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कोरोना: चीन से आई रैपिड टेस्ट किट में गड़बड़ी, ICMR ने इस्तेमाल पर रोक लगाई

भारत ने पांच लाख किट पिछले सप्ताह ही मंगाई थी.

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रैपिड टेस्ट किट से देश के कई राज्यों में कोरोना की जांच शुरू हो चुकी है. (Photo: PTI)
देश में कोरोना वायरस की जांच के लिए मंगाई गई रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट में गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं. इसके बाद राज्यों से दो दिनों के लिए इसका इस्तेमाल रोकने को कहा गया है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने यह जानकारी दी है. कोरोना को लेकर रोजाना होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि कई राज्यों में रैपिट टेस्ट किट के रिजल्ट ठीक नहीं मिले हैं. भारत ने यह किट चीन से मंगाई थी.  ICMR के हेड साइंटिस्ट रमण गंगाखेड़कर ने बताया-
हमें एक राज्य से शिकायत मिली कि रैपिड किट से मामले कम डिटेक्ट हो रहे हैं. इसलिए हमने तीन स्टेट से पूछा. यह पूछने के बाद पता चला है कि पॉजिटिव सैंपलों की एक्युरेसी में अंतर आ रहा है. कुछ जगहों पर इसमें 6 पर्सेंट से 71 पर्सेंट का अंतर देखा गया. यह अच्छी बात नहीं है, क्योंकि इतना अंतर होने पर हमें आगे जांच की जरूरत है. यह बीमारी साढ़े तीन महीने पुरानी ही है. ऐसे में समय के हिसाब से तकनीक में सुधार होगा, लेकिन हम जांच को अनदेखा नहीं कर सकते.
उम्मीद से कम कारगर रही रैपिड टेस्ट किट दरअसल RT-PCR और रैपिड टेस्ट में बुनियादी फर्क है. RT-PCR मूलत: शरीर में वायरस के जेनेटिक मटेरियल की जांच करता है, जबकि रैपिड टेस्ट शरीर में वायरस के कारण बनने वाली एंटीबॉडीज़ की जांच करता है. वायरस की एंटीबॉडी वायरस होने के बारे में अंदाज़ा लगाने में मदद कर सकती है, लेकिन ये हमेशा RTPCR जितने सटीक नतीजे नहीं देती. इसलिए ICMR ने रैपिड टेस्ट को मास स्क्रीनिंग के लिए रखा था. ऐसी उम्मीद थी कि रैपिड टेस्ट के नतीजे RT-PCR के मुकाबले लगभग 80% भी सही हों, तो काम चल जाएगा. ये बात ICMR ने अपनी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही थी. लेकिन सामने आया है कि ये नतीजे 6 से 71% करीब रह रहे हैं. और ये ठीक बात नहीं है.  ICMR अपनी टीमों से कराएगा जांच उन्होंने आगे कहा कि अगले दो दिनों में  ICMR अपनी आठ टीमें भेजेगा. ये फील्ड में जाकर टेस्ट किट के रिजल्ट की जांच करेंगी. ऐसे में अगले दो दिन तक यह टेस्ट किट इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है. दो दिन बाद रिजल्ट के हिसाब से एडवाइजरी जारी की जाएगी. अगर टेस्ट किट के बैच में दिक्कत है, तो कंपनी से बात की जाएगी. रैपिड टेस्ट से जल्दी आते हैं नतीजे बता दें कि कोरोना की जांच के लिए RT-PCR टेस्ट सबसे पुख्ता तरीका है. RT-PCR टेस्ट से जो नतीजे आने में घंटों लग जाते हैं, रैपिड एंटी बॉडी टेस्ट में वो बात मिनटों में पता चल जाती है. RT-PCR टेस्ट के लिए मुंह और नाक से सैंपल लिया जाता है. वहीं रैपिड टेस्ट में खून से कोरोना का पता लगाया जाता है. RT-PCR और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को आसान भाषा में समझने के लिए यहां क्लिक करें  ICMR रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल सिर्फ मास स्क्रीनिंग के लिए कर रहा है. मतलब एक बहुत बड़े समूह में वायरस से इन्फेक्टेड लोगों को चिह्नित करने के लिए. फाइनल रिज़ल्ट की घोषणा फिलहाल RT-PCR टेस्ट के बाद ही की जा रही है. राजस्थान ने की थी शिकायत बता दें कि राजस्थान सरकार ने रैपिड टेस्ट किट को लेकर शिकायत की थी. 'इंडिया टुडे' के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा था कि इन किट से 5.5 प्रतिशत ही सही नतीजे आ रहे हैं. इनसे 90 प्रतिशत सही नतीजों की उम्मीद थी. इसलिए इन किट का कोई फायदा नहीं. इस बारे में ICMR को जानकारी दे दी गई है. राजस्थान के अलावा बंगाल ने भी रैपिड टेस्ट किट को लेकर शिकायत की थी. बता दें कि भारत ने पिछले सप्ताह चीन से पांच लाख टेस्ट किट मंगाई थी. टेस्ट की संख्या बढ़ाने के लिए इन्हें राज्यों को दिया गया था. भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस

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