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संडास में बैठकर सफर करने वालों को रेलवे का तोहफा

नो इंग्लिश सीट. नो देसी सीट. रेलवे के संडास में लगेगी अब स्पेशल सीट.

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फोटो - thelallantop
भौत बडिया खबर आली भाई. भारतीय रेल का नाम सुनते ही दिमाग में कई चीजें आती हैं. इनमें से एक है, बदबूदार टॉयलेट. जिसके बगल में खड़े होकर कुल्ला करना भी भारी हो जाता है. लेकिन फिर भी जनता वहां गमछा बिछाकर पड़ी रहती है. पर अब भैया टॉयलेट के अंदर एक सीट होगी. अरे मल्लब यात्रा करने के लिए नहीं होगी. नित्यकर्म के लिए होगी. लेकिन भारतीय तो वही करेंगे जो करना चाहेंगे. बता रहे हैं कि बदबू वाली प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए ये नया इंतजाम किया जा रहा है. ये गुड न्यूज मिल रही है तमिलनाडु के एक इंजीनियर ग्रुप की वजह से.

इधर आओ तो शुरू से समझाएं

हुआ ये कि लोग ट्रेन में गंदे और बदबूदार टॉयलेट की शिकायत कर रहे थे बहुत ज्यादा. प्रधानमंत्री ने इससे निपटने के लिए एक चैलेंज रखा.  इसके बाद mygov.in ऑनलाइन पोर्टल और RDSO वेबसाइट के जरिये लोगों से सलाह मांगी गई. RSDO है रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन. लखनऊ में है. यही डिजाइन बनाता है ट्रेन का. सजेशन मांगा गया तो देश भर से इंजीनियर, स्टूडेंट्स, आर्किटेक्ट और बहुत सारे लोगों ने सजेशन भेजे. 6 महीने में कुल 677 एंट्री आईं. बहुत सारे आइडिया मजेदार थे पर अप्लाई करने में बहुत टफ भी थे. पर 24 साल के सूर्यनारायण के ग्रुप का आइडिया अप्लाई करने में थोड़ा आसान था. सरकार को पसंद आ गया. तमिलनाडु का ये इंजीनियरिंग ग्रुप जीत गया. नारायण और उनका बैचमेट हिंदुस्तान कॉलेज कोयम्बटूर से हैं. उनकी टीम में उसका एक बैचमेट और दो जूनियर हैं.  उनके दोनों साथी राहुल गर्ग और सौरभ हंस हैं, जो IIT हैदराबाद में सिविल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट है. रेलवे इनको 3 लाख रुपये का इनाम देगा. इन सबकी उम्र 20-25 के बीच है. अब रेलवे, नारायण की टीम साथ मिल कर इस फॉर्मूले को पेटेंट कराने के लिए अप्लाई करने वाला है.

ऐसे काम करेगा ये फॉर्मूला

1. अभी वाले रेलवे टॉयलेट में ज्यादा चेंज नहीं लाना है. बस इस समय जैसे अलग-अलग इंडियन और वेस्टर्न टॉयलेट सीट होती है, उसकी जगह एक ही कॉमन टॉयलेट सीट होगी. 2. इस सीट में वैक्यूम और टेरा-प्रेटा का यूज किया जायेगा. ये टेरा-प्रेटा अमेजन बेसिन में पाई जाने वाली एक तरह की मिट्टी है. इसकी खासियत ये है कि ये बदबू फैलाने वाले पार्टिकल्स को सोख लेती है. 3. इस टॉयलेट से पानी की बर्बादी भी बचेगी. मुश्किल से 1 लीटर पानी यूज होगा और बदबू फैलाने वाले पार्टिकल्स से भी मिल जाएगी मुक्ति. पर सबसे बड़ा सवाल. हम भारतीय जो नई-नवेली मॉ़डर्न महामना एक्सप्रेस की टोंटियां चुरा ले जाते हैं, क्या इस नई टॉयलेट सीट का सही इस्तेमाल करेंगे? बुलेट ट्रेन कभी किसी युग में आई तो उसमें भी संडास के मग्गे जंजीरों से बांधने पड़ेंगे भैया.

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