मैं एक दलित जाति का मंत्री हूं. इसीलिए इस विभाग में मेरे साथ बहुत ज्यादा भेदभाव किया जा रहा है. मुझे विभाग में अभी तक कोई अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिए मेरे पत्रों का जवाब नहीं दिया जाता है. मेरे द्वारा लिखे पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. इस विभाग में नमामि गंगे योजना के अंदर भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार फैला है, जो ग्राउंड पर जाने से पता चलता है. और जब मैं कोई शिकायत किसी भी अधिकारी के विरुद्ध करता हूं तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. चाहें तो इसकी किसी एजेंसी से जांच भी कराई जा सकती है.
'मैं दलित जाति का हूं...इसलिए भेदभाव हो रहा', योगी के मंत्री ने चिट्ठी में लिखकर इस्तीफा दे दिया!
दिनेश खटीक ने कहा- मंत्री बनने के बाद अब तक काम का बंटवारा नहीं हुआ.


ये उस चिट्ठी का एक हिस्सा है जो योगी के 'मंत्री' दिनेश खटीक ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखी है. दरअसल, ये चिट्ठी नहीं इस्तीफा था. दिनेश खटीक ने इस चिट्ठी के आखिर में इस्तीफा देते हुए लिखा,
जब विभाग में दलित समाज के राज्य मंत्री का विभाग में कोई अस्तित्व नहीं है तो फिर ऐसी स्थिति में राज्य मंत्री के रूप में मेरा कार्य करना दलित समाज के लिए बेकार है. इन्हीं सब बातों से आहत होकर मैं अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं.
दिनेश खटीक, योगी सरकार में जल शक्ति विभाग में राज्यमंत्री हैं. जो फिलहाल नाराज़ बताए जा रहे हैं. खटीक के इस्तीफे की ये कॉपी वायरल हो रही है. बताया जा रहा है कि इस चिट्ठी की एक कॉपी दिनेश खटीक ने मुख्यंत्री कार्यालय और राजभवन भी भेज दी है. हालांकि यूपी सरकार की तरफ से इस्तीफे की बात का खंडन किया गया है.
दिनेश खटीक क्यों नाराज़ है, इसका जवाब उन्होंने औपचारिक तौर पर अपने इस्तीफे में लिखने की कोशिश की है. लेकिन पर्दे के पीछे की कुछ कहानियां भी छन-छन कर आ रही हैं. बताया जा रहा है कि दिनेश खटीक अपने विभाग के कुछ इंजीनियर्स का तबादला अपने मुताबिक चाहते थे. जब उन्होंने अधिकारियों से ये मांग की तो जवाब आया कि ऊपर बात कर लीजिए. एक तरफ अधिकारियों ने दो टूक जवाब दिया, दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी खटीक के मनपसंद का कोई तबादला नहीं किया.
इसके अलावा एक और बड़ी बात जो खटीक ने अपनी चिट्ठी में भी लिखी है, वो है मंत्रालय में काम का बंटवारा ना होना. सरकार बने 4 महीने हो गए हैं, लेकिन खटीक को अभी ये नहीं पता है कि उन्हें करना क्या हैं. अधिकारी उनकी बात सुनते नहीं हैं. इसके बाद खटीक ने इस्तीफा दे दिया. खबरें ऐसी भी सामने आईं कि कल, 19 जुलाई को मंत्रिमंडल की मीटिंग के बाद दिनेश खटीक घर नहीं लौटे. ये भी कहा गया कि वो सरकारी गाड़ी और सुरक्षा छोड़ कर गए हैं.
इस पूरे मामले में मीडिया ने जब दिनेश खटीक से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, 'ये कोई विषय नहीं है'.
हालांकि खबर लिखे जाने से करीब 8 घंटे पहले सीएम योगी ने एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘मंत्री अपने राज्यमंत्रियों से तालमेल रखें.’

इधर विवाद सामने आने के बाद विपक्ष ने भी निशाना साधा है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अगर मंत्री होने का सम्मान ना मिले, दलित होने का अपमान मिले तो इस्तीफा दे ही देना चाहिए.
कौन हैं दिनेश खटीक?दिनेश खटीक मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट से दूसरी बार के विधायक हैं. दलित समाज से आने वाले दिनेश ने अपना पहला चुनाव 2017 में हस्तिनापुर की विधानसभा सीट से ही लड़ा और जीते भी. दिनेश लंबे समय से संघ से जुड़े हैं. इनके पिता भी संघ में रहे. इनके भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं. दिनेश हस्तिनापुर के मवाना के रहने वाले हैं. उनका ईंट के भट्ठे का बिज़नेस है. वो फिलहाल मेरठ के गंगानगर में रहते हैं.
हस्तिनापुर को करीब से जानने वाले बताते हैं कि दिनेश का विवादों से पुराना नाता है. आजतक से जुड़े उस्मान की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले खटीक के लोगों की पुलिस की एक गाड़ी से टक्कर हो गई थी. खटीक के लोग इस मामले में पुलिस से शिकायत दर्ज कराना चाहते थे. लेकिन पुलिस FIR नहीं लिख रही थी. काफी हंगामे के बाद दिनेश खटीक खुद थाने गए. उनसे थानेदार की बहस भी हुई. खटीक डीएम के पास भी गए. अंत में पुलिस ने FIR दर्ज की. लेकिन दोनों तरफ से.
इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार आशीष मिश्रा बताते हैं कि इस विवाद के दौरान भी दिनेश खटीक ने इस्तीफे की धमकी दी. उन्होंने मेरठ में अगले दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुला ली थी. हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं.
इसके अलावा मेरठ में एक वकील ने आत्महत्या कर ली थी. इस आत्महत्या में दिनेश खटीक पर उत्पीड़न का आरोप लगा था. न्यूज़ एजेंसी PTI से जुड़े सुशील बताते हैं कि इस मामले में दिनेश के खिलाफ भी FIR हुई थी. लेकिन पुलिस कभी दिनेश के घर तक नहीं पहुंची.
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