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स्वयं सैनिक दल क्या है जो 50 हजार दलितों को बौद्ध बनाने जा रहा है?

आंबेडकर जयंती पर गांधीनगर में होने वाले कार्यक्रम में 1 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. SSD का दावा है कि इस कार्यक्रम में 50 हज़ार लोग धर्मांतरण करेंगे.

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स्वयं सैनिक दल की ओर से आयोजित एक शिविर (फोटो: फेसबुक/Swayam sainik dal)

देश में 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर (Bhimrao Ambedkar) की 132वीं जयंती मनाई जाएगी. Ambedkar Jayanti के इस मौके पर गुजरात का एक संगठन 50 हज़ार दलितों को बौद्ध धर्म में दीक्षा दिलवाना चाहता है. नाम है - स्वयं सैनिक दल (SSD). इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस रैली और सभा में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. अखबार ने SSD के धवल सोलंकी का ये दावा भी छापा है, कि संगठन ने अब तक लगभग 50 हजार लोगों के बारे में पुष्टि कर ली है, जो हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म अपनाना चाहते हैं. 

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रिपोर्ट के मुताबिक SSD के धवल सोलंकी ने बताया,

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"गुजरात के कोने-कोने और पूरे देश से लोग आ रहे हैं. सामूहिक धर्मांतरण के इस तरह के आयोजन अब दूसरे प्रमुख शहरों में भी आयोजित किए जाएंगे. अगली संभावित जगह दिल्ली होगी. हम बाबा साहेब की जयंती और पुण्यतिथि के साथ-साथ दलित कैलेंडर के अन्य महत्वपूर्ण दिनों पर भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखेंगे."

स्वयं सैनिक दल के बारे में

स्वयं सैनिक दल (SSD) खुद को एक गैर-राजनैतिक संगठन बताता है. कहता है कि उसके सभी सदस्य समान हैं. किसी को, कोई पद नहीं दिया गया है. सब के सब सैनिक हैं. ये संगठन गौतम बुद्ध, डॉ. आंबेडकर और दूसरे महानायकों की तार्किक और वैज्ञानिक विचारधारा पर चलता है. अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ काम करने की बात करता है. नशामुक्त समाज बनाने की बात करता है. SSD सदस्यों को किसी भी तरह का नशा करने की इजाज़त नहीं है. ध्यान दें, कि जो समता सैनिक दल डॉ आंबेडकर ने 1927 में बनाया था, वो एक अलग संगठन है और आज भी कार्यरत है. दोनों संगठनों में कुछ समानताएं ज़रूर हैं. जैसे वर्दी. SSD के सैनिक हरी वर्दी पहनते हैं. सफेद बेल्ट लगाते हैं.

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