उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ‘ज्ञानवापी’ साक्षात ‘विश्वनाथ’ (शिव) हैं. CM योगी शनिवार, 14 सितंबर को गोरखपुर में एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे. नाथ पंथ पर आधारित इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय था, 'समरस समाज के निर्माण में नाथ पंथ का अवदान'. इसी दौरान उन्होंने ज्ञानवापी का जिक्र किया.
ज्ञानवापी पर कोर्ट के आदेश के अगले दिन योगी बोले- 'लोग दूसरे शब्दों में मस्जिद कहते हैं, लेकिन...'
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम में कहा, 'ज्ञानवापी साक्षात विश्वनाथ ही हैं.'


कार्यक्रम में यूपी के CM योगी ने कहा,
“दुर्भाग्य से वो ज्ञानवापी आज...लोग उसको दूसरे शब्दों में मस्जिद कहते हैं, लेकिन वो ज्ञानवापी साक्षात विश्वनाथ ही हैं.”
सीएम योगी ने ज्ञानवापी को लेकर ये बात तब कही, जब वो सामाजिक समरसता को लेकर आदि शंकर का जिक्र कर रहे थे. उन्होंने बताया कि भगवान विश्वनाथ ने काशी में आचार्य शंकर की परीक्षा ली थी. CM योगी ने कहा,
“जब ब्रह्ममुहु्र्त में आदि शंकर गंगा स्नान के लिए जा रहे होते हैं, तो विश्वनाथ अछूत कही जाने वाले एक व्यक्ति के रूप में उनके रास्ते में खड़े हो जाते हैं. आदि शंकर जब उन्हें मार्ग से हटने को कहते हैं, तो वो पूछते हैं आप किसको हटाना चाहते हैं? आपका ज्ञान क्या इस भौतिक काया को देख रहा है? या इस भौतिक काया के अंदर बसे हुए ब्रह्म को देख रहा है? अगर ब्रह्म सत्य है, तो जो ब्रह्म आपके अंदर है, वही मेरे अंदर भी है. आदि शंकर ने कहा कि आप कौन हैं? उन्होंने कहा कि जिस ज्ञानवापी की साधना के लिए आप केरल से चलकर यहां आए हैं. मैं उसका साक्षात स्वरूप विश्वनाथ हूं. इसके बाद आदि शंकर को एहसास होता है कि भौतिक अस्पृश्यता न केवल साधना के मार्ग की बाधा है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और गरिमा की भी सबसे बड़ी बाधा है.”
इसी दौरान सीएम योगी ने ज्ञानवापी को साक्षात विश्वनाथ बताया और कहा कि दुर्भाग्य से लोग उसको दूसरे शब्दों में मस्जिद कहते हैं.
बता दें कि एक दिन पहले ही यानी 13 सितंबर को वाराणसी की एक कोर्ट ने ज्ञानवापी से जुड़ी हिंदू पक्ष की एक याचिका खारिज की है. हिंदू पक्ष की याचिका में मांग की गई थी कि तहखाने में, जिसमें पूजा चल रही है, उसकी मरम्मत कराए जाने का निर्देश दिया जाए. साथ ही, तहखाने की छत पर नमाजियों की एंट्री पर रोक लगाई जाए. इस याचिका को सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट ने खारिज कर दिया. बता दें कि व्यास तहख़ाने की छत पर नमाज़ पढ़ी जाती है और नीचे तहख़ाने में पूजा होती है.
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