लेकिन एक समस्या है. विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के पास वहां कोई चेहरा नहीं है, जिसके नाम पर पार्टी दांव खेल सके. वैसे तो पार्टी के पास चार ऐसे नेता हैं जो राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ये नाम हैं, बीसी खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा. विजय बहुगुणा पिछले साल ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं. इनके अलावा भी नेता हैं बीजेपी में, जो मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, जैसे अजय भट्ट, महारानी लक्ष्मी शाह, अजय टम्टा और सतपाल महाराज.
कांग्रेस का क्या हाल है?
कांग्रेस का सारा दारोमदार मौजूदा सीएम हरीश रावत पर है. दूसरे नंबर पर हैं प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष किशोर उपाध्याय. अपने नेताओं के बागी तेवर कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है. कांग्रेस के बड़े नेता यशपाल आर्य बीजेपी के संपर्क में हैं. यशपाल आर्य पार्टी से नाखुश चल रहे हैं. वो दो सीटों की मांग कर रहे थे. नैनीताल की सीट अपने बेटे के लिए. और बाजपुर अपने लिए. कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एन डी तिवारी भी बीजेपी के रडार पर हैं. अगर उनके बेटे को लालकुआं या हल्द्वानी से टिकट मिल जाता है तो वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. मुख्यमंत्री पद के लिए किए गए इंडिया टुडे के सर्वे में बीसी खंडूरी 44% वोट के साथ सबसे ऊपर रहे. वहीं कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत 42% वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे.
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद के लिए इंडिया टुडे का सर्वे
उत्तराखंड दो क्षेत्रों में बंटा हुआ है, गढ़वाल और कुमाऊं. बीजेपी का मेन फोकस गढ़वाल क्षेत्र की 41 सीटों पर है. इसकी वजह ये भी है कि बीजेपी के ज्यादातर बड़े नेता वहीं से आते हैं. पर सब कुछ इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि इन नेताओं में से ज्यादातर नेता ऐसे हैं जो अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट चाहते हैं. जबकि नरेंद्र मोदी की तरफ से "रिश्तेदारों को टिकट नहीं" का मंत्र दिया गया है. बीजेपी नेता कुंवर प्रणव सिंह 'चैंपियन' अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे हैं. बीजेपी के प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान भी अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं. पूर्व विधानसभा स्पीकर हरवंश सिंह अपने बेटे के लिए देहरादून कैंट विधानसभा के लिए टिकट मांग चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता बीसी खंडूरी भी अपनी अपनी बेटी रितु के लिए कर्णप्रयाग या यमकेश्वर से टिकट चाहते हैं.
कुमाऊं में विधानसभा की 29 सीटें हैं. हरीश रावत की स्थिति यहां मजबूत है. पर वो गढ़वाल से भी इलेक्शन लड़ना चाहते हैं. जबकि कांग्रेस के बागी खेमे का हरीश रावत पर शुरू से ही आरोप रहा है कि वो गढ़वाल क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं. इस समय कांग्रेस का एक खास आधार है प्रदेश में. जिससे हरीश रावत अपने कद को मजबूत कर रहे हैं. राज्य के 50% से ज्यादा राजपूत कांग्रेस की तरफ हैं. मुसलमान और दलित जिनकी संख्या राज्य में 32-35 फीसदी तक की है. परंपरागत तरीके से वो कांग्रेस को ही वोट करते आए हैं. बीजेपी का सारा ध्यान ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी वोटर्स को अपनी तरफ खींचने का है. इसके आलावा बीजेपी दलित वोटर्स को भी दलित-सम्मेलनों के द्वारा रिझाने में लगी है.
दोनों ही खेमा चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं. कांग्रेस ने अपने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को फिलहाल उत्तराखंड भेजा है. ताकि पार्टी वहां अपनी चुनावी रणनीति को आखिरी अंजाम तक पंहुचा सके. वहीं बीजेपी की तरफ से जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान को उत्तराखंड में पार्टी का इलेक्शन इंचार्ज बनाया गया है.
ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है
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