लोगों ने एक बच्चे को उठा लिया है और वो एक काले रंग की गाड़ी में भागे हैं. अफवाहों से लैस ग्रामीणों ने जब अभिजीत और नीलोत्पल को देखा, तो उन्हें बच्चा चोर समझा. कई सारे संयोग मिल रहे थे. काली गाड़ी, दो लोग. भीड़ ने अभिजीत और नीलोत्पल की कार रुकवाई.
From Alhlaq to Abhijit, people lynched as they thought it is ok to lynch..... it has been happening from the last few...
Posted by Abu Zakaria
on Sunday, June 10, 2018
दोनों गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन भीड़ नहीं मानी पहले भीड़ छोटी थी. फिर भीड़ बढ़ती गई. लोगों को मालूम चला कि बच्चा चोर पकड़े गए हैं. फौरन भीड़ जुट गई. करीब 500 के करीब लोग थे. भीड़ ने अभिजीत और नीलोत्पल को कार से घसीटकर बाहर निकाला. फिर डंडों से उन्हें मारने लगे. अभिजीत और नीलोत्पल, दोनों हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे. कहते रहे कि वो बच्चा चोर नहीं हैं. असम के ही रहने वाले हैं. घूमने निकले थे. एक विडियो है इस घटना का. इसमें नीलोत्पल गिड़गिड़ा रहे हैं. अपने मां-पिता का नाम लेकर लोगों को यकीन दिला रहे हैं. कि वो यहीं के रहने वाले हैं. मगर भीड़ ने उनका भरोसा नहीं किया. कार में कोई बच्चा नहीं मिला. फिर भी लोग दोनों को पीटते रहे. मामले की खबर लोकल डोकमुका पुलिस थाने को भी हुई. मगर जब तक पुलिस वहां पहुंची, तब तक अभिजीत और नीलोत्पल में शायद की जान का कोई कतरा बाकी था. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. मगर वहां डॉक्टरों ने कहा कि वो मर चुके हैं. ये लिखने की जरूरत नहीं है कि अभिजीत और नीलोत्पल, दोनों ही निर्दोष थे.
लोग सोशल मीडिया पर नीलोत्पल और अभिजीत के लिए पोस्ट लिख रहे हैं. उनके लिए न्याय मांग रहे हैं.
लोग सोशल मीडिया पर नीलोत्पल और अभिजीत के लिए पोस्ट लिख रहे हैं. उनके लिए न्याय मांग रहे हैं. इस घटना की निंदा कर रहे हैं. मगर ये इस तरह की पहली घटना नहीं है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ महीनों के दौरान ऐसी वारदातों में तेजी आई है.
ज्यादातर मेसेज कॉपी-पेस्ट हैं उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात. इन सब राज्यों में ऐसे मेसेज वायरल हो रहे हैं. हमने ऐसे कई मेसेज देखे. अलग-अलग राज्यों के. ज्यादातर की एक ही भाषा. बस जगहों के नाम अलग. बाकी पूरा मेसेज सेम टू सेम. कई सारे मेसेज तो ऐसे हैं, जिनमें बच्चा चोरी का कोई जिक्र नहीं है. बस किसी गिरोह का नाम लेकर उनके अपराध करने के तरीके का ब्योरा दिया गया है और लोगों को सावधान रहने के लिए कहा गया है. ये मेसेज अलग-अलग तरीके से समझे जाते हैं. इनका अलग-अलग मतलब निकाल लिया जाता है. इन्हें अलग-अलग तरह से समझा दिया जाता है. इन मेसेजों ने बहुत हत्याएं करवाई हैं. असम में हुई मॉब लिंचिंग सबसे ताजी है. हम आपको कुछ राज्यों में वायरल हो रहे इस मेसेज का स्क्रीनशॉट दिखाते हैं.
ये बिहार में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट है. तस्वीरें अलग-अलग इस्तेमाल हुई हैं. कई जगहों पर तो बेहद खौफनाक तस्वीरों और विडियो का इस्तेमाल किया गया है.
ये बिहार में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट है. तस्वीरें अलग-अलग इस्तेमाल हुई हैं. कई जगहों पर तो बेहद खौफनाक तस्वीरों और विडियो का इस्तेमाल किया गया है.

झारखंड में पिछले काफी महीनों से ऐसे मेसेज वायरल हो रहे हैं.
झारखंड में पिछले काफी महीनों से ऐसे मेसेज वायरल हो रहे हैं.

ये उत्तराखंड में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट.
ये उत्तराखंड में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट.

ये ओडिशा में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट
ये ओडिशा में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट

ये राजस्थान में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट
ये राजस्थान में वायरल हो रहे मेसेज का स्क्रीनशॉट

ये झारखंड में वायरल हो रहे वॉट्सऐप मेसेज का स्क्रीनशॉट
ये झारखंड में वायरल हो रहे वॉट्सऐप मेसेज का स्क्रीनशॉट
वायरल मेसेज की पहुंच ज्यादा है, पुलिस-प्रशासन की कम पुलिस बार-बार कह चुकी है. कि लोग इन अफवाहों पर ध्यान न दें. मगर पुलिस की अपील उतनी वायरल नहीं हो पाती, जितनी वायरल ये मेसेज हो रहे हैं. एक बार जिसने मेसेज देखा या पढ़ा, वो इसका काउंटर देखेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है. इन वायरल मेसेजों का जो टारगेट रीडर है, उसको फेक न्यूज का कॉन्स्पेप्ट समझाने के लिए पुलिस और प्रशासन को बहुत जतन करना होगा. उन तक पहुंचने और उन्हें जागरूक करने के लिए संसाधन खर्च करने होंगे. जाहिर है, प्रशासन ये कर पाने में कामयाब नहीं हुआ है. तैयारी कितनी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि कई राज्यों की पुलिस का फेसबुक और ट्विटर पर वैरिफाइड अकाउंट तक नहीं है. उन्हें लंबे समय तक अपडेट नहीं किया जाता. महीनों, बल्कि सालों तक भी पेज पर एक अपडेट नहीं आती. असम पुलिस भी इसी कैटगरी में शामिल है.
घटना हो जाने के बाद कुछ समय के लिए इंटरनेट पर रोक लगाना या सोशल मीडिया बैन कर देना इलाज नहीं है. ये अफवाहें मुंहजुबानी भी फैलती हैं. और नुकसान कर जाती हैं. पहले-पहल किसने मेसेज लिखा, मेसेज कहां से चलकर फैला, कई बार ये पता कर पाना भी बहुत मुश्किल होता है. आप किसे सजा देंगे? भीड़ को? असम में हुई घटना का एक विडियो था. पुलिस ने इस विडियो को देखकर वहां मौजूद लोगों की पहचान की. 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मगर हर घटना का विडियो नहीं होता. ऐसे मामलों में आप किसको पकड़ेंगे? भीड़ को?
नीचे कुछ स्क्रीनशॉट्स हैं. कुछ राज्य पुलिसों के ट्विटर हैंडल की तस्वीर. वैरिफाइड अकाउंट न हो, तो कैसे पता लगेगा कि ये फर्जी पेज नहीं है. साइबर क्राइम से निपटने में पुलिस की तैयारी कैसी है, ये इसकी एक मिसाल है. बाकी आप इन पेजों पर जाकर पुलिस का ऐंगेजमेंट देखिए. महीनों तक पेज पर कोई अपडेट नहीं आती.
assam-police

bihar-police

jharkhand-police

uttarakhand-police

 


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