The Lallantop

उत्तराखंड के UCC में ऐसा क्या है जिसपर ओवैसी ने सवाल उठाए हैं?

Uttarakhand Government की मंजूरी के बाद UCC के अगले सप्ताह लागू होने की संभावना जताई जा रही है. लेकिन इस बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लागू किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसपर सवाल खड़े किए हैं.

Advertisement
post-main-image
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने UCC को मंजूरी दी है, जिसपर सांसद ओवैसी ने सवाल खड़े किए हैं. (तस्वीरPTI)

उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट से समान नागरिक संहिता (UCC) की नियमावाली को मंजूरी दे दी है. मंजूरी के बाद इस कोड के अगले सप्ताह लागू होने की संभावना जताई जा रही है. लेकिन इस बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लागू किए जाने पर सवाल खड़े किए हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
ओवैसी ने क्या कहा?

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने UCC की आलोचना की है. ओवैसी ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा,

“जब आप हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू सक्सेशन एक्ट को छूट दे रहे हैं तो इसे UCC कैसे कह सकते हैं. इसके अलावा यह आदिवासियों पर लागू नहीं होगा तो ऐसे में इसे कैसे UCC कहा जा सकता है. आप केवल मुसलमानों को मजहबी तरीके से शादी तलाक या जायदाद का बंटवारा करने से रोक रहे हैं.”

Advertisement


उन्होंने आगे कहा,

आप UCC की बात करते हैं लेकिन अगर कोई हिंदू धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना चाहता है तो आपको अनुमति लेनी होगी. इस देश में अगर आप अपने धर्म के मुताबिक कुछ नहीं करना चाहते हैं तो उसके लिए स्पेशल मैरिज एक्ट है, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट है. उसको इस्तेमाल करिए न.

ओवैसी ने सवाल उठाया कि ‘हिंदू अन डिवाइडेड टैक्स’ छूट दो साल पहले 1700 करोड़ रुपये का मिला था. यह मुस्लिमों और ईसाइयों को क्यों नहीं मिलता है?

Advertisement
कैबिनेट ने दी मंजूरी, जल्द हो सकता है लागू

उत्तराखंड कैबिनेट ने UCC की नियमावली 2025 को 20 जनवरी को मंजूरी दे दी. मीडिया रपटों के मुताबिक, इसके 26 जनवरी तक लागू होने की उम्मीद है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कानून के 23 जनवरी को स्थानीय निकाय चुनावों के बाद लागू होने की उम्मीद है क्योंकि अभी वहां आदर्श आचार संहिता लागू है. इसके लागू होते ही, उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन जाएगा.

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा,

“हमने साल 2022 में घोषणा की थी कि सरकार बनने के बाद हमारा पहला काम UCC लागू करना होगा. कमेटी ने ड्राफ्ट फ्रेम किया और इसे राष्ट्रपति के मुहर के साथ पास कर दिया गया. इसको संबंध में ट्रेनिंग अंतिम चरण में है और लागू किए जाने दिन की जल्द ही घोषणा की जाएगी.”

यह भी पढ़ें:उत्तराखंड UCC: लिव इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, शादी और तलाक को लेकर भी सुझाव

UCC कानून के कुछ प्रावधान

कानून में शादी के लिए लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल तय की गई है. इस कानून के तहत महिलाएं भी पुरुषों के समान अधिकारों का हवाला देकर तलाक ले सकेंगी. लिव-इन में रहने वालों को रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा.  

UCC कानून आदिवासी समुदाय को छोड़कर उत्तराखंड के सभी निवासियों पर लागू होगा. इसके तहत विवाहित जोड़ों के लिए छह महीने के भीतर अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा जबकि लिव-इन कपल को कानून लागू होने के समय से रजिस्ट्रेशन कराने के लिए एक महीने की मोहलत मिलेगी.

उत्तराखंड सरकार ने UCC नियमों की जिस नियमावली को मंजूरी दी है, उसमें ड्राफ्टिंग कमेटी ने व्यक्तिगत कानूनों से खड़े होने वाले विवादों को हल करने के लिए जो तरीके सुझाए हैं उनका जिक्र नहीं है. इस कानून के तहत शादी, तलाक और लिव-इन के रजिस्ट्रेशन को कवर किया है, लेकिन व्यक्तिगत कानूनों के संबंध में होने वाली दिक्कतों को लेकर दी गई सिफारिशों को छोड़ दिया गया है.

उत्तराखंड में UCC 7 फरवरी 2024 को विधानसभा ने पारित किया था. कानून लागू करने का नियम तैयार करने के लिए गठित कमेटी ने 18 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. सरकार ने इसे राज्य के 24वें स्थापना दिवस यानी 9 नवंबर से पहले लागू करने की योजना बनाई थी सेकिन  स्टाफ की ट्रेनिंग पूरी नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो सका.

वीडियो: सियालदह कोर्ट की इस दलील के चलते फांसी की सजा से बच गया संजय रॉय

Advertisement