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ज्ञानवापी केस: हिंदू पक्ष को झटका, नमाजियों को 'नो एंट्री' वाली मांग खारिज

अभी व्यास तहख़ाने की छत पर नमाज़ पढ़ी जाती है और नीचे, तहख़ाने में पूजा होती है. हिंदू पक्ष चाहता था कि छत की मरम्मत की जाए. मगर कोर्ट ने इस मांग को भी खारिज कर दिया है.

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13 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 13 सितंबर 2024, 05:15 PM IST)
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तहख़ाने में पूजा जारी रहेगी. (फ़ोटो - एजेंसी)
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ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष की याचिका ख़ारिज हो गई है. हिंदू पक्ष ने मांग की थी कि व्यास तहख़ाने की छत पर नमाजियों की एंट्री पर रोक लगे. वाराणसी कोर्ट ने इस मांग को ख़ारिज कर दिया है. इसके अलावा मरम्मत की अपील पर भी रोक लगा दी गई है. वस्तुस्थिति ये है कि व्यास तहख़ाने की छत पर नमाज़ पढ़ी जाती है और नीचे तहख़ाने में पूजा होती है. हिंदू पक्ष चाहता था कि छत की मरम्मत की जाए. मगर कोर्ट ने इस मांग को भी मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. हालांकि, व्यास तहख़ाने में पूजा जारी रहेगी.

कोर्ट में पक्ष-विपक्ष?

16 दिसम्बर, 2023 को कानपुर की आकांक्षा तिवारी, लखनऊ के दीपक प्रकाश शुक्ला, अमित कुमार और सुविद प्रवीण ने ये याचिका दाख़िल की थी. याचिका के मुताबिक़, व्यास तहखाना बहुत पुराना है और इसकी छत कमज़ोर है. पानी टपकता है. तहख़ाने के पिलर भी कमज़ोर हैं. फिर नमाज़ियों के आने-जाने से छत पर भार बढ़ता है. ऐसे में नमाज़ियों को छत पर नमाज़ करने से रोका जाए और तहख़ाने की मरम्मत कराई जाए. वरना यहां कोई भी हादसा हो सकता है.

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में हिंदू पक्ष की याचिका का विरोध किया था. दलील दी कि वो सालों से छत पर नमाज़ पढ़ रहे हैं, छत इतनी भी कमज़ोर नहीं कि आवाजाही से ढह जाए. मुस्लिम पक्ष ने कहा,

“सालों से मुसलमान यहां पांच वक़्त की नमाज़ बिना रोक-टोक के पढ़ते चले आ रहे हैं. ज्ञानवापी में क्षमता के अनुसार जितने नमाज़ी आ सकते हैं, उतने ही लोग नमाज पढ़ते हैं. बिना वजह वहां कोई नहीं घूमता.”

सिविल जज सीनियर डिवीजन हितेश अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुना. उन्होंने तहख़ाने में चल रही पूजा को यथावत रखा, मगर तहख़ाने के कस्टोडियन ज़िलाधिकारी को आदेश दिया कि किसी भी प्रकार की मरम्मत की अनुमति न दें.

फ़ैसले के बाद हिंदू पक्ष नाख़ुश है. वो पूछ रहे हैं कि अगर कोई हादसा होता है, तो कौन ज़िम्मेदार होगा. साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि वो उच्च अदालत में अपील करेंगे.

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