खैर, नीला रंग छोड़ने और हॉलीवुड सुपरहीरो थीम का सही भारतीय रूपांतरण न कर पाने का नतीजा ये हुआ कि 2013 में रिलीज हुई सीरीज की पिछली फिल्म कृष-3 असहनीय थी. हो सकता है बच्चों को बहुत पसंद आई हो लेकिन लेखक को नहीं. एक्स-मैन फिल्मों से ही ज्यादातर पात्रों और टोटकों को लिया गया था.
अब बॉलीवुड में अगला सुपरहीरो आ रहा है. ये भी नीली पोशाक वाला है. कोई मिल गया है में एक ताज़गी थी, इस फिल्म में भी कुछ-कुछ वैसा ही लगता है. ये है टाइगर श्रॉफ स्टारर अ फ्लाइंग जट्ट यानी उड़ने वाला एक जट्ट. पंजाब में स्थित इस कहानी का निर्देशन किया है रेमो डिसूजा ने.

सुपरपावर्स का इस्तेमाल करते हुए घर के जाले साफ करता फ्लाइंग जट्ट.
रेमो ने भी करियर की शुरुआत प्रेरणा से ही की है. पहले फालतू बनाई. वो हॉलीवुड से प्रेरित थी. फिर एनीबडी कैन डांस बनाई. वो भी. फिर एबीसीडी-2. वो भी. लेकिन इस आखिरी फिल्म तक आते-आते उन्होंने भारतीय मूल्यों, इमोशंस, झंडा, मां, भगवान, गौरव, अस्मिता, अंडरडॉग, प्रायश्चित, अच्छा, बुरा की थीम को बहुत भर-भर के भुनाया. पैसे कमाने में यही उनकी ताकत बन गई. तो अब इस ताकत का इस्तेमाल आगे की फिल्मों में वे खूब करने वाले हैं. जैसे अ फ्लाइंग जट्ट में.
खैर, ये फिल्म शुरू होती है पंजाब में रहने वाले एक लड़के से. वो कटसर्ड है. सिखी के मुताबिक केश नहीं रखे हुए. पता नहीं कहां से उसे सुपरपावर्स मिली हुई हैं. शुरू में उसे इनका इस्तेमाल सीखने में समय लग रहा है. वो बार-बार एक्सीडेंट कर दे रहा है, ठीक वैसे ही जैसे स्पाइडर-मैन (2002) में टॉबी मैग्वायर करता है. हालांकि यहां पंजाब के संदर्भ में ये पल ही सबसे ज्यादा मजेदार पल लगते हैं. फिल्म में अगर सच्ची रंगत होगी तो इसी कारण से. जैसे पंजाब पुलिस वाले रात में एक हादसे की जगह सड़क किनारे उससे पूछते हैं, ये क्या पहण के रक्खा है तूने, कौण ए तू? ओय रुक ओ.. और इतने में टाइगर भाग जाता है.

टाइगर
कहानी में एक मां भी है जो रेमो की कहानियों में मस्ट होती है. यहां पर टाइगर का पात्र एक बार लगभग मर ही जाता है तो उसे उसकी मां धर्म के सहारे जिंदा करती है. अब ट्रेलर से तो यही मैसेज मिलता है. बाकी देखेंगे. तो वे दोहा बोलती हैं, चिड़िया से मैं बाज़ लड़ावां. इस पंक्ति का इस्तेमाल हमारी फिल्मों ने दर्शकों को जोश में लाने के लिए बहुत किया है. इस फिल्म में इसके शब्द इधर उधर कर दिए गए हैं. तो मां का रोल अमृता सिंह ने किया है. और वे इस रोल में ठीक लग रही हैं.

फिर फिल्म में जैकलीन फर्नांडिस हैं. वे फिल्म में सिर्फ हीरो के सौंदर्य रस पान को पूरा करने के लिए है. कि रात को पूरे चांद के नीचे वो उस पर फूल बरसा सके. तो वह सजावट की वस्तु मात्र है.


विलेन का रोल केके मेनन ने किया है. वही, जो गुलाल फिल्म में डुकी बना बने थे. वही जो शौर्य में ब्रिगेडियर रुद्र प्रताप सिंह बने थे. विलेन का interpretation यहां रेमो ने भी वैसा ही किया है जैसा कृष-3 में विवेक ओबेरॉय का किया गया था. उनके फ्रेम, ईमारतें सब स्लेटी, स्याह हैं. पर यहां राहत यह है कि यहां केके हैं. उनके होने से ही ऐसे बेजान लिखे पात्रों में भी जान आ जाती है.

केके मेनन.
अब इस विलेन के पास एक खौफनाक दरिंदा है जो देश में तबाही मचाने आया है कि लेकिन रास्ते में एक ही रोड़ा है. आपने सही अनुमान लगाया. द फ्लाइंग जट्ट. वो दरिंदा अपने सुपरहीरो को मारता है. एक बार शायद मार भी देता है. फिर नीली पोशाकधारी लौटता है तो सिर पर पग्ग बांधकर, हल्की सी शेव बढ़ाकर.
विलेन का रोल यहां नामी ऑस्ट्रेलियाई रेस्लर नेथन जोन्स ने किया है. जो 7 फुट के हैं.

नेथन.
बालाजी मोशन पिक्चर्स की ये फिल्म 25 अगस्त को रिलीज होनी है. कहीं कहीं ये फिल्म ताज़ा है और क्लाइमैक्स की ओर जाते हुए बासी लग रही है. कुछ संवाद अच्छे हैं जैसे अमृता का पात्र कहता है सुपरहीरो तो बन गया लेकिन ऊंचाई का डर नहीं गया इसका. इसी तरह से राज करेगा खालसा जैसे बोल भी गीत में हैं जिनका क्या अर्थ लगाएं और क्या संदर्भ ढूंढ़ें समझ नहीं आता.
























