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जानलेवा हमले के बाद पहली बार सामने आए सलमान रुश्दी, तस्वीर शेयर कर कहा, 'अब ऐसा दिखता हूं'

'मैं लिखने बैठता हूं लेकिन कुछ नहीं होता. उंगलियों के सिरे महसूस नहीं होते, टाइप नहीं कर पाता.'

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सलमान रुश्दी (फोटो-ट्विटर)

भारतीय मूल के जाने-माने लेखक सलमान रुश्दी पर पिछले साल अगस्त में न्यूयॉर्क में एक जानलेवा हमला हुआ था. इस हमले में वो बुरी तरह घायल हुए थे. रिपोर्टों में बताया गया था कि उनकी दाईं आंख की रोशनी चली गई है. घटना के बाद सलमान रुश्दी महीनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे. अब उनका एक इंटरव्यू आया है (Salman Rushdie First Interview after Attack). साथ ही आई है उनकी तस्वीर. इसमें उन्होंने चश्मा पहना है उसका दायां लेंस का रंग डार्क है. उसी आंख पर जो हमले में डैमेज हो गई थी.

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इंटरव्यू में सलमान रुश्दी ने हमले और उसके बाद के अनुभवों पर बात की है. बताया कि उस एक हमले से उनकी मेंटल हेल्थ, फिजिकल हेल्थ और उनकी राइटिंग पर कितना घातक असर हुआ. वो कहते हैं, “मैं लिखने बैठता हूं लेकिन कुछ नहीं होता.”

सलमान रुश्दी का इंटरव्यू

75 साल के ब्रिटिश-अमेरिकी लेखक ने न्यूयॉर्कर मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा है,

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मेरे लिए लिखना बेहद मुश्किल हो गया था. मैं लिखने बैठता हूं लेकिन कुछ नहीं होता. जो मैं लिखता हूं या लिखकर अगले दिन मिटा देता हूं, वो बस खालीपन और कचरा होता है. वास्तव में अभी तक मैं उस जंगल से बाहर नहीं निकल पाया हूं. 

मुझे उंगलियों के सिरे पर कुछ महसूस नहीं होता. इसके चलते मैं बहुत अच्छे से टाइप नहीं कर पाता. अभी मैं धीरे-धीरे लिखता हूं. हमले के बाद से सोना आसान नहीं रहा है. बुरे और डरावने सपने आते हैं. धीरे-धीरे चीजें बेहतर हो रही हैं. 

रुश्दी ने बताया कि मंच पर छुरा घोंपने की उस घटना ने उन्हें इमोशनल ट्रॉमा भी दिया. वो बताते हैं कि PTSD या पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर जैसी कोई चीज होती है.

हमले की क्या कहानी है?

12 अगस्त, 2022. सलमान न्यूयॉर्क में एरी झील के पास चौटाक्वा इंस्टीट्यूट में एक सम्मेलन में स्पीच देने वाले थे. स्टेज पर उनका परिचय दिया जा रहा था कि हादी मतार नाम के युवक ने सलमान रुश्दी की गर्दन पर चाकू से वार किया. हमले में सलमान की जान तो बच गई, लेकिन वो बुरी तरह जख्मी हुए थे. उनकी एक आंख की रोशनी चली गई. एक हाथ काम करना बंद हो गया. अब इंटरव्यू में सलमान ने बताया है,

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बड़ी चोटें ठीक हो गई हैं. मुझे धीरे-धीरे अपने अंगूठे और हथेली का निचला हिस्सा महसूस हो रहा है. हाथ के लिए थेरेपी ले रहा हूं. मैं बेहतर हो रहा हूं. जो हुआ उसके हिसाब से मैं काफी ठीक हूं.

साल 1988 में सलमान रुश्दी के नॉवेल "द सैटेनिक वर्सेज" पब्लिश हुआ था. तब से ही किताब ईरान में प्रतिबंधित है. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसे ईशनिंदा करार दिया था. 1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी ने फतवा जारी किया कि नॉवेल के लेखक और पब्लिशिंग में शामिल लोगों को मार दिया जाए. उस वक्त उनकी हत्या के लिए करीब 24 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. करीब एक दशक तक पुलिस सुरक्षा में रहने के बाद साल 2000 में रुश्दी न्यूयॉर्क जाकर बस गए. धीरे-धीरे सारी सिक्योरिटी भी हटा दी.

रुश्दी से इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या वो सिक्योरिटी हटाने वाले फैसले को गलती मानते हैं. रुश्दी कहते हैं,

मैं खुद से भी यही सवाल पूछता हूं और मुझे इसका जवाब नहीं पता है. एक लेखक के तौर पर मेरे जीवन का तीन-चौथाई हिस्सा फतवे के बाद से शुरू हुआ. आप अपने जीवन पर पछतावा नहीं कर सकते.

इंटरव्यू के बाद रुश्दी ने हमले के बाद की पहली तस्वीर भी ट्विटर पर शेयर की. कैप्शन दिया- मैं वास्तव में ऐसा दिखता हूं. 

मंगलवार, 7 फरवरी को सलमान रुश्दी की नई नॉवेल "विक्ट्री सिटी" पब्लिश होने वाली है. ये किताब उन्होंने हमले से पहले लिखनी शुरू की थी. ये 14वीं शताब्दी की एक महिला की कहानी है जो एक पुरुष-प्रधान समाज को चुनौती देकर शहर की शासक बनती है.

सलमान रुश्दी का जन्म मुंबई में हुआ था. रुश्दी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बॉम्बे में की. आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए. वापस आए तो पाकिस्तान में अपने परिवार के साथ रहने लगे. उनका परिवार पाकिस्तान चला गया था. बाद में वो हमेशा के लिए यूके में ही बस गए. उनका पहला उपन्यास ग्रिमस 1975 में प्रकाशित हुआ था. रुश्दी को उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' के लिए बुकर पुरस्कार मिल चुका है.

वीडियो: हमले के बाद सलमान रुश्दी की आंख की रोशनी गई, हाथ ने भी काम करना बंद किया

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