बात 2 मार्च की है. मेहदावल विधानसभा में बीजेपी की एक बाइक रैली निकली थी. इसमें सांसद शरद त्रिपाठी भी थे. विधायक राकेश सिंह बघेल भी थे. समर्थक दोनों के जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. और तो और दोनों एक ही बाइक पर घूम रहे थे. विधायक राकेश सारथी बने हुए थे और सांसद शरद पीछे बैठे थे. पर चार दिन बाद दोनों जूतम-पैजार कर रहे थे. यही राजनीति है. आप पीठ पीछे एक दूसरे को निपटाने की कोशिश करते हो. पर सामाजिक रूप से दोस्ती दिखाते हो. खुद सांसद शरद त्रिपाठी ने अपने पेज पर ये फोटो शेयर की थीं. देख लीजिए -
और इस पूरे मसले में उत्पात की जड़ था वो पत्थर. वो पत्थर भी मिल गया है. जिसमें नाम न होने से सांसद शरद त्रिपाठी मुंह फुलाए घूम रहे थे. देखिए -

इसी सड़क के पत्थर पर मचा था बवाल.
पत्थर पर साफ-साफ बड़ा-बड़ा लिखा है विधायक राकेश सिंह बघेल का नाम. बस सांसद जी को इसी से आपत्ति थी. विधायक का तर्क था कि मेरी निधि से बनी है तो मेरा नाम होगा. केंद्र के प्रॉजेक्ट में सांसद का नाम होता है. राज्य में मेरा. आगे जो हुआ वो आप जानते ही हैं.
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