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मोहम्मद जाफरी: ईरान का वो मास्टरमाइंड जिसकी 'मोजेक स्ट्रैटजी' US-इजरायल को जीतने नहीं दे रही

डीसेंट्रलाइज्ड मोज़ेक डिफेंस' स्ट्रैटजी के सूत्रधार मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी हैं. उन्होंने ईरान को ऐसा डिफेंस सिस्टम दिया है जो टॉप लीडरशिप के खत्म होने के बावजूद युद्ध जारी रखने में सक्षम है. मोजेक स्ट्रैटजी शायद ईरान को जीत न दिला पाए. लेकिन ये उनकी हार को असंभव बना देता है.

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मोहम्मद अली जाफरी को मोजेक डिफेंस स्ट्रैटजी का मास्टरमाइंड माना जाता है. (इंडिया टुडे)

20 मार्च 2003 की अलसुबह. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इराक पर आक्रमण कर दिया. तब ईराक में सद्दाम हुसैन की सत्ता थी. हुसैन की सेना ने 26 दिनों में अमेरिकी गठबंधन के सामने घुटने टेक दिए. 

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इस घटना के लगभग 23 साल बाद अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर आक्रमण किया. हमला करते वक्त वाशिंगटन के हुक्मरानों के जेहन में कहीं न कहीं इराक की सफलता की गाथा घूम रही होगी. पहले दिन सुप्रीम लीडर और कई शीर्ष मिलिट्री कमांडर्स के ढेर होने की खबर के बाद ईरान के ढहने के कयास भी लगाए जाने लगे. 

लेकिन ईरान के 'इराक' बनने के बीच एक वॉर स्ट्रैटजी थी. जिसे एक मेजर जनरल ने इराक में सद्दाम हुसैन की हार से सबक लेकर बनाया था. उसका नाम है जनरल मोहम्मद अली जाफरी. मेजर जाफरी IRGC के कमांडर इन चीफ रह चुके हैं.

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इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को उम्मीद थी कि सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत होते ही ईरान घुटने टेक देगा. लेकिन अब तक 14 दिनों में ईरान ने बेहद ताकतवर ढंग से पलटवार किया है. ईरान की इस ताकत के पीछे जनरल जाफरी का बनाया 'मोजेक डिफेंस' सिस्टम है. 

‘मोजेक डिफेंस’ सिस्टम के तहत मोहम्मद अली जाफरी ने ईरान की पूरी मिलिट्री को छोटे-छोटे और आजाद टुकड़ों में बांट दिया. ईरान ने अपना सिस्टम इस तरह गढ़ा है कि अगर राजधानी तेहरान खाक हो जाए, बड़े सैन्य अड्डे तबाह हो जाएं, कम्युनिकेशन लाइनें कट जाएं या फिर उनके बड़े से बड़े नेता भी मारे जाएं या फिर उनकी पूरी लीडरशिप खत्म हो जाए, फिर भी जंग की मशीनरी रुकनी नहीं चाहिए.

मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी कौन हैं?

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इंडिया टुडे से जुड़े शौनक सान्याल की रिपोर्ट के मुताबिक, मेजर जनरल जाफरी ईरान के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी हैं. उन्होंने इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत में IRGC के एक इंटेलिजेंस यूनिट से अपना करियर शुरू किया था. जाफरी 1989 तक चले ईरान-इराक युद्ध का हिस्सा रहे. और धीरे-धीरे प्रमोशन की सीढ़ी चढ़ते रहे. युद्ध के बाद साल 1992 में उन्हें IRGC की ग्राउंड फोर्सेज का कमांडर बनाया गया. साथ की तेहरान की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली IRGC की एक स्पेशल यूनिट सरल्लाह का भी कमांडर बनाया गया.

साल 2005 में जाफरी को गार्ड्स सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज का निदेशक बनाया गया. यूएन इंस्टीट्यूट ऑफ पीस की एक रिपोर्ट की मानें तो जाफरी ने अपने कार्यकाल के दौरान ईरान-इराक युद्ध और साल 2003 में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा इराक पर किए गए आक्रमण से सबक लेते हुए ईरान के मोजेक स्ट्रैटजी की नींव रखी.

