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मालेगांव केस: साध्वी प्रज्ञा को मुंबई की कोर्ट में पेश होना था, लेकिन नहीं जा पाईं

19 दिसंबर यानी आज सुनवाई थी.

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प्रज्ञा ठाकुर के वकील का कहना है कि वे रेग्युलर चेकअप के लिए दिल्ली गई थीं. लेकिन डॉक्टरों ने कह दिया कि एडमिट करना होगा. (फाइल फोटो- PTI)
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से BJP सांसद. 2008  मालेगांव केस में आरोपी. 19 दिसंबर को मुंबई की अदालत में केस की अगली सुनवाई होनी थी. लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले पता चला कि प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत ठीक नहीं है और वो एम्स-दिल्ली में एडमिट हैं. इसलिए सुनवाई में नहीं जा पाएंगी. मुंबई की ट्रायल कोर्ट ने प्रज्ञा और अन्य आरोपियों को सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के लिए कहा था. इस महीने की शुरुआत में भी सभी आरोपियों को कोर्ट के सामने हाजिर होने के लिए कहा था. तभी भी चार आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे थे. इनमें प्रज्ञा ठाकुर के अलावा रमेश उपाध्याय, सुधाकर द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी के नाम थे. इन आरोपियों के वकील ने तब कोर्ट से कहा था कि कोविड काल में इतने शॉर्ट नोटिस पर एक राज्य से दूसरे राज्य आना संभव नहीं हो पा रहा था, इसलिए ये लोग नहीं आ सके. इसी के बाद कोर्ट ने 19 दिसंबर की तारीख़ दी थी. लेकिन प्रज्ञा ठाकुर इस तारीख़ पर भी नहीं पहुंच सकीं. उनके वकील जेपी मिश्रा ने कोर्ट में कहा –
“साध्वी जी का दो दिन के लिए मुंबई आना तय हो गया था. 18 और 19 दिसंबर को वो यहां रुकने वाली थीं. एयरपोर्ट के पास स्टेट गेस्ट हाउस में रूम भी बुक हो गए थे. लेकिन उनकी एम्स-दिल्ली में रेग्युलर चेकअप की अपॉइंटमेंट भी थी. जब वे वहां गईं तो डॉक्टरों ने कहा कि एडमिट करना पड़ेगा.”
हालांकि वकील ने ये नहीं बताया कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को दिक्कत क्या है. मालेगांव ब्लास्ट महाराष्ट्र में ही एक जगह है- मालेगांव. मुंबई से करीब 270 किमी दूर. 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास बम विस्फोट हुआ था. छह लोगों की मौत हुई थी, करीब सौ लोग घायल हुए थे. हफ्ते भर में दूसरी सुर्खी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर हफ्ते भर में दूसरी बार सुर्खियों में हैं. अभी बीते 13 दिसंबर को उन्होंने मध्य प्रदेश के सीहोर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि –
“हमारे धर्मशास्त्रों में समाज की व्यवस्था के लिए चार वर्ग तय किये गए थे. क्षत्रिय को क्षत्रिय कह दो,बुरा नहीं लगता. ब्राह्मण को ब्राह्मण कह दो,बुरा नहीं लगता. वैश्य को वैश्य कह दो, बुरा नहीं लगता. शूद्र को शूद्र कह दो, बुरा लग जाता है. कारण क्या है? क्योंकि नासमझी है. क्योंकि समझ नहीं पाते.”
भोपाल की बीजेपी सांसद के इस बयान पर काफी बवाल भी हुआ था.

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