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राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने फिर क्यों डांट दिया?

और क्यों राहुल गांधी को कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी?

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राहुल गांधी ने पहली बार चौकीदार चोर है नारे पर सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है.
30 अप्रैल, 2019. कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने डांट दिया. वजह उनका एक बयान है. राहुल गांधी अपने चुनावी कैंपेन में नारा देते रहते हैं कि चौकीदार ही चोर है. जब सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को राफेल में पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली, तो राहुल गांधी ने कहा था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार ही चोर है.
लेकिन गरारी यहीं पर अटक गई. सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ पुनर्विचार याचिका स्वीकार की थी. कोर्ट ने कभी ये नहीं कहा था कि चौकीदार ही चोर है. इसके बाद बीजेपी नेता और सांसद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का केस दाखिल कर दिया. राहुल गांधी ने 22 अप्रैल को अपना जवाब दाखिल किया और कहा कि उनका मकसद सुप्रीम कोर्ट का अपमान करना नहीं था. 26 पेज के हलफनामे में राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें फैसले की पूरी जानकारी नहीं थी. राहुल गांधी ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि मुझे अपनी टिप्पणी पर खेद है और मेरे बयान को सुप्रीम कोर्ट का बयान न माना जाए.
मीनाक्षी लेखी (दाएं) ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का केस किया था.
मीनाक्षी लेखी (दाएं) ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का केस किया था.

फिर इस मामले की सुनवाई हुई 29 अप्रैल को. 29 अप्रैल को भी राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया. ये हलफनामा 28 पन्नों का था. इसमें भी राहुल गांधी ने अपने बयान पर खेद जताया. एफिडेविट में राहुल गांधी की ओर से लिखा गया था कि चुनाव प्रचार के दौरान जोश में आकर उनके मुंह से निकल गया था कि अब तो कोर्ट ने भी मान लिया कि चौकीदार चोर है, लेकिन वो बयान देते वक्त मैंने आदेश की कॉपी नहीं देखी थी. राहुल ने एफिडेविट के हवाले से लिखा कि अदालत के लिए मेरे मन में सम्मान है और इस बयान के लिए खेद है. और राहुल गांधी की ओर से इस हलफनामे में खेद शब्द को ब्रैकेट में लिखा गया था.
फिर तारीख आई 30 अप्रैल, 2019. एक बार फिर से कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की सुनवाई शुरू हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने राहुल गांधी के वकील से पूछा कि खेद जताने के लिए ब्रैकेट का इस्तेमाल क्यों किया गया. क्या खेद जताने के लिए 22 पन्नों का एफिडेविट दिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पहली बार राहुल गांधी की ओर से माफी मांगी. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा-
''राहुल गांधी अपनी गलती मानते हैं और वो इसके लिए माफी मांगते हैं.''
राहुल गांधी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की और फिर माफी मांगी.
राहुल गांधी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की और फिर माफी मांगी.

लेकिन कोर्ट में जुबानी जमा खर्च से काम नहीं चलता. हलफनामा देना पड़ता है. और इस हलफनामे के लिए कांग्रेस को और वक्त चाहिए था. राहुल के वकील सिंघवी ने कोर्ट से अंतिम हलफनामा दाखिल करने का वक्त मांगा और कहा कि हम एक और हलफनामा दाखिल करेंगे और उसमें माफी शब्द का इस्तेमाल करेंगे. फिर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने 6 मई 2019 से पहले इस हलफनामे को फाइल करने को कहा. कोर्ट ने साथ में ये भी कहा कि उसी वक्त तय किया जाएगा कि हलफनामे को स्वीकार करना है या नहीं.
लेकिन अब मामला फिर से राजनीतिक हो गया है. बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर है और कांग्रेस अब भी उस बात पर अड़ी है कि राफेल में घोटाला हुआ है. लेकिन असल में हुआ क्या है, ये तय करना कोर्ट का काम है.


 

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