आइए पहले वो पोस्ट देख लेते हैं फिर आगे बात करते हैं -
कितनी नॉर्मल सी चीज़ है न? लेकिन हम इस पर स्टोरी केवल इसलिए कर रहे हैं क्यूंकि ये नॉर्म्स आजकल इतने ‘नॉट सो कॉमन’ हैं कि ये फोटो लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गई है.

कितनी नॉर्मल सी चीज़ है न? लेकिन हम इस पर स्टोरी केवल इसलिए कर रहे हैं क्यूंकि ये नॉर्म्स आजकल इतने ‘नॉट सो कॉमन’ हैं कि ये फोटो लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गई है.

शाहरुख़ और गौरी के रिश्ते की मिसालें ऐसे ही नहीं दी जाती हैं.होने को कह देने भर से शाहरुख़ 'जोरू के ग़ुलाम' नहीं हो जाते. और 'रिवर्स फेमिनिज्म' में इस कथन को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. क्यूंकि बात बराबरी की होनी चाहिए. लेकिन ये कथन निश्चित तौर पर उनका यानी शाहरुख़ का चुनाव है, किसी दबाव के चलते नहीं.
मैंने निजी तौर पर अनुभव किया है कि जिस घर में महिलाओं की सुनी जाती है, वो घर ज़्यादा संपन्न होते हैं. न न, पैसों से नहीं सुख से. साथ ही मैंने ये भी अनुभव किया है कि जो पुरुष जितने ज़्यादा सफल होते हैं उनके घर पर महिलाओं का उतना ही प्रभुत्व होता है.उरी फिल्म का धांसू ट्रेलर, जिसे देखने के बाद ज़ेहन में कुछ सवाल आए हैं! -