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यूपी कांग्रेस में प्रवक्ता के पेपर से पहले अगर नेताओं ने वॉट्सऐप देखा होता तो सारे टॉप मारते

पेपर लीक होने पर कांग्रेस की बहुत मौज ली जा रही है.

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यूपी में प्रवक्ताओं का पेपर लीक होने के बाद हंगामा मचा है.
10, मॉल एवेन्यू. लखनऊ. ये पता है उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय का. 28 जून की दोपहर उतनी गर्म नहीं थी, जितना आमतौर पर यूपी की राजनीति का पारा रहता है. आसमान पर बादल छाए हुए थे. ठीक ऐसे ही बादल छाए हुए थे कार्यालय के मीडिया कक्ष में जुटे 60-70 लोगों के दिलो-दिमाग पर. उन्हें वहां एक मीटिंग के लिए बुलाया गया था. ये वो लोग थे जो या तो प्रवक्ता रहे हैं या उसकी रेस में हैं. पर किसी को भी साफतौर पर ये नहीं पता था कि इस मीटिंग में होना क्या है. बस इतनी खबर थी कि दिल्ली से कुछ बड़े प्रवक्ता/नेता आ रहे हैं. यूपी के प्रवक्ताओं का चुनाव होना है. सो उसी संबंध में कुछ होगा. उड़ती-उड़ती खबर ये भी थी कि कोई टेस्ट-वेस्ट है.
अचानक इस मीटिंग में मौजूद वेस्ट यूपी से ताल्लुक रखने वाले एक प्रवक्ता ने कहा कि तीन बड़े अखबारों के संपादकों के नाम यहां किसी को याद हैं या नहीं? एक दूसरे नेता बोले- तुम ही बता दो. जवाब आया - मेरे पास तो नाम, पता, नंबर सब है. तब बताऊंगा जब ये सवाल इस मीटिंग में पूछा जाएगा. सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम. फिर सबको बताया गया कि टेस्ट बस थोड़ी देर में है. सब लोग तैयार हो जाइये. अब मीटिंग में गहमागहमी होने लगी कि भैया हम तो इतने साल से प्रवक्ता हैं, उतने पुराने कांग्रेसी हैं. हम टेस्ट देंगे भला, पर ये साफ कर दिया गया कि बिना टेस्ट कुछ नहीं होगा. सो पेपर बंटने के साथ दूसरे नखड़े शुरू हुए. किसी के पास पेन नहीं तो किसी को पेपर देखकर प्यास लग आई. तो इस बहाने सबने बाहर निकलना शुरू किया. कोशिश यही थी कि कुछ सवालों के जवाब पूछ-पाछ लिए जाएं.
कांग्रेस कार्यालय पर 28 जून को हुआ टेस्ट.
कांग्रेस कार्यालय पर 28 जून को हुआ टेस्ट.

टेस्ट की किसी को जानकारी न होने के पीछे बताया गया कि टेस्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया. हालांकि खबर ये भी है कि टेस्ट से पहले ही ये पेपर लीक हो गया था. ज्यादातर लोगों के व्हॉट्सऐप में पहुंच भी गया था. टेस्ट के दौरान कई हरकतें भी हुईं. कोई पानी पीने के बहाने निकला तो सीधा कंप्यूटर रूम पहुंच गया. वहां सवालों के जवाब पूछने शुरू किए. लौटकर आए और चेंप दिए. बाकि बाहर निकले तो गूगल देवता तो है हीं. उसकी भी खूब मदद ली गई.
जब और लोग इस टेस्ट के लिए जुगाड़ तलाशने में लगे थे तो कमरे में बैठे एक वरिष्ठ कांग्रेसी दे सटासट-दे सटासट लिखने में लगे थे. जैसे ही उन्होंने कहा हमारा टेस्ट हो गया. उनकी ये कॉपी फिर पूरे कमरे में घूमना शुरू हुई. लोगों ने पूरा फायदा उठाया. जवाब कितने सही थे, वो तो तब ही पता चलेगा जब रिजल्ट आएगा.
टेस्ट के बाद आई इंटरव्यू की बारी तो नया बवाल
अब टेस्ट तो किसी तरह पूरा हो गया. थोड़ा बहुत नाक-मुंह सिकोड़कर नेताओं ने टेस्ट तो दे दिया. मगर जब पता चला कि उनका इंटरव्यू दिल्ली से आईं प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी और रोहन गुप्ता लेंगे तो कुछ पुराने नेताओं का और मूड खराब हो गया. उनका कहना था कि हम 10-20 साल पार्टी को दे चुके लोग अब इन चार-पांच साल पहले कांग्रेस में आए नेताओं को इंटरव्यू देंगे.
उत्तर प्रदेश का कांग्रेस मुख्यालय.
उत्तर प्रदेश का कांग्रेस मुख्यालय.

