13 दिसंबर सन 1947 को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू ने स्पीच दी थी. कि कैसी हो यूनिवर्सिटी. "यूनिवर्सिटी का उद्देश्य मानवता, तार्किकता, चिंतन और सच्चाई की खोज की भावना को स्थापित करना होता है. इसका उद्देश्य इंसान को लगातार नए लक्ष्य की तरफ बढ़ाने का होता है. अगर यूनिवर्सिटी अपना फर्ज अच्छी तरह से निभाएं तो देश और जनता दोनों के लिए अच्छा होगा."
अब देखो देश दुनिया में हो क्या रहा है. यूनिवर्सिटी के लेवल पर. सरगोधा यूनिवर्सिटी है लाहौर में. कैंपस को लगता है कि लड़का और लड़की दोस्त नहीं हो सकते. वहां स्टूडेंट्स को जोड़ा बनाकर बैठने पर कैंपस ने रोक लगा दी है. माने बैन कर दिया है. डॉक्टर अरबाब खालिद चीमा यूनिवर्सिटी के डिसिप्लिन सेक्रेट्री हैं. उनका साइन किया नोटिस कैंपस में चस्पां हो गया है. जिसमें लिखा है "हमारी परंपरा, धार्मिकता के मद्देनजर और पैरेंट्स की शिकायत पर ये फैसला लिया गया है. मेल और फीमेल स्टूडेंट्स के बीच में किसी भी तरह का अनुचित रिश्ता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उनको कपल की तरह बैठना एलाउड नहीं है. कम से कम तीन के ग्रुप में बैठें."
स्वात यूनिवर्सिटी में भी लग चुका है बैन
स्वात यूनिवर्सिटी में सिर्फ बैन नहीं लगा था. वहां साथ बैठने वाले जोड़ों के ऊपर जुर्माने का भी हिसाब तय था. 50 रुपए से 5 हजार तक. उस यूनिवर्सिटी में ये नोटिस लगा था. जब दुनिया भर में थू मच गई तो कॉलेज प्रशासन ने नोटिस लगाने वाले चीफ प्रॉक्टर को सस्पेंड कर दिया था.
लल्लन कहिस
जुर्माना वाला सिस्टम सही था. उसमें स्टूडेंट्स मंथली रेट फिक्स कर सकते थे. लेकिन ये बैन कर देने वाला सिस्टम ठीक नहीं है. हम देखे थे हमारे देश में भी पढ़ाई के दौरान लड़का-लड़की में उचित दूरी बनाए रखने के लिए कर्रे जुगाड़ लगते थे. लड़कियों को कन्या पाठशाला, बालिका इंटर कॉलेज से गर्ल्स कॉलेज तक का सफर तय करना होता था. सिर्फ लड़कियों के साथ. कित्ती बोरिंग स्टूडेंट लाइफ होती थी वो. लड़कों के साथ भी ऐसा था. लड़का और लड़की फिर एक दूसरे से मिलने के लिए जो तरीके निकालते थे उन पर अलग से किताब छप सकती है.