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रिपोर्ट बताती है कि इस साल 16 लाख नौकरियां और कम होंगी

इस बार बेरोजगारों की भीड़ और बढ़ेगी

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जब NCRB के आंकड़े कह रहे हैं कि पिछले साल हर महीने डेढ़ हज़ार बेरोज़गार युवाओं ने आत्महत्या कर ली तब नौकरियों की ये रिपोर्ट वाक़ई डराने वाला है

इकनॉमी के मोर्चे पर केंद्र सरकार लगातार सवालों से घिरी रही है. कभी आंकड़े सरकार के पक्ष में आते हैं, तो कभी कोई रिपोर्ट सरकार की नीतियों पर सवाल उठा देती है. ऐसी ही एक रिपोर्ट आई है, जिससे न सिर्फ़ सरकार के खर्चे-पानी, बल्कि युवाओं के रोज़गार पर बड़ा सवाल उठ रहा है. चालू वित्त वर्ष (2019-20) में नई नौकरियों के अवसर एक साल पहले की तुलना में कम पैदा हुए हैं. लगभग 16 लाख नौकरियां कम होने की बात कहती ये रिपोर्ट चर्चा में है.

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# क्या है रिपोर्ट में

SBI रिसर्च की रिपोर्ट. इसके हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2019-20 में इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में नौकरियां कम हुई हैं. कितनी कम? अनुमान है कि इस साल कम से कम 16 लाख नई नौकरियों में कमी आएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे.

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में 89.7 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हुए थे. चालू वित्त वर्ष में इसमें 15.8 लाख की कमी आने का अनुमान है. ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं. इनमें वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये मासिक होती है.

# बात ख़तरे की क्यों है?

'ब्लूमबर्ग' के मुताबिक़, देश में बेरोज़गारी दर पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा है. केंद्र सरकार ख़ुद भी पिछले एक दशक की सबसे कम विकास दर से जूझ रही है. ऐसे में घटते रोज़गार के अवसर सरकार पर दबाव और बढ़ाएंगे. ये भी तब है जब अभी हालिया NCRB के आंकड़े आए हैं. इन आंकड़ों के हिसाब से साल 2018 में 12 हज़ार से ज़्यादा बेरोज़गारों ने आत्महत्या कर ली. ज़ाहिर सी बात है कि जब इस तरह के डरावने आंकड़े सामने आ रहे हैं, तो ऐसे में SBI रिसर्च की ये रिपोर्ट सरकार के सामने और मुश्किलें खड़ी करेगी.

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# सरकारी नौकरियों में भी आएगी कमी

रिपोर्ट ये भी कह रही है कि घर भेजे जाने वाले धन में कमी आई है. कहां से घर भेजे जाने वाले धन में? असम, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी-मजदूरी के लिए बाहर गए लोगों की ओर से भेजे जाने वाले पैसे में कमी. रिपोर्ट कह रही है कि काम में कमी आने की वजह से लोग घर पैसे नहीं भेज पा रहे हैं. रिसर्च का मानना है कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की संख्या कम हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार के एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) की श्रेणी के आंकड़ों के रुझान भी इशारा कर रहे हैं. राज्य और केंद्र सरकार में मौजूदा रुझानों के अनुसार 2018-19 की तुलना में चालू वित्त वर्ष में 39,000 कम अवसर पैदा होने का अनुमान है. ये सरकारी नौकरियां हैं, जिनमें कमी की बात रिपोर्ट में कही जा रही है.


वीडियो देखें:

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