UAPA यानी अनलॉ फुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट. ये कानून आतंकी गतिविधियों के मामले में लगाया जाता है. हाल ही में त्रिपुरा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के 4 वकीलों पर UAPA लगाया था. इसके तीन दिन बाद त्रिपुरा पुलिस ने 102 सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ UAPA लगाया है. अगरतला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने इन 102 ट्विटर हैंडल को ब्लॉक करने के लिए ट्विटर को नोटिस भी भेजा है. पुलिस का कहना है कि ये ट्विटर हैंडल्स राज्य में हाल ही में मस्जिद पर हुए हमले और झड़प को लेकर गलत न्यूज़ और गलत सूचना फैला रहे थे.
त्रिपुरा हिंसा: 102 सोशल मीडिया यूजर्स पर UAPA के तहत केस दर्ज
गलत न्यूज़ और गलत सूचना शेयर करने का आरोप.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने ट्विटर से इन अकाउंट यूजर्स या एडमिनिस्ट्रेटर्स की जानकारी मांगी है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि इन्होंने फेक या मनगढ़ंत तस्वीरें और बयान ऑनलाइन पोस्ट किए थे, जिनमें सांप्रदायिक तनाव भड़काने की क्षमता थी. त्रिपुरा पुलिस की ओर से इसी तरह का नोटिस फेसबुक और यू ट्यूब को भी भेजा गया है.
क्या है नोटिस में?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नोटिस में लिखा है
“… कुछ व्यक्ति/संगठन राज्य में मुस्लिम समुदायों की मस्जिदों पर हालिया झड़प और कथित हमले के संबंध में ट्विटर पर विकृत और आपत्तिजनक समाचार/बयान प्रकाशित/ पोस्ट कर रहे हैं. इन समाचारों / पोस्टों को प्रकाशित करने में, व्यक्तियों / संगठनों को कुछ अन्य घटनाओं की तस्वीरों / वीडियो, मनगढ़ंत बयानों / टिप्पणियों का उपयोग धार्मिक समूहों / समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए करते पाया गया है.
नोटिस में कहा गया है,
इन पोस्ट में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोगों के बीच सांप्रदायिक तनाव भड़काने की क्षमता है. इससे सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं.
किन मामलों में केस दर्ज हुआ है?
पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन में इन सोशल मीडिया हैंडल यूजर्स के खिलाफ IPC की धारा 153A (शत्रुता को बढ़ावा देना), 153B (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, कथन), 469 और 471 (जालसाजी) 503 (आपराधिक धमकी), 504 (शांति भंग करने के लिए अपमान), और 120 बी (आपराधिक साजिश), और UAPAकी धारा 13 के तहत केस दर्ज किया गया है.
क्या जानकारी मांगी गई है?
सोशल मीडिया कंपिनियों से इन हैंडल्स के बारे में जो जानकारी मांगी गई है उसमें यूजर रजिस्ट्रेशन डिटेल, रजिस्ट्रेशन डेट से लेकर उस दिन तक (केस दर्ज होने तक) ब्राउजिंग लॉग डिटेल, IP एड्रेस की जानकारी जिनसे इन हैंडल्स ने लॉगइन किया था. इन अकाउंट्स से अटैच मोबाइल नंबर्स, जिन्हें सिक्युरिटी के लिए वेरिफाइ किया गया था, जैसी जानकारी मांगी गई है.
पुलिस का कहना है कि शुरुआत में 150 सोशल मीडिया अकाउंट्स को जांच के लिए लिस्टेड किया गया था. इन खातों की सावधानी पूर्वक जांच के बाद 101 अकाउंट्स को शॉर्ट लिस्ट किया गया. जिनमें कथित तौर पर "दुर्भावनापूर्ण प्रचार" और "घृणा पैदा करने की क्षमता" थी.
पुलिस का क्या कहना है?
त्रिपुरा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पुलिस के मुताबिक मंगलवार को वकीलों की ब्रीफिंग का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने के लिए किया गया. पुलिस ने कहा है कि इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था, कुछ उपयोगकर्ताओं ने दावा किया था कि रेप किया गया था, और कुछ ने अधिक भड़काऊ बयान दिए थे. पुलिस अधिकारी के अनुसार, अन्य जगहों की तस्वीरें सांप्रदायिक घृणा पैदा करने के इरादे से त्रिपुरा की बता कर शेयर की गईं.
सबसे पहले वकीलों पर लगा UAPA
पश्चिम त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक माणिक दास ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का एक समूह पिछले मंगलवार को त्रिपुरा आया था उनके दौरे के बाद हमने देखा कि सोशल मीडिया में कई पोस्ट में हाल की साम्प्रदायिक घटनाओं के संबंध में असंतोष जताया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वह जानना चाहती है कि क्या उन्होंने ये पोस्ट किए या ये फर्जी पोस्ट थे. अगर वे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं उनमें वकील एहतेशाम हाश्मी, लॉयर्स फॉर डेमोक्रेसी के संयोजक वकील अमित श्रीवास्तव, एनसीएचआरओ के राष्ट्रीय सचिव अंसार इंदौरी और पीयूसीएल सदस्य मुकेश कुमार शामिल हैं.
गौरतलब है कि पड़ोसी बांग्लादेश में साम्प्रदायिक हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद द्वारा निकाली गयी रैली के दौरान 26 अक्टूबर और उसके बाद हिंसा की खबरें आई थीं. हालांकि पुलिस ने इस बात से इंकार किया था कि त्रिपुरा में किसी भी मस्जिद में आग लगाने की कोई घटना हुई थी.









