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"15 दिनों में संजौली मस्जिद का अवैध निर्माण गिराओ वर्ना...", प्रशासन को किसने भेजा अल्टीमेटम?

संजौली की देव भूमि संघर्ष समिति ने नगर निगम को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें संजौली की विवादित मस्जिद के ऊपर बना दो मंजिला अवैध निर्माण गिराने की बात कही गई है.

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शिमला के संजौली में मस्जिद विवाद को लेकर सिविल सोसाइटी ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है. (तस्वीर:इंडिया टुडे)

हिमाचल प्रदेश के शिमला में संजौली मस्जिद (Shimla Sanjauli Mosque dispute) से जुड़े मामले में सिविल सोसायटी के लोगों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कहा कि अगर 15 दिन के भीतर मस्जिद से जुड़ा अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो एक बड़ा आंदोलन होगा. अवैध निर्माण को हटाने का आदेश नगर निगम कोर्ट ने अक्टूबर में दिया था.

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‘अवैध निर्माण नहीं हटाया तो होगा आंदोलन’

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, संजौली की देव भूमि संघर्ष समिति ने नगर निगम को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें संजौली की विवादित मस्जिद के ऊपर बना दो मंजिला अवैध निर्माण गिराने की बात कही गई है. समिति का कहना है,

“शिमला की नगर निगम अदालत ने आदेश दिया था कि संजौली की विवादित मस्जिद के ऊपर बने अवैध निर्माण को दो महीने के भीतर गिरा दिया जाए. लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी अवैध निर्माण को गिराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.”

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समिति और सिविल सोसायटी का दावा है कि नगर निगम के ढुलमुल रवैये से स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. समिति ने कहा, “ऐसा लगता है नगर निगम जनता को गुमराह कर रहा है.”

सिविल सोसायटी संजौली और देवभूमि संघर्ष समिति ने नगर निगम से मांग की है कि 15 दिनों के अंदर अवैध निर्माण को गिराने की प्रक्रिया पूरी की जाए. ऐसा नहीं होने पर एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी जिसमें संजौली बाजार को बंद करना शामिल है.

संजौली मस्जिद विवाद का बैकग्राउंड

हालिया विवाद की शुरुआत 31 अगस्त, 2024 से हुई. जब संजौली के मतियाना गांव में कुछ युवकों के बीच झगड़ा हो गया. झगड़े के बाद कुछ आरोपियों ने कथित रूप से संजौली मस्जिद में शरण ली थी. इसके बाद संजौली मस्जिद विवाद उठा और वहां के लोगों ने प्रदर्शन किया. ये विवाद जल्द ही राजनीतिक गलियारों से गुजरते हुए विधानसभा पहुंचा. हिमाचल प्रदेश सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में मस्जिद निर्माण पर सवाल उठा दिए थे.

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इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा जहां 5 अक्टूबर को नगर निगम कमिश्नर की अदालत ने संजौली मस्जिद की तीन मंजिलें तोड़ने का आदेश दिया था. नगर निगम कोर्ट के फैसले को ऑल हिमाचल मुस्लिम आर्गेनाइजेशन (AHMO) ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चुनौती दी. लेकिन कोर्ट ने 30 नवंबर को AHMO की याचिका को खारिज कर दिया. 

यह भी पढ़ें:शिमला में एक मस्जिद को गिराने की मांगें क्यों उठ रही हैं?

संजौली मस्जिद का इतिहास

मस्जिद के इतिहास को लेकर आजतक से जुड़े विकास शर्मा ने इलाके के कुछ स्थानीय लोगों से बात की थी. उन लोगों ने बताया,

“इस जगह पर पहले टेलर की दुकान थी. कुछ लोगों ने यहीं पर नमाज़ पढ़ना शुरू कर दिया. इसके बाद यहां मस्जिद बना दी गई. और बाद में एक के बाद एक मंजिल ऊपर बनती चली गई. साल 2010 में पहली बार मस्जिद को नोटिस दिया गया. नोटिस में कहा गया कि एक मंजिल बनाने की इजाजत थी तो दूसरी क्यों बनाई गई? लेकिन नोटिस का कोई असर नहीं हुआ. तीसरी मंजिल भी बनी. चौथी मंजिल भी बनी और पांच मंजिलें बनकर तैयार हो गईं.”

अवैध निर्माण के नोटिस आते रहे लेकिन बिल्डिंग ऊपर बनती चली गई. इस बीच जब से मुकदमा शुरू हुआ तब से कोर्ट में 44 सुनवाइयां हो चुकी हैं. विकास ने बताया कि मौजूदा दस्तावेजों के मुताबिक 1967 से जमीन का मालिकाना हक हिमाचल सरकार के पास है, लेकिन इस पर कब्जा वक्फ बोर्ड का है.

वहीं, इस मामले में मस्जिद के इमाम का कहना है कि मस्जिद 1947 से पहले की बनी है. उन्होंने दावा किया कि पहले मस्जिद कच्ची थी, बाद में लोगों ने चंदा लगाकर इसका निर्माण करवाया.

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