कोरोना वायरस महामारी की पहली लहर के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में हजारों प्रवासी मजदूर साइकिल से सहारनपुर पहुंचे थे. हाल ही में प्रशासन ने उनकी साइकिलों की नीलामी की. बोली लगने पर ये साइकिल लाखों में बिकीं. बड़ी रकम थी, तो बात भी खूब फैली. प्रशासन पर उंगलियां भी उठने लगीं. मजदूरों की साइकिल से मुनाफा कमाने के आरोप लगने लगे. अब सहारनपुर के डीएम का एक बयान आया है. उन्होंने कहा कि नीलामी से कमाए हुए पैसों को मजदूरों के खातों में भेजने की तैयारी की जा रही है.
सहारनपुर: लॉकडाउन वाली साइकिलों की नीलामी पर उठे सवाल, तो बोले DM- पैसे मजदूरों को ट्रांसफर करेंगे
इस नीलामी की खबर पर काफी बवाल हुआ. विपक्ष के कई नेताओं ने इसे लेकर तमाम तरह के आरोप लगाएं. जिसके बाद सहारनपुुर डीएम ने बयान जारी किया.


डीएम ने बताया है कि मजदूरों से बात करने का प्रयास किया गया था. लेकिन हो नहीं पाई. उन्होंने आगे कहा,
हमने उन्हें (प्रवासी मजदूरों को) संपर्क किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. हम फिर से उन्हें संपर्क करेंगे और उनके बैंक खातों में नीलामी की रकम ट्रांसपर करेंगे.
इससे पहले सहारनपुर के डीएम ने कहा था कि राधा स्वमी सत्संग भवन के कर्मचारियों ने साइकिल छोड़ने वाले सभी मजदूरों का फोन नंबर लिया था. जो साइकिल लेने नहीं पहुंचे, उनको फोन किया गया. मजदूरों का कहना है कि दूर होने के कारण वो साइकिल नहीं ले जा सकते हैं. इस कारण सभी साइकिलों को लावारिस घोषित कर नीलाम किया गया है.
साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी लॉकडाउन के दौरान हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने के लिए मजबूर हुए थे. उन्हें पूरा रास्ता पैदल, रिक्शे या साइकिल से ही तय करना पड़ा था. इसी तरह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से भी हजारों मजदूर सहारनपुर पहुंचे थे. समय ऐसा था कि तीन राज्यों से लगने वाला ये जिला पलायन कर रहे मजदूरों का 'हब' सा बन गया था. सरकार ने इन मजदूरों को बसों से उनके घर भेजने का इंतजाम किया था. इस दौरान जिन मजदूरों के पास साइकिल थीं, उनसे सहारनपुर में ही अपनी साइकिल छोड़ने के लिए कहा गया.
साइकिल नीलामी से मिले थे 21 लाखसहारनपुर के पिलखनी इलाके में स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन में मजदूरों को क्वारंटीन किया गया था. बाद में वहीं से उन्हें बसों के जरिए घर पहुंचाया गया. इस दौरान वहां मजदूरों ने अपनी साइकिल छोड़ी थीं. इन्हें राधा स्वामी सत्संग भवन के एक खाली पड़े प्लॉट में रखा गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन साइकिल की गद्दियों पर लिखे नंबर का टोकन उन मजदूरों को दिया गया था, जिससे वे बाद में आकर अपनी साइकिल ले जा सकें. करीब 25 हजार मजदूर अपनी साइकिल छोड़ गए थे. लॉकडाउन हटने के बाद करीब साढ़े 14 हजार मजदूर अपनी साइकिल ले गए. लेकिन अभी भी वहां 5400 साइकिल रखी हुई हैं. दो साल तक जब इनके मलिक इन्हें लेने के लिए नहीं आए, तो प्रशासन ने इन्हें नीलामी में बेचने का फैसला किया.
जिला प्रशासन ने 5400 साइकिलों को नीलाम करने का नोटिस निकाला. बोली में 250 ठेकेदार शामिल हुए. 15 लाख रुपये से बोली शुरू हुई और 21 लाख 20 हजार रुपये पर जाकर रुकी.
इस नीलामी की खबर पर काफी बवाल हुआ. विपक्ष के कई नेताओं ने इसे लेकर तमाम तरह के आरोप लगाएं. इसके बाद सहारनपुुर डीएम ने बयान जारी किया.
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