गुरुग्राम में बत्ती गुल है. घरों में पानी नहीं आ रहा. Wi-Fi बंद है और इन्वर्टर भी जवाब दे चुके हैं. दूसरी तरफ, फैक्ट्रियों में मशीनें रुक रही हैं. साइबर सिटी कहे जाने वाले गुरुग्राम में बिजली संकट ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर ब्रेक लगा दी है.
हरियाणा में बिजली संकट, गुरुग्राम की रफ्तार पर ब्रेक, कई शहरों में जनजीवन ठप
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में बिजली संकट गहरा गया है. करीब 10 लाख उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं. कर्मचारी निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने का विरोध कर रहे हैं. जनजीवन पूरी तरह से ठप है.

ये परेशानी सिर्फ गुरुग्राम तक सीमित नहीं है. फरीदाबाद और नूंह में भी लोग बिजली कटौती से परेशान हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हड़ताल की वजह से हरियाणा में करीब 10 लाख बिजली उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं. गुरुग्राम में कुछ जगहों पर 16 घंटे से ज्यादा बिजली गुल रही और करीब 1,800 इंडस्ट्रियल यूनिट में कामकाज प्रभावित हुआ.
बिजली कटौती की करीब 5,500 शिकायतेंइंडिया टुडे से जुड़े नीरज वशिष्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम यानी DHBVN को बिजली कटौती की करीब 5,500 शिकायतें मिलीं. सेक्टर-2, अशोक विहार, सेक्टर-5, पालम विहार, सेक्टर-23, राजेंद्र पार्क और सेक्टर-105 समेत कई इलाकों से बिजली गुल होने की शिकायतें आईं. बिजली नहीं होने से पानी की मोटरें नहीं चलीं. घरों में पानी का संकट खड़ा हो गया. वर्क फ्रॉम होम करने वालों को भी परेशानी हुई. बिजली कटौती से परेशान कुछ लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर प्रदर्शन भी किया.
हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष मोर्चे ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. कर्मचारी हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन यानी HERC के एक फैसले का विरोध कर रहे हैं. इस फैसले के तहत निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए बिजली बांटने का लाइसेंस दिया गया है. यानी अब इन इलाकों में सरकारी बिजली कंपनी के साथ एक निजी कंपनी को भी बिजली सप्लाई करने की अनुमति मिली है.
प्राइवेट कंपनियों को लाइसेंस देने का विरोधहरियाणा में बिजली वितरण का काम मुख्य रूप से सरकारी कंपनियां करती हैं. दक्षिण हरियाणा में ये जिम्मेदारी DHBVN की है. कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी को लाइसेंस देना बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में कदम है. उन्हें डर है कि इससे सरकारी कंपनी की भूमिका कमजोर होगी और कर्मचारियों की नौकरियों और अधिकारों पर असर पड़ सकता है. इसलिए उनकी मांग है कि निजी कंपनी का लाइसेंस वापस लिया जाए.
उधर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है. सरकार का कहना है कि वो HERC के फैसले को कानूनी तरीके से चुनौती देगी. इसके लिए मामला Appellate Tribunal for Electricity यानी APTEL के सामने ले जाने की तैयारी है. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा है कि सरकार इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी. यानी सरकार कानूनी रास्ते से फैसले को चुनौती देना चाहती है. दूसरी ओर कर्मचारी लाइसेंस वापस लेने की मांग पर अड़े हैं.
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हड़ताल का असर इतना बड़ा कैसे हो गया?हड़ताल का ऐलान पहले से था. गुरुग्राम प्रशासन ने अधिकारियों को वैकल्पिक इंतजाम करने और अस्पतालों, पानी की सप्लाई और मेट्रो जैसी जरूरी सेवाओं पर खास ध्यान देने के निर्देश दिए थे. बिजली की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने को भी कहा गया था. इसके बावजूद कई इलाकों में बिजली की खराबी ठीक करने में देरी हुई. कर्मचारियों की हड़ताल के बीच मरम्मत के काम पर असर पड़ा और लोगों की परेशानी बढ़ती गई.
इस पूरे मामले में तीन पक्ष हैं. बिजली कर्मचारी, जो निजी कंपनी को मिला लाइसेंस वापस चाहते हैं. सरकार, जो कानूनी चुनौती देने की बात कह रही है. तीसरा पक्ष है आम जनता, जिन्हें बिजली और पानी की जरूरत है. इनका रोजमर्रा का कामकाज ठप हो रहा है.
फिलहाल हड़ताल जारी है और बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं. कर्मचारियों ने 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया है. अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच कोई समझौता होता है या आंदोलन आगे बढ़ता है.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में बिजली सप्लाई कब सामान्य होगी? क्योंकि साइबर सिटी की रफ्तार तभी चलेगी, जब घरों में बिजली होगी, पानी आएगा और फैक्ट्रियों में मशीनें चलेंगी.
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