प्रवक्ताओं के लिए हुई इस परीक्षा में कांग्रेस के कई पुराने चेहरे भी शामिल थे. इनमें अमरनाथ अग्रवाल, वीरेंद्र मदान, द्विजेंद्र त्रिपाठी, हिलाल नकवी सहित कई ऐसे नाम थे जो कांग्रेस के काफी पुराने और जाने-पहचाने चेहरे हैं. वीरेंद्र मदान सरीखे लोग राजीव गांधी के साथ काम कर चुके हैं लेकिन आज मीडिया पैनलिस्ट बनने के लिए उन्हें भी लिखित परीक्षा देनी पड़ी. कोई कैमरे के सामने तो नहीं कुछ बोल रहा था. मगर वैसे सभी कहीं न कहीं नाराज थे.
क्या सवाल आए पेपर में, ये भी देख लीजिए
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प्रश्न पत्र देख पसीना छूट गया था सबके.
प्रश्न पत्र देख पसीना छूट गया था सबके.

खैर किसी तरह टेस्ट-वेस्ट निपटा. सभी 70 परीक्षार्थी पहुंचे रामअवतार की चाय की दुकान पर. रामअवतार की चाय की दुकान को वैसा ही समझिए जैसे जेएनयू में गंगा ढाबा है. सभी कांग्रेसी यहां ही सारी भड़ास निकालने, हंसी-गुल्ला करने के लिए इकट्ठा होते हैं. यहीं पर वो नेता भी पहुंचे जिन्होंने पेपर आउट करवाया था. बोले- बताओ इतनी रिस्क लेकर, बिना एसटीएफ से डरे पेपर निकलवाया. सबको वॉट्सऐप पर भिजवाया, मगर किसी ने अपना वॉट्सऐप तक नहीं देखा. सब फेल होंगे देखना. इस बात को सुनकर जब सबने देखा तो बात सही निकली. सबके वॉट्सऐप पर पेपर था. मगर सभी चूक गए. अगर पहले देख लिए होते तो पक्का सारे टॉप मारते.
क्या कहना है प्रदेश अध्यक्ष का?
प्रवक्ता बनने के लिए कांग्रेस के रिटन टेस्ट पर बवाल मचने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने सफाई दी है. बोले- इस परीक्षा में कोई नकल नहीं हुई है. राहुल गांधी नए तरीके से कांग्रेस के भीतर बदलाव ला रहे हैं और यह बदलाव की एक कोशिश है. राज बब्बर ने कहा कि किसी को फेल करने के लिए यह परीक्षा नहीं है क्योंकि इतने सीनियर लोगों को फेल करने के बारे में नहीं सोचा जा सकता. हमें नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हर रोज TV के एंकरों से रूबरू होना पड़ता है, ऐसे में पुख्ता जानकारी रखने वाले लोगों की जरूरत है. इसीलिए यह टेस्ट लिए गए.
राज बब्बर ने दी पेपर लीक होने पर सफाई.
राज बब्बर ने दी पेपर लीक होने पर सफाई.

मैंने भी कल प्रश्न पत्र देखे थे और एकबारगी तो कई ऐसे सवालों का उत्तर मैं खुद नहीं दे सकता इसलिए पास - फेल का कोई सवाल ही नहीं. एक और बात जिसको लेकर बवाल मचा था कि प्रवक्ता की उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होगी. उस पर भी राजबब्बर ने सफाई दी. बोले - हमें युवा प्रवक्ताओं की जरूरत है, लेकिन औसत उम्र का मतलब यह नहीं कि हम 40 के ऊपर के प्रवक्ता नहीं रखेंगे. प्रवक्ताओं की उम्र ज्यादा भी हो सकती है. हालांकि ये पहली बार नहीं है कि इस तरह से प्रवक्ताओं के लिए टेस्ट लिया जा रहा हो. खुद प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि इस तरह से टेस्ट हम पहले भी कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश में ले चुके हैं. अब ये यूपी में हुआ. आगे राजस्थान में यही होना है. मगर भइया ये यूपी है, यहां ये सब इतनी आसानी से कहां निपटने वाला था. इसे ऐसे समझिए कि कर्नाटक, गुजरात, एमपी में जब ये टेस्ट हुआ तो किसी को कुछ नहीं पता चला. मगर यूपी में हुआ तो ये राष्ट्रीय खबर हो गई. लीक, नकल, अकल...सब हो गया. यूपी की राजनीति इतनी आसान थोड़ी न है.


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