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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा, क्लीन सिस्टम की बात करते हो, दो साल में लोकपाल नहीं बना

सुप्रीम कोर्ट ने दो साल बाद भी लोकपाल नियुक्त न किए जाने पर सेंटर गवर्नमेंट को खरी-खरी सुनाई.

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फोटो - thelallantop

अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं.

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ये अन्ना नहीं आंधी है, ये दूसरा गांधी है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि आपका तो दावा है कि आप सिस्टम को स्वच्छ करना चाहते हैं, फिर लोकपाल बिल में संशोधन क्यों नहीं ला रहे हैं. दो साल गुजर चुके हैं. केंद्र सरकार को इसके लिए कोई डेडलाइन तय करनी होगी. ये बेहद ही निराश करने वाला है. आखिर अब तक लोकपाल कानून में संशोधन क्यों नहीं किया गया है? क्यों सरकार संशोधन करने से अपने कदम पीछे खींच रही है? क्या वो ऐसा नहीं करना चाहती.
चीफ जस्टिस ने इस पर कहा कि कोर्ट इस कानून को लागू करने में हो रही देर को लेकर फिक्रमंद है. उन्होंने कहा, 'हमें परेशानी यह है कि दो साल पहले ही बीत चुके हैं. क्या यही हालत अगले ढाई या तीन साल तक भी बनी रहेगी? सरकार चाहे या न चाहे, संसद कानून में बदलाव करे या न करे, लोकपाल जैसे कानून को लागू तो होने दीजिए. सरकार ने इसे लागू करने के लिए अध्यादेश क्यों नहीं जारी किया. क्या अध्यादेश ही काफी नहीं होता?' कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को इस बारे में 7 दिसंबर को उचित जवाब के साथ कोर्ट को जानकारी देने को कहा है.

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ये नारे तो अभी याद ही होंगे. दिल्ली का रामलीला मैदान. लोगों के जोश से गूंज रहा था. इन नारों की मांग थी कि लोकपाल बनाया जाए. करप्शन पर रोक लगे. अनशन हुआ. और फिर 1 जनवरी 2014 को लोकपाल एक्ट नोटिफाई हो गया, मगर अभी तक लोकपाल की तैनाती नहीं हुई है. इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने सेंटर गवर्नमेंट को खरी-खरी सुनाई है. साफ साफ़ पूछा है, 'क्या मोदी सरकार लोकपाल को नियुक्त करने में अपना बाकी बचा कार्यकाल भी लगा देगी?' सरकार का कहना है कि लोकपाल एक्ट में संशोधन करना है. इसके लिए बिल संसद में लंबित है. एक्ट के मुताबिक सर्च कमेटी में नेता विपक्ष होना चाहिए, लेकिन अभी कोई नेता विपक्ष नहीं है. इसलिए सबसे बड़ी पार्टी के नेता को कमेटी में शामिल करने के लिए एक्ट में संशोधन करना है और ये संसद में लंबित है. चीफ जस्टिस ने कहा कि इस सरकार को बने ढाई साल हो चुके हैं, जब तक ये सरकार है कोई भी नेता प्रतिपक्ष नहीं बन सकता तो क्या इस वजह से लोकपाल की नियुक्ति अटकी रहेगी? हम ऐसा कैसे होने दे सकते हैं कि लोकपाल जैसी संस्था का कोई मतलब ही न हो. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में बताया कि सदन की एक सिलेक्ट कमेटी को यह एक्ट रेफर किया गया है, जिसने कानून में कई बदलावों की सिफारिश की है. संसद इन सुझावों पर विचार कर रही है. इसमें वक्त लगेगा. हम करप्शन रोकने के लिए कानूनों में बदलाव के बारे में भी सोच रहे हैं. कानून में बदलाव करना संसद का विशेषाधिकार है और कोर्ट कानून नहीं बना सकता है.' कोर्ट ने ये बातें तब कहीं, जब सीनियर ऐडवोकेट शांति भूषण ने जानना चाहा कि लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक शुरू क्यों नहीं की गई है. भूषण ने कहा, 'लोकपाल को बड़े संघर्ष के बाद पास किया गया था. क्या आप हजारे जैसा एक और आंदोलन चाहते हैं?'

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