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भगवान बुद्ध की मूर्ति तोड़ते मुस्लिमों की इस तस्वीर की हकीकत क्या है?

रोहिंग्या मुसलमानों से इसका क्या लिंक है, ये भी जान लीजिए.

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भगवान बुद्ध की बताई जा रही ये मूर्ति असल में उनकी है ही नहीं.
रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा देश-विदेश में छाया हुआ है. देश-विदेश में छाया है तो सोशल मीडिया इससे कैसे बच सकता है. रोहिंग्या को देश में रहने में देना चाहिए या नहीं. यह मामला कोर्ट में है. मगर कुछ लोग सोशल मीडिया पर खुदै कचहरी लगाके बैठ गए हैं. लड़े-मरे जा रहे हैं. तो कुछ लोग लड़वाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. हर बार की तरह एक पुरानी फोटो खोज लाए हैं. नए कैप्शन के साथ इसे शेयर किया जा रहा है. कहा जा रहा है- लखनऊ में रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में भारतीय मुसलमानों ने बुद्ध की मूर्ति तोड़ी. इस पोस्ट पर कमेंट पढ़के तो हमारी आंखें तर हो गई हैं. जो गालियों की बौछार हुई है कि का बताएं. पहले फोटो देखो और समझो-

अपील की जा रही है कि इस फोटो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें. हिंदू भाइयों को तो मां-बहन की कसमें खिलवा के इसे शेयर करवाया जा रहा है. अपील काम भी आ रही है, काहे से 9000 से ज्यादा लोग इसे शेयर कर चुके हैं. उन 9000 पोस्टों को ना जाने कितने हजारों लोगों ने शेयर किया होगा. I Support Yogi Adityanath नाम के एक पेज से ये फोटो 24 अक्टूबर को डाली गई है. पोस्ट वायरल हो गई है. शुक्र की बात ये है कि अभी कोई लाठी-डंडा लेकर नहीं निकला है. फेसबुक पर ही धर्म और देश बचाने के लिए पोस्टबाजी हो रही है.
फोटो शेयर करने से पहले असलियत भी जान लीजिए
अब इस फोटो की हकीकत जान लेते हैं. वैसे तो फोटो देखकर मामला ताजा ही लगता है. ऊपर से रोहिंग्या मुद्दे से इसे जोड़ना ये साफ करता है कि इसे नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया. मगर आपको बता दें कि ये फोटो बहुत पुराना है. 17 अगस्त 2012 का. फोटो फेक नहीं है. मामला भी लखनऊ का ही है. मगर मूर्ति भगवान बुद्ध की नहीं बल्कि भगवान महावीर की है. ये सच है कि मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी. रमजान के महीने में अलविदा की नमाज के बाद करीब 2000 मुस्लिमों के एक झुंड ने इस मूर्ति पर अटैक किया था. मूर्ति महावीर पार्क में लगी थी. उनका विरोध म्यांमार और असम में हो रही मुस्लिमों की हत्याओं से था. पुलिस पर भी आरोप लगे थे कि वो मूकदर्शक बनी देखती रही और उसने बवालियों को रोकने में देरी की. पत्रकारों पर भी हमला हुआ था. बाद में मूर्ति को ठीक करवा दिया गया था.
रोहिंग्या मुस्लिमों की हालत से अनजान लोग गलत पोस्ट शेयर करने से पहले क्रॉस चेक भी नहीं करते.
रोहिंग्या मुस्लिमों की हालत से अनजान लोग गलत पोस्ट शेयर करने से पहले क्रॉस चेक भी नहीं करते.

इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. ये खतरनाक रवैया है. मगर इससे भी ज्यादा खतरनाक है इस फोटो का दोबारा शेयर होना. नए कलेवर में. मकसद साफ तौर पर लोगों को भड़काना और नफरत पैदा करना है. रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर लोगों को गलत दिशा में ले जाने की साजिश है ये. अगर इस देश में कोई साइबर क्राइम जैसी चीज है तो वो ये ही है. पुलिस की साइबर क्राइम विंग को इस पोस्ट को डालने वाले के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.


एक और वायरल फोटो की हकीकत जानिए इस वीडियो में - 
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