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डॉक्टरों को पीटे जाने पर सैफ ने कहा- 'लोगों का पागलपन अब मुझे नहीं चौंकाता!'

लिबरलिज़्म और राष्ट्रवाद के बदलते मायनों पर सैफ का बयान- ''मैं इन चीज़ों पर अपना खून नहीं जलाता. ये चीज़ें इस लायक नहीं हैं कि मैं इन पर अपना समय खर्च करूं.''

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एक इवेंट के दौरान सैफ और दूसरी ओर फिल्म 'तान्हाजी' के कैरेक्टर में सैफ अली खान.
इंडिया में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या हर दिन बढ़ रही है. अब तक इस इस वायरस से 18000 से ज़्यादा लोग पॉज़िटिव पाए जा चुके हैं. लोगों को इस वायरस से बचाने के लिए डॉक्टर्स दिन रात काम कर रहे हैं. उन्हें अपने परिवारवालों से मिलना भी बमुश्किल नसीब हो पा रहा है. ऐसे में देशभर से लगातार ये खबरें आ रही हैं कि कई जगहों पर डॉक्टरों पर हमले किए जा रहे हैं. क्यों- क्योंकि लोगों को लगता है कि डॉक्टर्स कोरोनावायरस के मरीजों का इलाज कर रहे हैं. ऐसे में वो वायरस डॉक्टरों की मदद से उन तक भी पहुंच सकता है. अलग-अलग जगहों पर डॉक्टरों के साथ मारपीट करने की अपनी वजहें हैं. लेकिन ये खालिस बेवकूफी के अलावा कुछ और नहीं है. क्योंकि डॉक्टर्स ही हैं, जो आपको इस वायरस से बचा सकते हैं. इस मामले पर लोगों के रिएक्शंस आ रहे हैं.
इस मामले में सैफ अली खान ने इंडिया टुडे से बात की है. उन्होंने इंडिया टुडे ई-कॉन्क्लेव में हिस्सा लेते हुए कहा कि लोगों की इस तरह की हरकतें या उनका इस हद तक पागलपन अब उन्हें चौंकाता नहीं है. सैफ ने इस बातचीत में कहा
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''इंडिया एक ऐसा देश है जहां कई तरह की सोच वाले लोग एक साथ रहते हैं. कुछ लोग बहुत प्राचीन सोच रखते हैं, जिन्हें चुड़ैल-डायनों को जला देने में विश्वास है. फिर दूसरी तरह के लोग आते हैं, जो साइंटिफिक तरीके से सोचते हैं. जिनका भरोसा साइंस में है. इंसानों की सोच और समझ बड़ी नाज़ुक होती है. और प्रेशर में वो बिखरने लगती हैं, जिनसे हालात बहुत बिगड़ जाते हैं. ये चीज़ें बद से बदतर हो सकती हैं. लेकिन अगर नहीं हो रहीं, तो इसका क्रेडिट सरकार और लोगों को जाता है, जो इस लॉकडाउन को फॉलो कर रहे हैं. अगर लोग इतने टूट गए हैं वो लोगों को मारने-पीटने लग गए हैं, तो ये चीज़ मुझे चौंकाती नहीं है. इंडिया में लोगों का पागलपन या इस तरह का बर्ताव मेरे लिए सरप्राइज़िंग नहीं है. लेकिन उम्मीद करता हूं, हम में से अधिकतर लोग मानसिक रूप से मजबूत रह सकते हैं.''
फिल्म 'तान्हाजी' के एक सीन में सैफ अली खान.
फिल्म 'तान्हाजी' के एक सीन में सैफ अली खान.

सैफ अली खान आखिरी बार फिल्म 'तान्हाजी' में नज़र आए थे. देशभक्ति और हिंसा से लबरेज उस फिल्म को बहुत पसंद किया गया. लेकिन फिल्म की रिलीज़ के बाद सैफ ने 'तान्हाजी' की पॉलिटिक्स के बारे में बात की, जिसे उन्होंने सही नहीं बताया. इसको लेकर उन्हें बहुत कुछ कहा भी गया. इंडिया टुडे के साथ इस ऑनलाइन इंटरव्यू में जब उनसे लिबरलिज़्म और इंडिया में उसके मायने बदल जाने के बारे में पूछा गया, तो सैफ ने कहा-
''मैंने इस पर ज़्यादा सोचा नहीं है. इस तरह की पॉलिटिक्स से मुझे फर्क नहीं पड़ता. हमेशा एक नई तरह की सोच आती है. राष्ट्रवाद का मतलब समय के साथ बदल जाता है. मैं इन चीज़ों पर अपना खून नहीं जलाता. ये चीज़ें इस लायक नहीं हैं कि मैं इन पर अपना समय खर्च करूं. मैं उम्मीद करता हूं कि इंडिया का कॉन्सेप्ट, जो कि एक सेक्यूलर देश का है, वो बना रहे. बाकी ये मेजॉरिटी तय करेगी कि देश किस दिशा में  जाएगा.''
'तान्हाजी' में सैफ अली खान ने उदयभान राठौड़ का नेगेटिव किरदार निभाया था. उनकी परफॉरमेंस की खूब तारीफ हुई. साथ ही ये फिल्म अजय देवगन और सैफ अली खान दोनों के ही करियर की सबसे सफल फिल्म बन गई. 'तान्हाजी- दी अनसंग वॉरियर' ने कुल 279 करोड़ रुपए की कमाई की. सैफ की आखिरी फिल्म थी 'जवानी जानेमन' जिसमें वो आलिया फर्निचरवाला और तबू के साथ नज़र आए थे.


वीडियो देखें: सैफ अली खान ने पद्मश्री लौटाने की चाहत जताई तो उनके पापा ने मस्त जवाब दिया

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