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यूपी में 38 हज़ार लोगों की नौकरी जाने का लेटर हुआ वायरल, बवाल होते-होते रह गया

कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर थे लेटर में.

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ग्राम रोजगार सेवकों की संविदा रद्द होने का लेटर हुआ वायरल.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 25 सितम्बर को पुलिस की लाठियां खाने के बाद 28 सितंबर को ग्राम रोजगार सेवकों को एक और झटका लगा. एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. सीधा ग्राम विकास आयुक्त की तरफ से. उनके सिग्नेचर के साथ. लिखा था ग्राम रोजगार सेवकों की संविदा तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है. इससे उत्तर प्रदेश के करीब 38 हज़ार ग्राम सेवकों में हड़कंप मच गया. दोबारा धरना-प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी गई. मगर जब आयुक्त ग्राम्य विकास पार्थ सारथी सेन शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई लेटर जारी नहीं किया है. उस पर जो साइन हैं, वो भी उनके नहीं हैं. यानी लेटर फर्जी था. इसकी जांच करवाने के आदेश दे दिए हैं. जो दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
जो लेटर वायरल हुआ, उसमें लिखा था कि मनरेगा के तहत ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्ति 2006- 07 में संविदा के आधार पर हुई थी. इसमें रोजगार सेवकों की सेवाएं एक वर्ष या अधिकतम तीन वर्ष के लिए होने की बात थी. इसके बाद ये संविदा स्वतः खत्म हो जाएगी. इस लेटर में बाकायदा पत्र संख्या भी लिखी हुई है. पूरा लेटर भी पढ़ लीजिए:
यही फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल.
यही फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल.

समय रहते मामला क्लियर हो गया वरना हो जाता हंगामा
25 सितंबर को लखनऊ में लाठीचार्ज से ग्राम रोजगार सेवक पहले ही नाराज़ थे. 28 सितंबर को रोजगार सेवक सभी जिला मुख्यालयों में लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. फिर अचानक संविदा रद्द होने का ये लेटर वायरल हो गया. इससे सभी का बीपी फिर हाई हो गया. माहौल गरमाने लगा, हालांकि इनके नेताओं ने समय रहते इस बात को शासन से कंफर्म कर लिया कि लेटर फर्जी है. ग्राम रोजगार सेवक संगठन के नेता कमलेश कुमार गुप्ता ने बताया कि ये कई वॉट्सएप ग्रुपों में वायरल हो गया था, मगर समय रहते चीज़ें साफ होने से हंगामा नहीं हुआ. अब संगठन 12 अक्टूबर को लखनऊ में फिर विधानसभा घेराव की तैयारी कर रहा है.
25 सितंबर को लखनऊ में हुआ था रोजगार सेवकों पर लाठीचार्ज.
25 सितंबर को लखनऊ में हुआ था रोजगार सेवकों पर लाठीचार्ज.

कौन हैं ये ग्राम रोजगार सेवक
केंद्र सरकार की एक योजना है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है. इन श्रमिकों को काम दिलवाने की जिम्मेदारी इन्हीं ग्राम रोजगार सेवकों की होती है. श्रमिकों को जॉब कार्ड भी यही लोग दिलवाते हैं. गांव में जहां काम होना होता है, उसमें क्या-कैसे होगा, कितना सामान लगेगा, इसकी रिपोर्ट यही लोग तय करते हैं. इनका तय मानदेय करीब 6 हजार रुपए होता है.
13 दिन तक लखनऊ में चला था धरना.
13 दिन तक लखनऊ में चला था धरना.

25 सितंबर को लाठी खाने के करीब 13 दिन पहले यानी 13 सितम्बर से लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में इन ग्राम रोजगार सेवकों का अनिश्चितकालीन धरना चल रहा था. उनकी नौ मांगें थीं. इसमें मेन मांग 9000 पदों पर हो रही पंचायत सहायकों की भर्ती से जुड़ी थी. इनका कहना था कि इस भर्ती के बजाय रोजगार सेवकों का ही इसमें समायोजन कर दिया जाए. इसके आश्वासन के लिए रोजगार सेवक, सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करना चाहते थे. प्रशासन ने अधिकारियों से मिलाने की बात कही, मगर कोई नहीं मिला. इस पर सभी विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़े तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. 91 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.


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