मल्लिकार्जुन हैदराबाद के चैतन्यपुरी में रहता था. उसकी बहन लक्ष्मी अपने पति श्रीनिवास रेड्डी और बच्चों के साथ हैदराबाद से कुछ 100 किलोमीटर दूर नालगोंडा शहर में रहती थी. लक्ष्मी की माली हालत कुछ ठीक नहीं थी. तो उसे अपने बच्चों की देखभाल करने में काफी दिक्कत आ रही थी. घरखर्च के अलावा बच्चों के इलाज में पैसे लगते थे. लेकिन वो अपने पति के साथ किसी तरह घर मैनेज कर रही थी. पुलिस को दिए अपने बयान के मुताबिक मल्लिकार्जुन पिछले काफी समय से अपनी बहन को इसी हालत में देख रहा था और वो इससे बहुत दुखी था.
लक्ष्मी के दोनों बच्चे - 12 साल के विष्णुवर्धन और श्रीजना हैदराबाद के ही एक मानसिक अस्पताल में रह रहे थे और छुट्टी में घर आए हुए थे. मल्लिकार्जुन पेरेंट्स की परमिशन लेकर बच्चों को अपने घर ले आया. दीदी-जीजाजी को कहा कि बच्चों को तैराकी सिखाएगा. मल्लिकार्जुन बच्चों का बहुत ख्याल रखता था, मां-बाप को उसपर भरोसा था, इसलिए उसके साथ जाने दिया. वो दोनों बच्चों को अपने घर ले आया और गला दबाने के बाद तकिया से मुंब दबाकर उनकी जान ले ली. मामला सामने तब आया जब रात को मल्लिकार्जुन के मकान मालिक ने उसे कार में बच्चों की लाश रखते देख लिया.

मल्लिकार्जुन ने पहले बच्चों को टॉयलेट क्लीनर पिलाकर मारने का प्लान बनाया था.
कत्ल करने के बाद मल्लिकार्जुन ने अपने दोस्त वेंकट रेड्डी को फोन कर बुलाया. वेंकट से उसने कहा कि बच्चे बीमार हैं और उन्हें हॉस्पिटल ले जाना है, इसलिए साथ में कोई गाड़ी भी ले आए. वेंकट पहुंचा एक कैब के साथ. कैब ड्राइवर विवेक, मल्लिकार्जुन और वेंकट मिलकर बच्चों को कार में रख रहे थे, तभी मकान मालिक ने उन्हें देख लिया. इसके बाद कुछ पड़ोसियों का इकट्ठा करके उन्होंने पूछताछ शुरू कर दी. इतने में ही किसी ने पुलिस को इंफॉर्म कर दिया. जिसके बाद उन तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस से पूछताछ में मल्लिकार्जुन ने कहा-
मुझसे मेरे बहन की डिप्रेशन भरी ज़िंदगी और नहीं देखी जा रही थी. वो मानसिक रुप से बीमार बच्चे खुद से अपना काम भी नहीं कर पाते थे. वो पहले से ही पैसों की दिक्कत से जूझ रहे थे, ऊपर से बच्चों के इलाज में होने वाले खर्चे ने उन्हें और तोड़ दिया. और इस सब से बच्चों को भी बहुत तकलीफ हो रही थी.

अपने मम्मी-पापा के साथ विष्णुर्धन और श्रीजना.
पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर पृथ्वीधर राव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मल्लिकार्जुन ने बच्चों के कत्ल मामले में पुलिस को कंफ्यूज़ करने का भी प्लान बनाया था. पहले वो चाहता था कि पुलिस को ऐसा लगे कि बच्चों की मौत टॉलेट क्लीनर पीकर हुई है. क्योंकि वो मानसिक रुप से बीमार थे और वो गलती से टॉयलेट क्लीनर को कोल्ड ड्रिंक समझकर पी गए. लेकिन वो वाला प्लान वर्कआउट नहीं हो पाया जिसके बाद उन्हें गला दबाकर मारना पड़ा.
लक्ष्मी और श्रीनिवास ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उन्होंने बच्चों को मल्लिकार्जुन के साथ इसलिए जाने दिया क्योंकि वो भी बच्चों का ख्याल ठीक उनकी ही तरह रखता है था. उन्होंने मल्लिकार्जुन के खिलाफ कोई पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज नहीं करवाई है. लेकिन ऐसे मामलों में पुलिस बिना किसी शिकायत भी मामला दर्ज करके जांच जारी रखती है. पुलिस का मानना है कि इस केस में मां-बाप का हाथ भी हो सकता है. इसलिए इस केस की जांच हर एंगल से की जा रही है.
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