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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप, मौत का आंकड़ा 600 पार, बच्चों में इस बीमारी को ऐसे पहचानें

मरने वालों में ज़्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे हैं. अब तक हुई कुल मौतों में से 90 मामलों में लैब टेस्ट के ज़रिए खसरे की पुष्टि हुई है. जबकि 511 मौतों को खसरे का संदिग्ध मामला माना गया है.

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खसरा वायरस से होने वाली बीमारी है

बांग्लादेश में खसरे से मौतों का आंकड़ा 600 पार पहुंच गया है. वहां इस साल मार्च में खसरे के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे थे. मरने वालों में ज़्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे हैं. अब तक हुई कुल मौतों में से 90 मामलों में लैब टेस्ट के ज़रिए खसरे की पुष्टि हुई है. जबकि 511 मौतों को खसरे का संदिग्ध मामला माना गया है. वहीं, खसरे के संदिग्ध मामलों की कुल संख्या साढ़े 74 हज़ार से ज़्यादा हो चुकी है.

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लेकिन सवाल है कि बांग्लादेश में खसरा इतनी तेज़ी से क्यों फैला?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO की रिपोर्ट बताती है कि साल 2024-25 में बांग्लादेश में खसरा-रुबेला यानी MR वैक्सीन की कमी हो गई थी. इसलिए कई बच्चों को समय पर टीका नहीं लग पाया. साथ ही, नियमित वैक्सीनेशन और बड़े टीकाकरण अभियान भी ठीक से नहीं चल सके. नतीजा ये हुआ कि बड़ी संख्या में बच्चे, खसरा से सुरक्षित नहीं रहे और बीमारी तेज़ी से फैलने लगी.

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खसरा यानी मीज़ल्स बहुत संक्रामक बीमारी है. ये COVID-19 और चिकनपॉक्स से भी लगभग दोगुनी तेज़ी से फैल सकती है. पर खसरा आखिर है क्या? ये फैलता कैसे है? इसके लक्षण क्या है, और क्या इसका कोई इलाज है? ये सारे सवाल हमने पूछे शारदाकेयर-हेल्थसिटी में नियोनेटोलॉजी-पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, प्रोफेसर डॉक्टर अशोक सक्सेना से.

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प्रो. (डॉ.) अशोक सक्सेना, डायरेक्टर, नियोनेटोलॉजी-पीडियाट्रिक्स, शारदाकेयर-हेल्थसिटी

डॉक्टर अशोक कहते हैं कि खसरा वायरस से फैलने वाली बीमारी है. ये संक्रमित व्यक्ति के सांस लेने, खांसने या छींकने पर बहुत तेज़ी से फैलती है. वैसे तो ज़्यादातर लोग खसरा से ठीक हो जाते हैं. लेकिन कुछ मामलों में ये गंभीर और जानलेवा भी हो सकता है. खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों और बहुत कमज़ोर इम्यूनिटी वालों में इसका ख़तरा ज़्यादा होता है.

खसरे से होने वाली ज़्यादातर मौतें इसकी जटिलताओं की वजह से होती हैं. दरअसल, खसरा होने पर शरीर की इम्यूनिटी बहुत कमज़ोर हो जाती है. इससे बच्चे दूसरी बीमारियों के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाते हैं. जैसे इंसेफलाइटिस यानी दिमाग में सूजन आना, ब्लाइंडनेस, गंभीर दस्त और उससे होने वाला डिहाइड्रेशन, कान का इंफेक्शन, निमोनिया और सांस से जुड़ी दूसरी गंभीर समस्याएं.

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वायरस के संपर्क में आने के बाद, खसरा के लक्षण दिखने में 7 से 14 दिन लगते हैं. खसरे के शुरुआती लक्षण हैं- 

- तेज़ बुखार

- नाक बहना

- खांसी

- आंखों का लाल होना, उनसे पानी आना 

- गालों के अंदर छोटे सफेद धब्बे होना

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शरीर पर दाने निकलना खसरे का प्रमुख लक्षण है 

ये लक्षण 4 से 7 दिनों तक रहते हैं. इसके बाद शरीर पर निकलते हैं दाने. जो खसरे का प्रमुख लक्षण हैं. आमतौर पर दाने निकलने में 7 से 18 दिन लगते हैं. ये दाने चेहरे या गर्दन से शुरू होकर शरीर में नीचे की ओर फैलते हैं.

खसरा से संक्रमित व्यक्ति दाने निकलने से चार दिन पहले और चार दिन बाद वायरस फैला सकता है. जिन लोगों को पहले कभी खसरा नहीं हुआ है या जिन्होंने इसकी वैक्सीन नहीं लगवाई है. उनमें से करीब 90% लोग, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमित हो सकते हैं.

खसरा का कोई खास एंटीवायरस इलाज या दवा नहीं है. इसके इलाज का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को कम करना, शरीर को आराम देना और जटिलताओं को रोकना है. मरीज़ को बाकी लोगों से दूर रखा जाता है, ताकि इंफेक्शन न फैले. साथ ही, उसे तरल पदार्थ दिए जाते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो. आमतौर पर मरीज़ 10-15 दिनों में ठीक हो जाते हैं. खसरा से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है वैक्सीन लगवाना. बच्चों को MMR यानी मीज़ल्स, मम्प्स, रूबेला वैक्सीन की दो डोज़ लगवानी चाहिए. पहली डोज़ 9 से 12 महीने पर लगती है. वहीं दूसरी डोज़ 15 से 18 महीने पर लगती है. इस वैक्सीन से 99% तक बचाव हो सकता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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