आरती की थाल सजा लीजिए. सजदे के लिए सिर झुका लीजिए. हेलिकॉप्टर से
'कभी खुशी कभी गम' का शाहरुख खान नहीं, कोई और आया है. सुब्रमण्यम स्वामी का बयान आया है. स्वामी ने इस बार 'बयानी धनुष' उठाकर अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया मुकुल रोहतगी पर तीर साधा है और HRD मिनिस्ट्री पर एक सवाल दागा है. मामला हेट स्पीच और हिंदू कॉलेज के 'मदरसे बनने' का है. बयान ऑफिशियल स्वामी का है. बारी-बारी से पाएं.
क्या हिंदू कॉलेज मदरसे में तब्दील हो रहा है? अइसा हम नहीं. सर्वश्री सुब्रमण्यम स्वामी पूछ रहे हैं. दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल की फीस बढ़ रही है. स्वामी से फीस बढ़ने को लेकर सवाल पूछा गया. स्वामी ने कहा,
'क्या हिंदू कॉलेज मदरसे में तब्दील हो रहा है? मैंने फीस बढ़ाए जाने को लेकर HRD मिनिस्ट्री (स्मृति ईरानी वाली नहीं, प्रकाश जावड़ेकर वाली) को खत लिखा है. मैंने छात्राओं से हॉस्टल की तीन गुणा फीस लिए जाने को लेकर आपत्ति जताई है.'
स्वामी की फीस को लेकर आपत्ति भी ठीक है. क्योंकि हिंदू कॉलेज में हॉस्टल में रहने वाले लौंडों को साल के 47 हजार रुपये देने होते हैं. जबकि लड़कियों को 82 हजार रुपये से ज्यादा देने की बात कही जा रही है. कॉलेज के बालक एंड बालिकाएं प्रोटेस्ट कर रहे हैं. नेशनल कमिशन फॉर वूमेन ने भी नोटिस ले लिया है. सबसे मेन बात, स्वामी ने नोटिस ले लिया है, तो समझ लियो. कुछ करके दम लेंगे ये 'राजन'. स्वामी का हिंदू कॉलेज से लगाव यूं भी समझना चाहिए कि उनके भीतर का सारा गणित इसी कॉलेज से उगा है. स्वामी ने मैथेमैटिक्स में बैचलर की डिग्री हिंदू कॉलेज से ही पाई है.
अब स्वामी के दूजे बयान की तरफ बढ़ते हैं. अटॉर्नी जनरल के हेट प्रिय स्वामी....
'हेट स्पीच कानून को लेकर मेरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. घटिया अटॉर्नी जनरल (मुकुल रोहतगी) एंटी टेरर के जिस केस में मुझे बुक करना चाह रहे थे, सरकार के आदेश पर उन्हें वो केस वापस लेना पड़ा.- सुब्रमण्यम स्वामी, ट्विटर
हेट स्पीच पर दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 20 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है. स्वामी ने ट्वीट कह कहा, 'मुझे मुस्लिम कट्टरपंथियों और हिंदुओं से नफरत करने वालों पर दया आ रही है, जिन्हें उम्मीद थी कि अटॉर्नी जनरल के एफिडेविट से मुझ पर केस चला पाएंगे.' स्वामी की मुकुल रोहतगी से कड़वाहट कुछ पुरानी है. उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रूल लगाने वाले मसले पर स्वामी रोहतगी को लेकर कह चुके थे, 'केंद्र सरकार को नया अटॉर्नी जनरल चुन लेना चाहिए.' ये वाला सही काम नहीं कर रहा है.
क्या स्वामी ने दी थी हेट स्पीच?
असम की काजीरंगा यूनिवर्सिटी में भड़काऊ स्पीच देने का केस चल रिया है. गृह मंत्रालय ने बीते साल सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट जमा कराया था. इस एफिडेविट में भड़काऊ लेखों और स्पीच देने के मामले में स्वामी को कानून के उल्लंघन का आरोपी माना. आरोप लगा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच स्वामी नफरत फैला रहे हैं. स्वामी इससे भी बिल्लाए हुए हैं.
जहां न काम आवे छुरी, काम आवे याचिका. लिहाजा स्वामी ने दाग दी एक और याचिका. धारा 153A को चुनौती. ये आईपीसी की धारा होती है. इस धारा के तहत अलग-अलग धर्मों, लोगों, भाषाओं के लोगों के बीच नफरत फैलाने वाले लोगों की बुद्धि ठिकाने का इंतजाम होता है.
सुब्रमण्यम स्वामी: मेरे सवालों का जवाब दो....