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'CRPF जवान को मारते मुसलमान' वाले वीडियो की सच्चाई ये है!

वीडियो देखकर जान लो क्योंकि एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा.

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फोटो - thelallantop
फर्जी वायरल वीडियो का तो ऐसा है कि एक बार को वायरल फ़ीवर (TVF नहीं. वो तो अपना इलाज करवाने के लिए रिज़ाइन कर चुका है.) का इलाज संभव है लेकिन फर्जी वायरल वीडियो का नहीं. लेकिन क्या है कि इसकी रोकथाम के लिए हम कोशिश कर सकते हैं. इसी के तहत ये आर्टिकल लिखा जा रहा है. इसे समझा जाए. और समझाया जाए. क्यूंकि एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा. अब असल बात पे आते हैं. वीडियो है कश्मीर का. है नहीं लेकिन कहा जा रहा है. बताया जा रहा है कि कश्मीर में एक कॉलेज है, जिसके लड़कों ने सीआरपीएफ़ के एक जवान को पीट-पीट कर मार डाला. वीडियो असली है लेकिन उसके बारे में फैलाई जा रही जानकारी ग़लत है. आपको ये भी बताया जाएगा कि वीडियो असल में है कहां का और मामला क्या है, लेकिन पहले क्या है कि माहौल बनाया जाए. वीडियो में सड़क पर बीचो-बीच एक आदमी पड़ा हुआ दिख रहा है जिस पर चार-छह ऐंटी नैशनल (फैलाए जा रहे भ्रमानुसार) तत्व पिले पड़े हैं. अब ध्यान से देखा जाए तो मालूम चलेगा कि एक लाल कपड़े पहने मनुज और एक सफ़ेद कपड़ा पहने मानुष ने सर पर टोपी लगाई हुई है. ये टोपी एक ख़ास सेक्शन के लिए ख़ास महत्व रखती है. ख़ास तबका है मुसलमान. अब यहां ये सेट हो गया कि कुछ मुसलमान एक आदमी को पीट रहे हैं. इंडिया में मुसलमान कहां रहते हैं? सब जगह. लेकिन इस वक़्त कहां के मुसलामानों को निशाने पे लिया जा सकता है? कश्मीर और बंगाल. बंगाल वाला मामला पहले हो चुका है. इस वीडियो को ये कहकर पहले वायरल किया जा चुका है कि वेस्ट बंगाल में एक हिन्दू को मुस्लिम मार रहे हैं. तो बस, बंगाल वालों को इस बार बख्शा और कश्मीर वालों को पकड़ लिया. बता दिया कि कश्मीर कॉलेज के लड़कों ने सीआरपीएफ़ के एक जवान को पकड़ कर पीटा और मार दिया. बीच में पड़े आदमी को सीआरपीएफ़ जवान बताने से होता क्या है कि वीडियो चल पड़ता है. क्यूंकि आपकी भावनाओं के साथ बढ़िया सेना वाला फ़्लेवर जुड़ जाता है. और सेना का नाम आते ही मामला सेंसिटिव हो जाता है. आप तुरंत इंसान से देशभक्त इंसान में तब्दील हो जाते हैं और नसों में तीन रंगों का खून दौड़ने लगता है. वीडियो ये रहा:     असल में वीडियो कहां का है ये वीडियो असल में कश्मीर छोड़िए, इंडिया तक का नहीं है. वीडियो आया है छोटे पाकिस्तान यानी बांग्लादेश से. आवामी लीग के एक लीडर होते थे मोनिर हुसैन सरकार. उनका मर्डर हो गया था. उन्हें मरवाने का इलज़ाम खुद आवामी लीग के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी सोहेल सिकदर पर आया था. मोनिर और सोहेल के बीच पार्टी में वर्चस्व को लेकर लड़ाई चल रही थी. और साथ ही एक ऑटो स्टैंड से आने वाले टोल की रकम को लेकर भी झगड़ा था. 8 नवंबर, 2016 की सुबह मोनिर हुसैन 3 लोगों के साथ बांग्लादेश में कोमिला नाम की जगह एक कोर्ट की पेशी में जा रहे थे. रास्ते में एक ट्रैफिक सिग्नल पर रुकते ही उनकी गाड़ी पर हमला हुआ. मोनिर को गाड़ी से बाहर निकाला गया, उनके शरीर में गोलियां दाग दी गईं. बाकी लोगों को गोली मारी गई और धारदार हथियार से उन्हें काटा गया. इसके बाद सभी हमला करने वाले फ़रार हो गए. 1 अप्रैल 2017 को मोहम्मद अली और अबू सईद को कुछ लोगों ने पकड़ लिया. ये दोनों मोनिर हुसैन के मर्डर में शामिल थे. उन्हें मारने आई भीड़ ने उन दोनों को पीटना शुरू कर दिया. ये वीडियो असल में इन्हीं दोनों की पिटाई का है. इस हमले में अबू सईद मर गया और मोहम्मद अली बच निकला.

मुद्दे की जो बात है वो बड़ी मज़ेदार है. एक ही वीडियो बार-बार बदले सन्दर्भ के साथ बांटा जा रहा है. उसका मकसद है एक हिन्दू के मन में ये बीज बो देना कि वो कभी भी, कहीं भी किसी मुसलमान के हत्थे चढ़ कर मारा जा सकता है. उसको ये सिखाया जा रहा है कि कश्मीर में मौजूद सीआरपीएफ़ जवानों को वहां के मुसलमान मार रहे हैं. जो हालिया हालात हैं, उन्हें और भी बदतर तरीके से पेश करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है. इस वीडियो को एक प्रोपोगेन्डाधारी ने चलाया और उसके चेलों ने भेड़चाल का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए उसे फैलाना शुरू कर दिया. नमूने इधर पाइए:   Fullscreen capture 24-07-2017 182545.bmp   Fullscreen capture 24-07-2017 182906.bmp Fullscreen capture 24-07-2017 183021.bmp   फर्जी वायरल वीडियो से बच के रहिये. वीडियो आये तो जांचिये. तुरंत नथुने मत फड़काने लगिए. आर्मी, देश, तिरंगा वगैरह कीवर्ड्स हैं. उसी के दम पर उन वीडियो को आपके अन्दर ट्रेंड करवाया जाता है. अगले का प्रोपोगंडा चल पड़ता है. आप वही बन जाते हैं, जो नहीं बनना चाहते. इस वीडियो की सच्चाई सामने लाने के लिए altnews का आभार.

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