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जो एनकाउंटर में मारे गए, उनके बारे में सबसे डरावनी बात पढ़िए

आरोपों की फेहरिस्त लंबी है. लेकिन सब अंडरट्रायल हैं.

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फोटो - thelallantop
जेल से भागे आठ कैदी MP पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए. जिन्हें आतंकी बताया जा रहा है हालांकि इनमें से किसी को भी अभी सजा नहीं हुई थी. तो आतंकी कहा जाना सही नहीं होता. फिर एनकाउंटर के तमाम वीडियोज सामने आने लगे और एनकाउंटर की सच्चाई पर सवाल उठने लगे. वीडियोज की बरसात ऐसी हुई है कि जानने का मौका ही नहीं मिला कि कैदी किन मामलों में आरोपी थे. उन मामलों में उनकी पेशी भी हुई थी कि नहीं. उनके कानूनी मामले किस चरण में थे?
MP पुलिस ने जिन आठ सिमी मेंबर्स का एनकाउंटर किया है, वो कई मामलों में आरोपी हैं. इनमें 2008 में अहमदाबाद के सीरियल ब्लास्ट से लेकर 2014 के खांडवा दंगे तक शामिल हैं. पढ़िए, किस पर क्या आरोप थे:
भोपाल जेल के बाहर खड़े पुलिस वाले
भोपाल जेल के बाहर खड़े पुलिस वाले

'इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के हिसाब से अमजद रमजान खान, शकील महबूब, जाकिर हुसैन और मोहम्मद शकील यूपी के बिजनौर में 2014 में हुए बम विस्फोट के आरोपी थे. ATS की चार्जशीट के मुताबिक, ये बम बना रहे थे और विस्फोट हो गया था. मामले की NIA जांच कर रही है, जिसने अभी चार्जशीट भी दाखिल नहीं की है. अमजद खान, महबूब और हुसैन तीनों ही MP के खांडवा के रहने वाले थे. और ये उस ग्रुप के पार्ट भी थे, जो 2013 में ओडिशा की लोकल जेल से भागा था.
मुजीब शेख जो अहमदाबाद का रहने वाला है. वो 2008 के अहमदाबाद में ही हुए दंगों का आरोपी है. 2011 में इसकी गिरफ्तारी हुई थी. MP से जुड़े कई मामलों में भी ये आरोपी है. इनमें से एक मामला बम लगाने का भी है. MP में इसके खिलाफ चार्जशीट तो फाइल कर दी गई है. पर अभी केस शुरू नहीं हुआ था.
माजिद नागौरी जो कि उज्जैन की माहिदपुर बस्ती का रहने वाला है. जो कि विस्फोटक ले जाने और गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम एक्ट 2013 में गिरफ्तार किया गया था. वो जबसे केस दर्ज हुआ था तबसे गायब था. पर बाद में उसने खुद-ब-खुद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था.
इन सबमें पहला केस अकील खिलजी के खिलाफ दर्ज हुआ था. जो कि खांडवा की गुलमोहर सोसाइटी का रहने वाला था. सिमी के 2000 में बैन होने के बाद से कई मामलों में इसका नाम सामने आया था. खांडवा में 2006 में हुए चार दंगों में वो आरोपी था. वो गैरकानूनी गतिविधियों का भी आरोपी था. एक बार उसको सजा भी हो चुकी थी और दो साल जेल में सजा भी काट चुका था. इस बार 2013 में उसे रतलाम के पास गिरफ्तार किया गया था और तब से वो जेल में ही था.
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खालिद अहमद ऑटोरिक्शा चलाता था. कबाड़ का धंधा करता था और जादू दिखाने का काम भी करता था. ये जानकारी महाराष्ट्र सरकार के पास दर्ज उसकी जानकारी से पता चलता है. अफसरों ने ये भी बताया कि खालिद की मां, पत्नी और पांच बच्चे विजय नगर मलिन बस्ती में रहते हैं. जो कि महाराष्ट्र के सोलापुर में नई जिंदगी बस्ती के पास है. एंटी टेरर स्क्वाड के उसे गिरफ्तार करने से पहले 36 साल के खालिद की कई बार एंटी टेरर स्क्वाड से झड़प हो चुकी थी, 25 दिसंबर, 2013 को. उस पर SIMI मॉड्यूल से जुड़े होने का आरोप था. उसकी गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद जांच करने वाली एजेंसियों ने उसके भाई को भी उठा लिया था.
अफसर जो खालिद के पीछे सालों से पड़े हुए थे, बताया कि कथित सिमी मेंबर 12वीं फेल था. इसके बाद वो कट्टरपंथी विचारों के प्रभाव में आया और अक्टूबर 2002 में अपने पड़ोस में हुए दंगों का आरोपी भी था.
सारे आठ कैदी जो जेल से भागे और MP पुलिस के एनकाउंटर में मार दिए गए उनके ऊपर ये आरोप थे:

