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'भारत टैरिफ देगा, हम नहीं,' अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले डॉनल्ड ट्रंप

India US trade deal: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Donald Trump के तमाम ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' करार दिया था. कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप ने 10% के नए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया है. भारत के साथ व्यापार समझौते पर इस फैसले का क्या असर होगा? ट्रंप ने खुद इसका जवाब दिया है.

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21 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 21 फ़रवरी 2026, 10:10 AM IST)
India US trade deal unchanged donald trump
डॉनल्ड ट्रंप ने 10% के नए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अंतरिम भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India US Trade Deal) बरकरार है और नई दिल्ली पर समझौते के तहत 18 फीसदी टैरिफ ही लगेगा. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के तमाम ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' करार दिया था. इनमें रेसिप्रोकल टैरिफ भी शामिल हैं. कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप ने सभी देशों पर नया 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगा दिया है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के साथ ट्रेड डील पर इस फैसले का क्या असर होगा? इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “कुछ नहीं बदलेगा, वे टैरिफ का भुगतान करेंगे, और हम टैरिफ का भुगतान नहीं करेंगे.”

ट्रंप ने आगे कहा,

भारत के साथ डील यह है कि वे टैरिफ अदा करेंगे और हम टैरिफ अदा नहीं देंगे. पहले जैसा होता था, यह उससे उलट है… वे उन लोगों से कहीं ज्यादा स्मार्ट थे जिनके वे खिलाफ थे. अमेरिका के मामले में... वे हमें लूट रहे थे. इसलिए हमने भारत के साथ एक डील की... वे टैरिफ देंगे. हम नहीं देंगे. हमने थोड़ा पलटी मारी..

भारत को 10% टैरिफ देना होगा

वाशिंगटन डीसी में मौजूद इंडिया टुडे के सीनियर जर्नलिस्ट रोहित शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप तो भारत पर 18 फीसदी टैरिफ रखने पर आमादा हैं, लेकिन बाद में वाइट हाउस को सफाई देनी पड़ गई.

वाइट हाउस के एक अधिकारी का कहना है कि नया 10% ग्लोबल टैरिफ भारत पर लागू होगा और तब तक लागू रहेगा जब तक कोई दूसरी कानूनी अथॉरिटी लागू नहीं हो जाती. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को नए टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और क्या यह इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत पहले लगाए गए टैरिफ की जगह लेगा, तो अधिकारी ने कहा, 

हां, 10% जब तक कोई दूसरी अथॉरिटी लागू नहीं हो जाती.

वाइट हाउस ने साफ किया कि कानूनी तौर पर भारत के टैरिफ कुछ समय के लिए 10 फीसदी ग्लोबल बेसलाइन पर आ जाएंगे. इस बीच अमेरिकी सरकार अभी भी 18 फीसदी टैरिफ को फिर से लागू करने के लिए नए कानूनी रास्ते ढूंढ रही है.

विपक्ष ने लगाए आरोप 

कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि क्या ये टैरिफ इंडिया के हिसाब से सस्टेनेबल (टिकाऊ) हैं? X पर उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा, 

क्या ये टैरिफ प्रोविज़न इंडिया पर सही तरीके से लागू हो सकते हैं? क्या ये नए टैरिफ अभी भी US-इंडिया ट्रेड डील (फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) को बनाए रखेंगे, जिसका किसान, छोटे और मीडियम बिज़नेस, एनर्जी और डेटा एक्सपर्ट, और इकोनॉमिस्ट एक जैसे बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं? क्या मोदी सरकार अब एकतरफा US-इंडिया ट्रेड डील से बाहर निकलने की हिम्मत दिखाएगी?

ये भी पढ़ें: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डॉनल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया

दुनियाभर के देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का प्रमुख आर्थिक एजेंडा रहा है. इसके तहत उन्होंने कई देशों पर अलग-अलग रेसिप्रोकल टैरिफ थोपे हैं. इन देशों में भारत भी शामिल है.

ट्रंप की इस नीति को उन्हीं के देश की कंपनियों और कम से कम 12 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की टैरिफ नीति की वजह से इन कंपनियों के बिजनेस पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. इनका आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी आपातकाल शक्तियों का जिस तरह गलत इस्तेमाल कर टैरिफ थोपे हैं, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के 6-3 के फैसले में, IEEPA के तहत ट्रंप के दुनिया भर में लगाए गए टैरिफ को गलत ठहराया. साथ ही यह भी कहा कि 1977 का कानून प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है. इस फैसले से नाराज ट्रंप ने एक अलग कानूनी नियम के तहत नए 10% ग्लोबल टैरिफ के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया है.

वीडियो: भारत-अमेरिका के ट्रेड डील में किसानों को फायदा या नुकसान ?

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