The Lallantop

टाइपिंग की किस गलती ने रफाएल सौदे पर मोदी सरकार की टेंशन बढ़ा दी है?

कहते हैं कि एक नुक्ते के फेर में खुदा जुदा हो जाता है.

Advertisement
post-main-image
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक दूरसंचार मंत्रालय की लापरवाही से सरकारी खजाने को 560 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

कहते हैं कि एक नुक्ते के फेर में खुदा, जुदा हो जाता है. मसलन 'जवाहल लाल नेहरु देश के प्रधानमंत्री हैं.' और ' जवाहर लाल नेहरु देश के प्रधानमंत्री थे.' में काल बदल जाता है. एक शब्द के हेर-फेर में हम 55 साल का लंबा सफ़र तय कर लेते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ है सुप्रीम कोर्ट के रफाएल पर दिए गए फैसले के साथ. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रफाएल सौदे में सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ है. ऐसे में जांच की जरूरत नहीं है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी बैकफुट पर थी. इस फैसले के आने के साथ ही उसने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया. अमित शाह ने 14 दिसंबर को प्रेस वार्ता की. वो राहुल गांधी पर गरजे. इसके बाद तो बीजेपी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की झड़ी लग गई. इधर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सकते में थी. पिछले तीन महीने से राहुल गांधी रफाएल सौदे पर बीजेपी को घेरे हुए थे. लोकसभा का शीतकालीन सत्र भी रफाएल सौदे की वजह से हंगामाखेज रहने की उम्मीद थी. सुप्रीम कोर्ट का फैसला वो ढाल थी जिसे भेद पाना मुश्किल था.

शाम होते-होते कांग्रेस संभलती दिखाई दी. जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने पूरे फैसले के एक नुक्ते से पकड़कर इसे उधेड़ डाला. यह नुक्ता फैसले के पेज नंबर 21 पर दर्ज था. इसमें दर्ज था, "राफेल विमान की कीमतों की डिटेल CAG के साथ साझा की जा चुकी है. और लोक लेखा समिति (PAC) ने इस रिपोर्ट की जांच-परख कर ली है." पहले भूषण और बाद में कांग्रेस ने इसी बात पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया.

Advertisement

प्रशांत भूषण राफेल मामले में याचिकाकर्ता भी हैं.
प्रशांत भूषण राफेल मामले में याचिकाकर्ता भी हैं.

क्या होती है PAC और कहां फंसा है पेच

PAC या लोक लेखा समिति सरकारी खर्च की जांच रखने वाली समिति है. भारत के महालेखा परीक्षक या CAG के द्वारा पेश किए गए ब्योरों की जांच का काम करती है. CAG वो संस्था है वो सरकार के खर्च, वित्तीय समझौतों की जांच करती है. PAC में कुल 22 सदस्य होते हैं. 15 लोकसभा के और 7 राज्यसभा के. कायदे से सदन में नेता प्रतिपक्ष इस समिति के अध्यक्ष होते हैं. इस बार के लोकसभा चुनाव में दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस के पास सदन के 10 फीसदी सदस्य भी नहीं थे. ऐसे में कोई भी नेता प्रतिपक्ष लोकसभा में नहीं है. ऐसे में लोकसभा में कांग्रेस के अगुवा मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी दी गई है.

शाम ढलते-ढलते खड़गे रफाएल मामले में मीडिया के सामने आ गए. उन्होंने कहा कि वो PAC के अध्यक्ष हैं. अब तक उनके पास रफाएल सौदे पर CAG की तरफ से कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई. ऐसे में रिपोर्ट की जांच करने का कोई सवाल ही नहीं उठता. इसके बाद कांग्रेस ने सरकार के ऊपर जवाबी हमला बोल दिया. कांग्रेस का कहना था कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले में गुमराह किया गया है. बस यही बात फिलहाल बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने सबसे बड़े सरकारी वकील या अटर्नी जनरल को संसद में तलब करने का प्रस्ताव भी राज्यसभा में रख दिया.

Advertisement

मल्लिकार्जुन खडगे राफेल मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए.
मल्लिकार्जुन खड़गे रफाएल मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए.

सरकार की सफाई

इधर सरकार की तरफ इस मामले में सफाई भी आ गई है. सरकार का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट में पहले ही बता चुकी है कि रफाएल सौदे की जांच CAG कर रहा है. जल्द ही यह रिपोर्ट PAC के सामने पेश कर दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में एक लाइन में टाइपिंग की गलती रह गई है. इसे कायदे से इसे 'CAG की पेश की गई रिपोर्ट की जांच PAC द्वारा की जाएगी.' पढ़ा जाना चाहिए. कांग्रेस फिलहाल सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं है. मामले में बवाल जारी है.



राजस्थान विधानसभा चुनाव: इस जनादेश से कांग्रेस को क्या सबक सीखने चाहिए?

Advertisement