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अब ये नेता बनेगा तेलंगाना का अगला CM? KCR का चुनाव तक बिगाड़ दिया!

रेवंत रेड्डी को कांग्रेस में शामिल होने के चार साल के अंदर ही प्रदेश संगठन का अध्यक्ष बनाए जाने से कुछ स्थानीय सीनियर कांग्रेस नेता नाराज हुए थे. इसके बावजूद पार्टी आलाकमान ने उन पर भरोसा जताया है.

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रेवंत रेड्डी ने कोडंगल सीट के अलावा कामारेड्डी से भी चुनाव लड़ा है, जहां से सीएम KCR भी उम्मीदवार हैं. (फोटो:X/@revanth_anumula)

तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजों (Telangana Assembly Election result 2023) के बाद केसीआर की पार्टी BRS (भारत राष्ट्र समिति) सूबे में अपनी जमीन खो चुकी है. तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 64 सीटें जीती हैं. वहीं BRS को 39 सीटों पर जीत मिली. BJP ने यहां 8 सीटों पर जीत दर्ज की है. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को यहां 7 सीटों पर जीत मिली. वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 1 सीट मिली है.

इस चुनाव में सत्ताधारी BRS को कड़ी चुनौती देने वाली कांग्रेस की कमान रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने संभाली. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर रेवंत रेड्डी ने आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार किया. हम यहां आपको बताएंगे इन्हीं रेवंत रेड्डी की कहानी. वो रेवंत रेड्डी, जो 30 नवंबर को जब अपना वोट डालने गए, तो गोपूजा करके गए. और तस्वीर वायरल हो गई.

वोट करने जाने से पहले रेवंत रेड्डी ने गो पूजा की (फोटो: X)
कौन हैं रेवंत रेड्डी?

वो मल्काजगिरि से सांसद हैं. और आते हैं 20 साल के राजनीतिक अनुभव के साथ. उम्र 54 बरस. केसीआर से बहुत छोटे हैं. लेकिन हैं फेमस.  रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की उस्मानिया यूनिवर्सिटी के एवी कॉलेज से स्नातक किया है. कांग्रेस से पहले TDP (तेलुगु देशम पार्टी) में थे, उससे पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS, जो अब भारत राष्ट्र समिति यानी BRS है) के साथ थे, और उसके भी पहले थे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ABVP में. जब TRS में थे, तो चुनाव लड़ने का मन बनाया. मौका नहीं दिया गया तो पार्टी छोड़ दी. फिर 2006 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जिला परिषद का चुनाव लड़ा और जीत गए. साल 2008 में रेवंत रेड्डी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ही विधान परिषद के सदस्य चुने गए.

इसके बाद रेवंत रेड्डी ने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ज्वॉइन कर ली. 2009 में कोडंगल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा. तब उन्होंने 5 बार के कांग्रेस विधायक गुरुनाथ रेड्डी को हरा दिया था. 2014 में भी रेवंत रेड्डी ने कोडंगल से विधानसभा चुनाव लड़ा और गुरुनाथ रेड्डी को फिर से हराया. इसके बाद उन्हें तेलंगाना विधानसभा में TDP के फ्लोर लीडर के तौर पर भी चुना गया. 2014 से 2017 तक रेवंत रेड्डी तेलंगाना TDP के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ रेवंत रेड्डी (फोटो: X/@revanth_anumula)
जब कैश फॉर वोट केस में जेल गए

31 मई, 2015 को, तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने रेवंत रेड्डी को गिरफ्तार किया था. उन पर एक नॉमिनेटेड विधायक एल्विस स्टीफेंसन को रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप लगा था. ACB के अधिकारियों के मुताबिक रेड्डी ने विधान परिषद चुनाव में TDP उम्मीदवार को वोट देने के लिए एल्विस स्टीफेंसन को 5 करोड़ रुपये की पेशकश की थी.

