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आत्महत्या कर रहा 'देश का भविष्य', जानते हैं भारत में हर दिन कितने छात्र जान दे रहे?

बात केवल NEET एस्पिरेंट तक सीमित नहीं है. ये संकट एक परीक्षा से जुड़े छात्रों से कहीं ज्यादा व्यापक है. नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर दिन दर्जनों छात्र आत्महत्या कर रहे हैं.

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एक परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते छात्र. (फाइल फोटो- पीटीआई)

NEET 2026 पहले लीक और उसके बाद रद्द होने के कारण चर्चा का केंद्र रहा. साथ ही चर्चा में रहे वो चार स्टूडेंट्स, जिन्होंने पेपर रद्द होने के बाद आत्महत्या कर अपनी जान गंवा दी. इन्हीं स्टूडेंट्स में गोवा के रहने वाले एक स्टूडेंट की उम्र सिर्फ 17 साल थी. इसके अलावा राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से भी ऐसे मामले सामने आए. ये घटनाएं बताती हैं कि भारत में परीक्षा पास करने की होड़ इतनी बढ़ गई है कि फेल होने का डर दिमागी तनाव से सुसाइड टेंडेंसी में तब्दील हो रहा है.

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और बात केवल NEET एस्पिरेंट तक सीमित नहीं है. ये संकट एक परीक्षा से जुड़े छात्रों से कहीं ज्यादा व्यापक है. नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर दिन दर्जनों छात्र आत्महत्या कर रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में भारत में 14,488 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया, जो साल 2023 में हुए 13,892 मामलों से 596 ज्यादा है. अगर एक दिन के हिसाब से औसत निकाला जाए, तो रोज करीब 40 स्टूडेंट्स आत्महत्या करते हैं. यानी हर 36 मिनट में भारत में कोई न कोई एक पढ़ने वाला बच्चा अपना जीवन समाप्त कर लेता है.

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NCRB ने क्या कहा?

इन घटनाओं पर NCRB ने अपनी रिपोर्ट “एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024” में लिखा है,

“हर आत्महत्या एक व्यक्तिगत त्रासदी है, जो समय से पहले एक व्यक्ति का जीवन छीन लेती है और इसका असर लगातार परिवारों, दोस्तों और पूरे समाज पर पड़ता है.”

इन सभी मामलों में कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती हैं. जैसे महाराष्ट्र के अकोला में 10वीं कक्षा के एक स्टूडेंट ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि SSC परीक्षा में उसके 69 प्रतिशत अंक आए थे. दूसरा मामला उत्तर प्रदेश से है, जहां BTech के एक विद्यार्थी ने अपने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली. उसने एक नोट छोड़ा, जिसमें वो अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के लिए माफी मांग रहा था. 

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इसी तरह उत्तराखंड में 12वीं में फेल होने के बाद एक 18 साल के स्टूडेंट ने अपनी जान दे दी. पटना में भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने पढ़ाई ठीक से न कर पाने के कारण आत्महत्या कर ली.

ये सिलसिला नीट पेपर लीक के बाद भी जारी है. दिल्ली के आजादपुर में 20 साल की नीट एस्पिरेंट ने एग्जाम कैंसिल होने के कुछ दिन बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. वो पिछले दो अटेम्प्ट से फेल हो रही थी. हालांकि 3 मई को हुई परीक्षा के बाद काफी कॉन्फिडेंट थी कि इस बार क्रैक कर जाएगी. लेकिन पेपर लीक ने उसके सारे सपने छीन लिए. 14 मई की शाम को छात्रा अपने घर में मृत मिली. परिवार ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद से वो काफी परेशान थी.

राजस्थान के झुंझनु के रहने वाले प्रदीप मेघवाल को पूरी उम्मीद थी कि वो 650 अंकों के साथ नीट परीक्षा पास कर लेंगे. लेकिन पेपर रद्द होने के बाद तनाव में चले गए. कुछ दिनों बाद उन्होंने अपनी जान दे दी. इसी तरह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में 21 वर्षीय ऋतिक मिश्रा ने भी पेपर कैंसिल होने के बाद तनाव के चलते कथित तौर पर सुसाइड कर लिया. परिवार ने बताया कि ऋतिक का पेपर काफी अच्छा गया था और उन्हें पास होने की पूरी उम्मीद थी.

साउथ गोवा में भी एक 17 वर्षीय नीट एस्पिरेंट की कथित आत्महत्या ने सबको हिलाकर रख दिया. इस केस में आत्महत्या की वजह एग्जाम में फिर असफल होने का डर था. छात्र ने कथित तौर पर अपने नोट में लिखा कि वो अपनी पढ़ाई और हॉकी खेलने के पैशन में संतुलन नहीं बना रहा था. छात्र ने लिखा कि अब वो और परीक्षाएं नहीं दे पाएगा, इसलिए अपनी जान दे रहा है.

इन घटनाओं ने फिर चेताया है कि समाज, सरकार और सिस्टम को अपने युवाओं के प्रति तत्काल सजग होने की जरूरत है.

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