अब 5 जजों की बेंच बताएगी, प्यार है या अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को मामला भेज दिया है, अब वो तय करेंगे कि समलैंगिकता क्राइम है या नहीं
Advertisement

मुंबई गे प्राइड, 2015. Source: Reuters
मंगलवार को तीन जजों की बेंच ने धारा 377 पर सुनवाई करते हुए ये तय किया कि मामला आगे संविधान पीठ को भेज दिया जाए. संविधान पीठ में 5 जज होंगे जो विस्तार से सुनवाई करेंगे फिर फैसला देंगे कि होमोसेक्सुएलिटी क्राइम है या नहीं. https://twitter.com/ANI_news/status/694458416052318208 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ये फैसला दिया था कि समलैंगिकता गुनाह नहीं है. अगर दो लोग अपनी मर्जी से सेक्स करें, तो वो अपराध नहीं हो सकता. पर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 377 को फिर से लगा कर गे सेक्स को क्रिमिनल ओफेंस यानी अपराध की केटेगरी में रख दिया था. क्या है 377?
1862 में अंग्रेजों ने ये ऐक्ट पास किया था. पर 150 सालों में भी लोग बदल नहीं पाए. ये ऐक्ट कहता है: "प्रकृति के नियमों के खिलाफ अगर कोई इंसान या जानवर शारीरिक संबंध बनाएगा, तो उसे उम्र कैद होगी." प्राकृतिक यानी नेचुरल सेक्स से इनका मतलब था उस तरह का सेक्स जो दो शादीशुदा लोग केवल बच्चे पैदा करने के लिए करें. इस तरह से ओरल सेक्स और हस्तमैथुन भी धारा 377 के हिसाब से गुनाह हो जाता है. तकरीबन 15 साल से गे राइट्स एक्टिविस्ट दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से धारा 377 हटाने की मांग कर रहे हैं. देखते हैं मंगलवार को क्या फैसला आता है.
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement



