मेजर जाफरी ने साल 2003 में ईराक पर अमेरिकी हमले की स्टडी की थी. रैंड संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, सद्दाम हुसैन की सेना ने जल्दी ही घुटने टेक दिए क्योंकि उनकी पूरी कमान एक ही व्यक्ति के हाथ में थी. सद्दाम की मंजूरी के बिना डिवीजन और कोर लेवल के अधिकारी युद्धाभ्यास भी नहीं कर सकते थे. नतीजा ये हुआ कि उनके हटते ही कम्युनिकेशन सिस्टम टूट गया और स्थानीय अधिकारी आदेश के बिना कुछ नहीं कर पाए और सेना बिखर गई.

इसके बाद साल 2007 में उन्हें IRGC का कमांडर इन चीफ बनाया गया. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मोजेक डिफेंस स्ट्रैटजी को धरातल पर उतारा. उन्होंने IRGC को 31 स्वतंत्र प्रांतीय कमानों में बांट दिया. हर प्रांत एक फ्री यूनिट है, जिसके पास अपने मिसाइल, ड्रोन और खुफिया सिस्टम है. इसी स्ट्रैटजी ने अमेरिका और इजरायली गठबंधन को बेदम कर रखा है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हुए संयुक्त हमले के बाद ईरान ने तुरंत ही जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. कुछ ही घंटों में खाड़ी देशों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन बरसने लगे. तेहरान ने बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. साथ में इजरायल और खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया गया. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ओमान और बहरीन जैसे न्यूट्रल देशों पर हमले के लिए माफी भी मांगी है. लेकिन ये हमले युद्ध के 14वें दिन भी जारी हैं.

अपनी अधिकतर सीनियर लीडरशिप के खत्म होने के बावजूद ईरानी सेना ने मिडिल ईस्ट में जवाबी कार्रवाई में तनिक भी देरी नहीं दिखाई. वहीं ईरानी हुकूमत भी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है. दूर-दूर तक तख्तापलट के कोई आसार नहीं दिख रहे. युद्ध शुरू होने के अगले दिन यानी 1 मार्च को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक एक्स पोस्ट में ईरान की रणनीति का खुलासा किया था. उन्होंने बताया, 

“हमने पिछले 20 साल अमेरिका के जंग लड़ने के तरीक़े को समझने में लगाए हैं. तेहरान पर बमबारी करने से अब हमारी ताक़त पर कोई असर नहीं पड़ता. हमारी 'डीसेंट्रलाइज्ड मोज़ेक डिफेंस' स्ट्रैटजी हमें ये तय करने की ताक़त देती है कि जंग कब, क्यों और कैसे लड़नी है.”

अब्बास अरागची ने आगे बताया कि ईरान की मिलिट्री यूनिट्स कुछ हद तक अलग-थलग हो गई थी. लेकिन ये पहले से तय किए गए निर्देशों के हिसाब से काम कर रही थीं. मोज़ेक डिफेंस की ख़ूबी यही है कि अगर ऊपर से हुक्म न भी आए, तब भी ज़मीनी स्तर पर छोटी टुकड़ियां अपने फ़ैसले ख़ुद ले सकती हैं. यानी अगर केंद्र तबाह हो जाए, तो किनारे पर बैठी टुकड़ियां ख़ुद केंद्र बन जाती हैं.

डीसेंट्रलाइज्ड मोज़ेक डिफेंस स्ट्रैटजी के सूत्रधार मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी हैं. उन्होंने ईरान को ऐसा डिफेंस सिस्टम दिया है जो टॉप लीडरशिप के खत्म होने के बावजूद युद्ध जारी रखने में सक्षम है. मोजेक स्ट्रैटजी शायद ईरान को जीत न दिला पाए. लेकिन ये उनकी हार को असंभव बना देता है.

वीडियो: ईरान के राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री मोदी ने क्या बात की?

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