चांद वही है,तारे वही हैं. तेरे बिस्तर पर तेरी मां वही है. पापा वही हैं.. तकिया वही है, चादर वही है पर, मेरे साथ आज मेरे लाल तू नहीं है. तेरे खिलौने देखूं. तेरी कार देखूंपर मेरे चांद तेरे चेहरा मैं आज कैसे देखूं. छूटा था इन सबको कल तक अपने हाथों से, यही सोच आज इन्हें गले से लगा रही हूं. आंखें बंद करूं तो तू दिखे आंखें खोलूं तो ओझल हो जाए. एक वक्त तूने जाते वक्त मां पुकारा तो होगा. काश! मैं तेरे साथ होती. काश आज तू मेरे पास होता. काश! काश! काश! - मां
ये कविता उस मां ने लिखी है, जिसने अपना बेटा खोया है
तकिया वही है, चादर वही है. पर मेरे साथ आज मेरे लाल तू नहीं है.
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फोटो - thelallantop
दिल्ली के वसंतकुंज में रेयान इंटरनेशनल स्कूल है. दिव्यांश घर से स्कूल गया था लेकिन वापिस लौटा नहीं.पानी की टंकी में उसकी लाश मिली. वो वहां कैसे पहुंचाय़ किसी को नहीं पता. ये खबर डराती है. उन सबको जिनके बच्चे हैं. जो स्कूल जाते हैं. अब बहस चल रही है. लोग स्कूल को ब्लेम कर रहे हैं. बातें आ रही हैं कि टैंक के पास बोर्ड नहीं लगा था. पुलिस को भी स्कूल की बजाय अस्पताल से एक्सीडेंट की खबर मिली थी. इस सबके बीच उस मां ने कुछ लिखा है जिसने अपना बेटा खोया है.
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