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क्या सोनिया गांधी के इस खास जज ने दीवाली पर बैन किए हैं पटाखे?

सोनिया गांधी और इस 'जज' की फोटो की सच्चाई क्या है?

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सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाह

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पड़ाका बैन किया है. पड़ाका वही है, जिसे आप पटाखा कहिते हैं, लेकिन हमारे कानपुर में इसे पड़ाका कहा जाता है, इसलिए हम पड़ाका कहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के मद्देनज़र दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी. मजे की बात देखो कि खाली बिक्री पर बैन लगाया, दगाने पर नहीं. बाकी आप समझदार हैं.

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तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशभर में क्रांति मची है. सब शहीद होने को तैयार हैं. कुछ सुप्रीम कोर्ट को कोस रहे हैं, कुछ सोशल मीडिया पर बम फोड़ रहे हैं. कुच्छौ शेयर कर रहे हैं. कह रहे हैं कि NCR में पटाखे बैन करने वाला जज हिंदू-विरोधी है, देशद्रोही है, गद्दार है.

ये लोग जाने कहां से एक पुरानी फोटो खोज लाए हैं. इसमें एक शख्स कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चेहरे पर रंग लगा रहा है. लग रहा है कि होली की तस्वीर है. साथ में जो बताया जा रहा है, वो और झिलाऊ है. बताया जा रहा है कि ये आदमी जस्टिस एके सीकरी हैं, जिन्होंने दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया है. देखिए क्या-क्या शेयर कर रहे हैं लोग:

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मने लोगों की बौखलाहट सुप्रीम कोर्ट जस्टिस एके सीकरी से सीधे सोनिया गांधी तक पहुंच गई. फोटो का मेसेज साफ है कि जज साहब सोनिया गांधी के साथ खड़े हैं, तो वो तो दिवाली के विरोधी होंगे ही. सोनिया गांधी के इशारे पर ही जज साहब ने पड़ाकों पर बैन लगा दिया होगा. मतलब हद है. ठीक है आपको फैसला रास नहीं आया, लेकिन विरोध की भी एक सीमा होती है न. या भावनाओं में बहकर गदहापना करने लगेंगे. ऐसे लोगों को एक ही बात कहने का मन करता है- टोपा हो का बे. आज सुबह ही एक वीडियो में सुना तो याद आ गया, कहते तो कई साल से आए हैं.

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अच्छा कुछ ने तो इससे भी ज्यादा हद कर दी. देखिए, पहले नमूना देखिए.


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विनोद दुआ को भी ट्रोल किया जा चुका है इस फोटो के लिए.

मतलब न तो इन्हें ये पता है कि ये फोटो किसकी है, न ये पता है कि फैसला देने वाले जज का नाम क्या है, न ये पता है कि विनोद दुआ कौन हैं. लेकिन बोलै से मतलब था, तो मुंह खोले और भक्क से मार दिए. और ये फोटो अभी नहीं, पहले भी अफवाह के साथ शेयर की जा चुकी है. तब भी इसे विनोद दुआ की फोटो बताया गया था. विनोद दुआ वरिष्ठ पत्रकार हैं. इनका शो आपको याद होगा, 'ज़ायका इंडिया का'. NDTV पर आता था.


अब मुलाकात तो बीजेपी के नेता भी सोनिया गांधी से करते हैं तो इसके मतलब क्या निकालेंगे आप.
अब मुलाकात तो बीजेपी नेता भी सोनिया गांधी से करते हैं तो इसके क्या मतलब निकालेंगे आप.

यार ये कितनी नीचता की बात है कि जिस जज ने फैसला सुनाया, उसका नाम विनोद दुआ नहीं है. जो विनोद दुआ है, वो इस फोटो में नहीं है. जो इस फोटो में है, उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है. लेकिन एक फोटो आई और सारे लोग दल्ले घोषित हो गए. विनोद दुआ तो पहले भी इस फोटो के शिकार हो चुके हैं.

फोटो की सच्चाई ये है

हकीकत में ये फोटो 2008 की है. तस्वीर जो होली की लग रही है, असल में होली की ही है. मगर जो शख्स सोनिया गांधी को रंग लगा रहे हैं, वो पत्रकार विनोद दुआ, जज विनोद दुआ या जज एके सीकरी नहीं हैं. ये कांग्रेसी नेता केपी सिंह देव हैं, जो ओडिशा से आते हैं. कई बार लोकसभा सांसद और ओडिसा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं.


ओड़िसा कांग्रेस के नेता केपी सिंह देव.
ओडिसा कांग्रेस के नेता केपी सिंह देव.

अब उन जज साहब के बारे में भी जान लो, जिन्होंने फैसला सुनाया है

इनका पूरा नाम अर्जन कुमार सीकरी. ये अप्रैल 2013 से सुप्रीम कोर्ट के जज हैं. उससे पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. 1977 में दिल्ली से वकालत शुरू की थी. पहली बार जज की पदवी 1999 में दिल्ली हाईकोर्ट में मिली थी. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने महिलाओं, बुजुर्गों, ट्रांसजेंडर्स के केसों में तेजी से सुनवाई के आदेश दिए थे. 2013 में पाकिस्तान की जेल में सजा काट लेने के बाद भी बंद दो भारतीयों के मामले में सीकरी ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. फिलहाल आधार अनिवार्य हो या नहीं, मामले की सुनवाई भी जस्टिस सीकरी और अशोक भूषण की बेंच कर रही है.


जस्टिस सीकरी पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं.
जस्टिस सीकरी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं.

विनोद दुआ के नाम से ये फोटो पहले भी शेयर हो चुका है

2014 में भी एक बार ये फोटो वायरल हुई थी, जब विनोद दुआ को खूब ट्रोल किया गया था. इसके बाद खुद विनोद दुआ ने अपने एक न्यूज़ वीडियो में बताया था कि फोटो में वो नहीं, बल्कि केपी सिंह देव हैं. दुआ ने बताया कि वो सोनिया गांधी से सिर्फ एक बार मिले हैं. वो भी एक डेलिगेशन में. पॉपुलेशन काउंसिल का डेलिगेशन. तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे. विनोद दुआ ने इस पर फोटो अपलोड करने वाले को केस करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद उसने माफी मांगते हुए फोटो हटा ली थी.


पत्रकार विनोद दुआ को भी इस फोटो का इस्तेमाल कर ट्रोल किया जा चुका है.
पत्रकार विनोद दुआ को भी इस फोटो का इस्तेमाल कर ट्रोल किया जा चुका है.

ये तो कहो अपने यहां लोग साइबर क्राइम को इतना सीरियसली लेते नहीं हैं, वरना सोचो अगर यही फोटो फैसला सुनाने वाले जज तक पहुंच जाए, तो फोटो शेयर करने वालों को कितनी बड़ी लकड़ी मिलेगी. तो भइया लोगों, देशभक्त बनो, त्योहार मनाओ, सब कुछ करो. बस ऐसे सूतियापे न करो.



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