क्या है पूरा मामला एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच के सामने रक्षा मंत्रालय से कागजात चोरी होने की बात कही. उन्होंने कहा कि 'द हिंदू' और 'एएनआई' ने अपनी रिपोर्ट में एक सरकारी दस्तावेज दिखाया था. यह सरकारी दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गया है. कोर्ट में इन्हीं दस्तावेजों को सरकार के खिलाफ साक्ष्य बनाकर पेश किया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि चोरी के दस्तावेजों को साक्ष्य नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि विपक्षी पार्टी यह भी बताए कि ये दस्तावेज मिले कहां से. दस्तावेज छापने वाले पब्लिकेशन्स के बारे में भी बोले. कहा कि इस तरह से सरकारी दस्तावेज को सार्वजनिक करना ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत अपराध है. सरकार इन दोनों पब्लिकेशन्स के खिलाफ केस करने पर विचार कर रही है. हालांकि अभी तक सरकार ने कोई FIR नहीं की है.

एटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया - के के वेणुगोपाल
वेणुगोपाल को उनके सवालों पर बेंच ने लताड़ा बेंच ने कहा कि क्या भ्रष्टाचार के अपराध में भी आप राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ लेंगे? जस्टिस जोसेफ ने कहा कि दस्तावेज भले ही चोरी का हो, अगर सही है तो उसे साक्ष्य माना जाएगा. आप साक्ष्य जुटाने के तरीके का बहाना लेकर ये नहीं कह सकते कि उसे साक्ष्य नहीं माना जा सकता. क्या नेशनल सिक्योरिटी की आड़ में भ्रष्टाचार करने की आजादी होनी चाहिए? पब्लिकेशन्स पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने वेणुगोपाल से पूछा कि खबर 8 फरवरी को छपी थी. अभी तक चोरी की कोई FIR भी नहीं की गई है. आप अभी तक क्या कर रहे थे?

(बाएं से) चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया - रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ
क्या कहा विपक्षी पार्टी के वकील प्रशांत भूषण ने एटॉर्नी जनरल के सवालों के जवाब में वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि दस्तावेज एक 'व्हिसलब्लोअर' ने दिए हैं. व्हिसलब्लोअर मतलब वो लोग जो जनता के हित में सच्चाई सामने लाने का, भ्रष्टाचार की पोल खोलने का काम करते हैं. इसलिए दस्तावेज कैसे जुटाए गए यह न तो बताया जाएगा और न ही पूछा जा सकता है.
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