इस केस पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेवंत रेड्डी ने कथित तौर पर एल्विस स्टीफेंसन को 50 लाख रुपये एडवांस 31 मई 2015 को देने का वादा किया था. स्टीफेंसन ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी. रेड्डी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए ACB ने स्टीफेंसन के एक दोस्त के घर पर स्पाई कैमरे लगा दिए थे. 31 मई को रेवंत रेड्डी अन्य दो लोगों के साथ स्टीफेंसन के दोस्त के घर पहुंचे, जहां ACB ने पहले ही कैमरा सेटअप कर रखा था. बताया गया कि जब रेड्डी के साथ आए एक सहयोगी कैश सौंप रहे थे, तभी अधिकारी आ गए.

ACB की ओर से जो वीडियो और ऑडियो जारी किया गया उसमें कथित तौर पर रेवंत रेड्डी कुछ अन्य विधायकों के संपर्क में होने का दावा कर रहे थे. इस दौरान बार-बार 'बिग बॉस' का जिक्र किया गया था. यहां 'बिग बॉस' आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को माना जा रहा था. वहीं TDP ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया था. इस मामले में रेवंत रेड्डी कुछ दिन जेल में रहे थे. इसके बाद तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी थी.

कांग्रेस में 4 साल के अंदर मिली बड़ी जिम्मेदारी

अक्टूबर, 2017 में रेवंत रेड्डी TDP छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. 2018 में उन्हें तेलंगाना कांग्रेस के तीन कार्यकारी अध्यक्षों में से एक नियुक्त किया गया. हालांकि, उस साल हुए विधानसभा चुनाव में रेवंत रेड्डी कोडंगल सीट हार गए, जहां से वो पिछले दो चुनावों से चुने जा रहे थे. लेकिन अगले ही साल रेड्डी ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और मल्काजगिरी सीट पर जीत हासिल की. 

2021 में, रेवंत रेड्डी को तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बना दिया गया. रेड्डी को कांग्रेस में शामिल होने के चार साल के अंदर ही प्रदेश संगठन का अध्यक्ष बनाए जाने से कुछ स्थानीय सीनियर कांग्रेस नेता नाराज भी हुए थे. इसके बारे में इंडिया टुडे के एक आर्टिकल में वरिष्ठ पत्रकार टी.एस सुधीर लिखते हैं,

"तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश कमिटी के अध्यक्ष के तौर पर रेवंत रेड्डी की नियुक्ति का कई नेताओं ने विराध किया. इस पद की चाहत रखने वाले कुछ लोगों ने रेवंत रेड्डी पर पद हासिल करने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया. लेकिन जो चीज रेवंत रेड्डी को अलग करती थी, वह थी KCR से मुकाबला करने की उनकी क्षमता और इच्छा."

ऐसा कहा जाता है कि कांग्रेस हाई कमान का भी मानना है कि रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को टक्कर दे सकते हैं. इसी के चलते रेवंत रेड्डी पर कांग्रेस आलाकमान ने भरोसा दिखाया. रेवंत रेड्डी ने भी एक जुझारू विपक्षी नेता के तौर पर लगातार अपनी छवि मजबूत की है. वो KCR के खिलाफ साल 2014 से ही आक्रामक रहे हैं. 

(फोटो: रेवंत रेड्डी: इंस्टाग्राम)
कांग्रेस का CM चेहरा?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री KCR और उनके बेेटे केटी रामाराव भी रेवंत रेड्डी पर हमलावर रहे हैं. रामाराव ने कोडंगल में चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से यह तय करने के लिए कहा था कि क्या वे ऐसा विधायक चाहते हैं जो जेल जा सकता है. BRS रेवंत रेड्डी पर चुनाव के समय टिकट बेचने का भी आरोप लगाती रही है. वहीं रेवंत रेड्डी भी चुनाव प्रचार में कहते रहे हैं कि KCR 3 दिसंबर को रिटायर हो जाएंगे. KCR पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए रेवंत रेड्डी ने उन्हें जेल भेजने की बात कही है. 

अगर कांग्रेस ये चुनाव जीतती है, तो रेवंत रेड्डी CM पद के बड़े दावेदार बन सकते हैं. हालांकि, तेलंगाना कांग्रेस के दूसरे नेताओं का भी ऐसा ही मानना है या नहीं, ये कहना मुश्किल है. हालांकि रेड्डी अब तक कहते रहे हैं कि वो राज्य में पार्टी के कैप्टन हैं.

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वीडियो: तारीख: तेलंगाना अलग राज्य कैसे बना?