अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त टैरिफ रद्द करने के बाद ट्रंप प्रशासन को एक और झटका लगा है. अमेरिका के एक ट्रेड कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिन आयातकों (कंपनियों) ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ का भुगतान किया है, वे अब रिफंड के हकदार हैं.
युद्ध में उलझे ट्रंप को फिर झटका, कोर्ट ने टैरिफ से वसूला पैसा रिफंड करने को कहा
Newyork के मैनहट्टन स्थित अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट के जज रिचर्ड ईटन ने सरकार को बिना टैरिफ लगाए अमेरिका में लाखों शिपमेंट लाने की कॉस्ट फाइनल करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने ब्याज के साथ रिफंड वापस करने को भी कहा है.


रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट के जज रिचर्ड ईटन ने सरकार को बिना टैरिफ लगाए अमेरिका में लाखों शिपमेंट लाने की कॉस्ट फाइनल करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने ब्याज के साथ रिफंड वापस करने को भी कहा है. अमेरिका में जब कोई सामान आयात होता है तो इंपोर्टर एंट्री के वक्त एक अनुमानित शुल्क जमा करता है. लगभग 314 दिन बाद उस शुल्क को अंतिम रूप दिया जाता है.
इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है. ईटन ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को निर्देश दिया कि वह उन शिपमेंट्स की एंट्री को बिना टैरिफ के अंतिम रूप दे, जिससे इंपोर्टर्स को रिफंड मिल सके. 4 मार्च को मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा,
“कस्टम्स के लिए ऐसा करना नई बात नहीं है. अगर कोई इंपोर्टर अनुमानित राशि से ज्यादा शुल्क का भुगतान कर देता है तो कस्टम्स रोजाना उनके रिफंड जारी करता है. उनके लिए ऐसा करना संभव है. वे हर दिन एंट्री को लिक्विडेट करते हैं और रिफंड करते हैं.”
रिचर्ड ईटन ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 6 मार्च रखी है. इस तारीख को उन्होंने CBP के रिफंड प्लान पर अपडेट मांगे हैं. उन्होंने अपने ऑर्डर में कहा कि चीफ जज ने संकेत दिया है कि वह (ईटन) ही एकमात्र जज हैं जो टैरिफ रिफंड से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे.
कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने कोर्ट में फाइल किए गए जवाब में बताया कि टैरिफ का आकलन किए बिना एंट्री कॉस्ट को फाइनल करने का काम असंभव सा है. इसके लिए 7 करोड़ से ज्यादा एंट्री का मैन्युअल रिव्यू करने की जरूरत पड़ सकती है. एजेंसी ने अपनी फाइलिंग में आगे बताया कि उसे रिफंड देने के विकल्पों पर विचार करने के लिए चार महीने तक का समय चाहिए.
किंग एंड स्पैल्डिंग के पार्टनर और पूर्व सीनियर कॉमर्स ऑफिसर रयान माजरेस ने कोर्ट के ऑर्डर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“इस ऑर्डर की भाषा से यह साफ होता है कि इंपोर्टर्स को रिफंड पाने का पूरा अधिकार है. उन्होंने आगे बताया कि सरकार इस ऑर्डर के स्केल को चुनौती दे सकती है या कस्टम्स के लिए इस काम को अंजाम देने के लिए और समय मांग सकती है.”
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार ने अवैध करार दिए गए टैरिफ से 130 बिलियन डॉलर (11.7 लाख करोड़ रुपये) जुटाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड जारी करने को लेकर कोई गाइडलाइन्स नहीं दिए थे, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई थी.
अब रिचर्ड ईटन का यह ऑर्डर एटमस फिल्ट्रेशन द्वारा दायर किए गए एक केस की सुनवाई के दौरान आया है. एटमस का यह केस टैरिफ रिफंड के लिए दायर किए गए 2 हजार केसों में से एक है. ईटन ने कहा,
“हम हर मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते. हम एक ऐसा तरीका निकालना चाहते हैं जिससे इंपोर्टर्स को रिफंड वापस मिल सके.”
3 लाख से ज्यादा इंपोर्टर्स ने टैरिफ पेमेंट किया है. इनमें से अधिकतर छोटे-मोटे बिजनेस से जुड़े हैं. उनको उम्मीद है कि अमेरिकी कस्टम्स से जुड़े अधिकारी एक आसान और कम लागत वाला रिफंड सिस्टम लाएंगे. इंपोर्टर्स का मानना है कि अगर रिफंड के लिए उन्हें जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ा तो वो रिफंड वापसी की प्रक्रिया से बाहर रहना चुन सकते हैं.
हालांकि व्यापार मामलों से जुड़े वकील जॉर्ड टटल का मानना है कि CBP की ओर से रिफंड जारी करने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए.
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