The Lallantop

ईरान की स्कूली बच्चियों की कब्रें देखकर दिल बैठ जाएगा, जानें उस दिन क्या हुआ था

ईरान के स्कूल पर हुए हमले में मारे गए छात्राओं की संख्या 165 बताई जा रही है. वहां के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने X पर यह फोटो शेयर करते हुए कहा कि इस हमले के बाद बच्चियों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे.

Advertisement
post-main-image
ईरान के स्कूल पर हमले में 100 से ज्यादा छात्राओं की मौत का दावा किया जा रहा है. (india today)

छोटे ताबूतों का ‘वजन’ सबसे भारी होता है. दक्षिणी ईरान का मीनाब (Minab) शहर फिलहाल इस वजन को महसूस कर रहा है. इस शहर में 100 से ज्यादा ‘छोटी कब्रें’ खोदी जा रही हैं. आसमान से ली गई एक फोटो में इस दृश्य को देखकर किसी का भी दिल दहल जाए. इसी फोटो में चॉक से बने कुछ चौकोर निशान भी कब्र बनने के इंतजार में दिखते हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

धरती की सतह पर ‘दूसरी दुनिया की खिड़कियों’ की तरह बनी ये सारी कब्रें उन मासूम लड़कियों के लिए खोदी जा रही हैं, जो इजरायल और अमेरिका के एयर स्ट्राइक में मारी गईं. ईरान ने बताया है कि हमले में मारी गई लड़कियों की संख्या 165 है. वहां के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने X पर यह फोटो शेयर करते हुए कहा कि इस हमले के बाद बच्चियों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे.  

अमेरिका-इजरायल के हमले में स्कूली बच्चियों की मौत

मीनाब के प्राइमरी स्कूल पर ये हमला शनिवार 28 फरवरी को हुआ, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई शहरों को निशाना बनाते हुए अब तक के सबसे घातक हमले किए. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई. 

Advertisement

ईरान के स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में शजारेह तैय्येबेह गर्ल्स प्राइमरी स्कूल है. यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) से जुड़े एक ठिकाने से सिर्फ 200 फीट की दूरी पर है.

ब्रिटेन की न्यूज एजेंसी द इंडिपेडेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार 28 फरवरी को सुबह करीब 10 बजे इस स्कूल पर मिसाइल हमले हुए. ईरान के एक मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने बताया कि उस स्कूल में कुल 170 बच्चे पढ़ते थे. ईरान में शनिवार से लेकर गुरुवार तक 6 दिन के वर्किंग डे का नियम है. सिर्फ शुक्रवार को ही एक ऑफिशियल वीकली ऑफ होता है. इसका मतलब है कि शनिवार को जब हमले हुए तब स्कूल खुला था और वहां स्टूडेंट्स मौजूद थे.

iran
ईरान के विदेशमंत्री का ट्वीट.

इजरायल और अमेरिका के एयर स्ट्राइक के बाद इस स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह ध्वस्त हो गई. इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर आईं, जिनमें स्कूली बच्चों के बैग और चिथड़े हो चुकी किताबें देखी गईं. हमले के बाद शुरुआती रिपोर्ट्स में बताया गया कि 5 लोगों की मौत की हुई है, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 85 हो गई. 

Advertisement

शनिवार 28 फरवरी की शाम तक अधिकारियों ने बताया कि 108 स्टूडेंट्स मारे गए हैं. रविवार 1 मार्च की शाम को स्थानीय अफसरों ने दावा किया कि स्कूल पर हमले में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 165 हो गई है और 95 लोग घायल हुए हैं. अब आखिरी आंकड़ा 185 का बताया जा रहा है. 

इस हमले को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘बर्बर कृत्य’ और ‘हमलावरों के अनगिनत अपराधों के रिकॉर्ड का एक और काला पन्ना’ बताया. यूनाइडेट नेशन में ईरान ने शिकायत की है कि अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर नागरिक ठिकाने पर हमला किया, जो युद्ध अपराध (War crime) तो है ही. साथ ही मानवता के खिलाफ भी अपराध है. 

वहीं, अमेरिका और इजराइल दोनों ने ही सार्वजनिक तौर पर अभी इस घटना की पुष्टि नहीं की है कि उन्होंने स्कूल को निशाना बनाया. अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि उसे नागरिकों को हुए नुकसान की खबरों की जानकारी है और वह मामले की समीक्षा कर रही है. बयान में आगे कहा गया कि वह इस मामले की जांच कर रहे हैं. नागरिकों की सिक्योरिटी सबसे ऊपर है और अनजाने में नुकसान के हर जोखिम को कम करने के लिए वह आगे सावधानी बरतेंगे.

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?

TOI के मुताबिक, जंग के दौरान स्कूलों या नागरिक आबादी पर हमले करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ होता है. International Humanitarian Law कहता है कि किसी भी युद्ध में शामिल सभी पक्षों को तीन तरह के नियम मानने होते हैं. इसका पहला ही नियम है कि लड़ाई में नागरिक ठिकानों और सैन्य ठिकानों में अंतर करना होगा. किसी भी नागरिक फेसिलिटी, जैसे स्कूल, अस्पाल आदि पर सीधे हमला नहीं किया जा सकता. अगर किसी ठिकाने को लेकर संदेह भी है तो उसे नागरिक संपत्ति मानकर छोड़ दिया जाता है. इसके अलावा युद्ध के दौरान बच्चों को खास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा दी गई है.

हां, अगर किसी स्कूल या अस्पताल या नागरिक प्रॉपर्टी का इस्तेमाल सैन्य मकसद के लिए किया जाए. यानी वहां हथियार रखे जाएं या सैन्य कमांड की पोस्ट बनाई जाए तो उस जगह को सेना का ही ठिकाना माना जाता है और वहां हमले की छूट खत्म हो जाती है. मीनाब के स्कूल को लेकर अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि वहां पर सैन्य गतिविधियां हो रही थीं. अमेरिका और इजरायल ने भी ऐसा कोई दावा अब तक नहीं किया है.

वीडियो: यूएस अडवांस बुकिंग में रणवीर की 'धुरंधर 2' से पीछ रह गई 'टॉक्सिक'?

Advertisement