The Lallantop

UP में जिंदा आदमी को मृत बता रोक दी पेंशन, कागज लिए भटकता रहा बुजुर्ग फिर...

बुजुर्ग खुद को जीवित साबित करने के लिए चक्कर काटते रहे. दरअसल 65 साल के चंद्रपाल UP के सौराई बुजुर्ग गांव से ताल्लुक रखने वाले हैं. यहां से करीब 1 किलोमीटर दूर, इनकी छोटी सी पान की दुकान है.

Advertisement
post-main-image
बुजुर्ग छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं. (Image: AajTak)

कोई डॉक्टर नब्ज पकड़कर बता सकता है कि शख्स का दिल धड़क रहा है या नहीं. कई बार ये बताने के लिए, नब्ज पकड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ती. देखकर ही आप बता सकते हैं कि सामने वाले की सांसें चल रही हैं. लेकिन सरकारी कागज ये सब नहीं मानते. पूरा का पूरा इंसान खड़ा हो, मजाल कोई अधिकारी मान ले आप जिंदा हैं. जब तक कागज पर न लिखा हो. ऐसा ही कुछ मामला उत्तर प्रदेश के कौशांबी से सामने आया है. जहां 65 साल के जीवित बुजुर्ग को मृत बताकर, उनकी पेंशन रोके जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं (UP alive man declared dead on papers).

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इंडिया टुडे से जुड़े अखिलेश कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्ग खुद को जीवित साबित करने के लिए चक्कर काटते रहे. दरअसल 65 साल के चंद्रपाल सिराथू तहसील के सौराई बुजुर्ग गांव से ताल्लुक रखने वाले हैं. यहां से करीब 1 किलोमीटर दूर, इनकी छोटी सी पान की दुकान है. इन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिला करती थी. जिसके पैसों से ये अपना खर्च चलाया करते थे. 

आरोप हैं कि ग्राम विकास अधिकारी विकास शर्मा ने एक रोज बुजुर्ग को कागजों पर मृत दिखा दिया. उनकी पेंशन रोक दी गई.

Advertisement

कई महीनों तक पेंशन न आने के बाद, बुजुर्ग संबंधित अधिकारी के पास गए. अपनी व्यथा बताई. खुद के जीवित होने के सबूत दिए… पर आरोप ये भी हैं कि ग्राम विकास अधिकारी ने बुजुर्ग को ऑफिस से भगा दिया. साथ अभद्रता करने की बात भी कही जा रही है.

साहब! मैं जिंदा हूं

इस सब के बाद उन्होंने अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई, चक्कर काटे. पर जब कहीं सुनवाई न हो पाई, तब वह जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के पास गए. अपना मामला और व्यथा बताई.

ये भी पढ़ें: Deadpool जैसी शक्तियों का मालिक है ये असली जीव  

Advertisement

जिलाधिकारी ने उनकी बात को गंभीरता से लिया, शिकायत पर जांच के आदेश दिए. ऐसा भी बताया जा रहा है. इस सब में संबंधित ग्राम विकास अधिकारी पर और भी आरोप लगाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि उसने बिना ठीक से जांच किए बुजुर्ग चंद्रपाल को मृत मान लिया. ताकि उनकी जगह पैसा लेकर किसी और को पेंशन दिलाए. 

साल में एक बार जीवित होने का प्रमाण देना पड़ता है

बताया जा रहा है कि वृद्धावस्था पेंशन लेने के लिए साल में एक बार जीवित होने का प्रमाण पत्र देना पड़ता है. फोटो खिंचवाकर और बॉयोमेट्रिक अंगूठा देकर बताना पड़ता है. अगर लाभार्थी ऐसा नहीं कर पाते, तो कर्मचारी लाभार्थी के घर जाकर सत्यापन करते हैं.

अगर शख्स जीवित न हो तो उसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाती है. ऐसे में बुजुर्ग चंद्रपाल की पेंशन किन कारणों को बताकर रोकी गई, ये सब सवाल हैं ही. जिनकी जांच के आदेश जिलाधिकारी ने दिए हैं.

वीडियो: ‘3 साल आपके संपर्क में थे’ शिवपाल की बात पर ठहाका मारकर हंसने लगे सीएम योगी

Advertisement