शेख महबूब

शेख महबूब उर्फ गुड्डू उर्फ मलिक जो 2013 में खांडवा की जेल से भागा था.
2014 के बिजनौर दंगों का आरोपी था और इसी साल दोबारा पकड़ा गया था.
2011 में वो एक कांस्टेबल के मर्डर के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया था.
इसका नाम अहमदाबाद के 2008 के बम ब्लास्ट में भी सामने आया था.

जाकिर हुसैन

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जाकिर हुसैन उर्फ सादिक, उम्र 32 साल.
इसका नाम भी महबूब के साथा ही कॉन्स्टेबल के मर्डर में सामने आया था.
खांडवा जेल से भागने के मामले में भी वो शामिल था.
साथ ही इसका नाम भी 2014 के बिजनौर दंगों में आया था.
इसे दोबारा इस साल राउरकेला में गिरफ्तार किया गया था.

अमजद

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अमजद उर्फ पप्पू उर्फ दाऊद, उम्र 25 साल. और महबूब और जाकिर हुसैन का ही साथी था.
ये भी 2013 वाले जेलब्रेक में शामिल था. साथ ही बिजनौर दंगों का भी आरोपी था.
राउरकेला में ही इसी साल गिरफ्तार किया गया.
पहले ये जून 2011 में गिरफ्तार किया गया था. 2010 में हुई भोपाल की एक फायनेंस कंपनी में डकैती के आरोप में.

मोहम्मद सादिक

सादिक उर्फ सल्लू, महबूब, जाकिर और अमजद के साथ ही इस साल राउरकेला से गिरफ्तार किया गया था.
ये भी बिजनौर दंगों का आरोपी है पर जेल तोड़ने के मामले में शामिल नहीं था.
बिजनौर दंगों की जांच NIA कर रही है. ये बम बनाने का आरोपी भी है.

अकील खिलजी

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ये 47 साल का था, खांडवा का रहने वाला.
उसने 2000 में सिमी के प्रतिबंधित होने के बाद उससे जु़ड़े कई मामलों में आरोपी रहा.
अकील खांडवा के ही सांप्रदायिक हिंसा के 4 मामलों में आरोपी था.
एक बार वो दो साल के लिए जेल भी जा चुका था. वो 2013 तक जेल में ही था.

माजिद नागौरी

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के माहिदपुर टाउन का रहने वाला.
वो विस्फोटक ले जाने के चलते गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 2013 के तहत गिरफ्तार किया गया था.
वांटेड होने के बाद कुछ दिन गायब रहा पर बाद में उसने खुद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था.

खालिद अहमद

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सोलापुर से आने वाला, ऑटोरिक्शा चलाने का काम करता था.
2013 में MP पुलिस ने जिन पांच को गिरफ्तार किया था उसमें ये भी शामिल था.
इस पर SIMI की स्लीपर सेल में शामिल होने का भी आरोप था. अफसरों का कहना है, कुछ बड़ी प्लानिंग कर रहा था.

मुजीब शेख

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अहमदाबाद के रहने वाले मुजीब की गिरफ्तारी MP पुलिस के 2011 में सिमी से कांटेक्ट के शक में हुई थी.
उसके बाद उसे 2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का आरोपी भी बनाया गया था.
इसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की जा चुकी थी, पर केस अभी शुरू नहीं हुआ था.


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