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स्विट्जरलैंड में 'पीस' पर मीटिंग चल रही, इधर ईरान को धमकाने से बाज नहीं आ रहे ट्रंप

Donald Trump ने Iran को फिर से चेतावनी दे दी है. उन्होंने कहा है कि ईरान को Lebanon में अपने Hezbollah जैसे सहयोगियों पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए. ऐसा नहीं हुआ तो वो यानी US, फिर से Military Action कर सकते हैं.

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ट्रंप ने ईरान को फिर से दमकी दी है (PHOTO-Anadolu Ajansı)

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  • अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेबनान में अपने प्रॉक्सी को गड़बड़ी फैलाने से रोकने और नहीं मानने पर मिलिट्री कार्रवाई की चेतावनी दी है।
  • स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच एक MoU के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा और न्यूक्लियर प्रोग्राम जैसे मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत करने की योजना बनाई गई है।
  • इस चेतावनी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि लेबनान में सीजफायर बनाए रखने में सफलता मिली है, जबकि ईरान ने कुछ शर्तें पूरी होने तक बातचीत के अगले चरण में जाने से इनकार किया है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांतिवार्ता हुई तो दुनिया ने राहत की सांस ली. ऐसा लगा कि अब फिर से दुनिया की तेल सप्लाई पहले की तरह पटरी पर आ जाएगी. लेकिन क्या करें! अमेरिका की राष्ट्रपति वाली कुर्सी पर गजब के व्यक्ति बैठे हैं. नाम है डॉनल्ड ट्रंप. जनाब कब खिसिया जाते हैं. कब मोहब्बत कर बैठते हैं. कोई नहीं जानता. खबर है कि अब उन्होंने ईरान को फिर से चेतावनी दे दी है. उन्होंने कहा है कि ईरान को लेबनान में अपने हिजबुल्लाह जैसे सहयोगियों पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए. ऐसा नहीं हुआ तो वो फिर से ईरान पर मिलिट्री कार्रवाई कर सकते हैं.

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स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका की बातचीत का नया दौर शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, 

ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी को गड़बड़ी फैलाने से तुरंत रोकना होगा. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे. ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था. बल्कि उससे भी ज्यादा जोरदार.

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प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट (PHOTO- Screengrb from Truth Social)

ट्रंप की चेतावनी कोई नई बात नहीं है लेकिन यह चेतावनी स्विट्जरलैंड में चल बहुत बड़े डिप्लोमैटिक प्रोसेस के बीच आई है. अमेरिका और ईरान उनके साइन किए गए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत स्विट्जरलैंड में बैठक कर रहे हैं. इस MoU में क्षेत्रीय सुरक्षा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और कई मोर्चों पर सीजफायर जैसे मुद्दों पर बातचीत का खाका तैयार किया गया था. इस समझौते में दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और एक स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के मकसद से 60 दिनों तक बातचीत करने की योजना बनाई गई थी.

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सीजफायर ही सबसे बड़ा टारगेट

ईरान, पाकिस्तान, कतर और अमेरिका के बीच बातचीत के बाद अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने लेबनान में सीजफायर बनाए रखने में काफी हद तक कामयाबी हासिल की है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इलाके में हालात अभी भी नाजुक बने हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के सीजफायर काफी पेचीदा होते हैं.

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दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है. ईरान तब तक बातचीत के अगले चरण में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है जब तक उसकी कुछ शर्तें पूरी न हो जाएं. ईरान ने बार-बार जोर देकर कहा है कि ठोस बातचीत, खासकर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी चर्चा फिर से शुरू होने से पहले लेबनान पर इजरायली हमले बंद होने चाहिए.

वीडियो: क्या ईरान फिर से होर्मुज बंद कर देगा?

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