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वेनेजुएला के पास कितना तेल है जो अमेरिका हजम नहीं कर पा रहा?

Venezuela Oil Reserve: Donald Trump के एजेंडा में साफ तौर पर तेल है. उन्होंने 3 जनवरी को कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला के रिजर्व पर कंट्रोल करेगा. उन्होंने यह भी कहा था कि वेनेजुएला के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में अरबों डॉलर इन्वेस्ट करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को लगाएगा.

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वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. (Facebook)

कहां तो चर्चा थी कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, कहां तेल पर ही कत्लेआम मचा हुआ है. तेल भंडार के बारे में सोचते हैं, तो सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत जैसे मिडिल ईस्ट देश और इराक का नाम याद आता है. लेकिन, वेनेजुएला में ऐसे क्या 'सुरखाब के पर' लगे हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीयत वहां के तेल पर बिगड़ी हुई है.

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अमेरिका ने ड्रग तस्करी के आरोपों में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया है. उसने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हवाई हमले किए, जिसमें कई लोगों की मौत हुई. तब जाकर मादुरो और फ्लोरेस को पकड़कर न्यूयॉर्क लाया गया.

हालांकि, 3 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला जाएंगी और खूब पैसा कमाएंगी. इसके लिए उन्होंने 200 साल से भी पुरानी 1823 की अमेरिकी डॉक्ट्रिन Monroe Doctrine का सहारा लिया. ना केवल सहारा लिया, बल्कि उसमें अपना नाम भी जोड़ दिया- Don-Roe Doctrine.

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इस डॉक्ट्रिन के तहत, अमेरिका को वेस्टर्न हेमिस्फेयर में अपने अलावा किसी और का दखल, खासकर यूरोप का दखल मंजूर नहीं है. वेनेजुएला पर अटैक करके ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि वेस्टर्न हेमिस्फेयर पर अमेरिका का ही एकाधिकार है और उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता. लेकिन वेनेजुएला इतना इंपोर्टेंट क्यों है? इसमें तेल एक बड़ी वजह है.

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. सऊदी अरब, ईरान, इराक जैसे देशों से कहीं ज्यादा तेल वेनेजुएला की जमीन में दबा है. बस जरूरत उसको बाहर निकालने की है. ट्रंप से संकेत मिलते हैं कि अमेरिकी कंपनियां अब खुलकर वेनेजुएला के तेल भंडार का दोहन करेंगी और मालामाल होंगी. हालांकि, ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि वेनेजुएला के लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा.

तेल उत्पादन देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ दी पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) के मुताबिक, वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल से भी ज्यादा कच्चे तेल का भंडार है. माने वेनेजुएला के पास दुनिया का करीब एक चौथाई कच्चा तेल है. दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है, जिसके पास 267 अरब बैरल कच्चा तेल है. तीसरे नंबर पर ईरान 208 अरब बैरल कच्चे तेल के भंडार का मालिक है.

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वेनेजुएला के पास तेल भंडार तो सबसे ज्यादा है, लेकिन तेल उत्पादन बेहद कम है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला मात्र 10 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का उत्पादन करता है, जो दुनिया भर के ऑयल प्रोडक्शन का महज 0.8 फीसदी है. अमेरिकी कंपनी शेवरॉन इकलौती विदेशी कंपनी है, जिसे वेनेजुएला का तेल बेचने की इजाजत है.

ट्रंप के एजेंडा में साफ तौर पर तेल है. उन्होंने 3 जनवरी को कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला के रिजर्व पर कंट्रोल करेगा. उन्होंने यह भी कहा था कि वेनेजुएला के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में अरबों डॉलर इन्वेस्ट करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को लगाएगा.

ट्रंप ने फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो घर पर एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा,

"हम अपनी बहुत बड़ी यूनाइटेड स्टेट्स तेल कंपनियों को (वेनेजुएला में) अंदर जाने देंगे, जो दुनिया में सबसे बड़ी हैं. अरबों डॉलर खर्च करेंगे, बुरी तरह टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगे."

ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ वाली एक टीम मुश्किल में फंसे वेनेजुएला पर कंट्रोल पाने के लिए वेनेजुएला के लोगों के साथ काम करेगी. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि वेनेजुएला में अमेरिका का लंबे समय तक दखल बना रहेगा.

वीडियो: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की पूरी कहानी

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