मुहम्मद हाजी सादिक़ ने 30 सालों तक कार्डिफ़ मदीना मस्जिद में इस्लाम की तालीम दी और इस दौरान सज़ा के नाम पर चार बच्चियों को सेक्शुअली हैरेस किया. कोर्ट ने इस आरोप को सही पाने के बाद उसे सजा सुनाई है.
ब्रिटिश पुलिस का कहना है कि ये मौलवी 5 से 11 साल की लड़कियों को अपने बगल में बिठाता था और उन्हें गलत तरीके से छूता था. डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद की बच्चियां हाजी सादिक को अंकल कहा करती थीं. लेकिन ये मौलवी उन्हें छूता, उनके कपड़ों में हाथ डालता, और उन्हें अपने टांगों और जांघों से रगड़ता. मदीना मस्जिद में मोहम्मद हाजी सादिक 36 सालों से बच्चों को कुरान पढ़ना सिखा रहा था.
कार्डिफ क्राउन कोर्ट में पुलिस ने बताया कि सादिक के पास लोहे और लकड़ी की छड़ी थी. इसका इस्तेमाल वो बच्चों को पढ़ाने के दौरान पिटाई के लिए करता था. बच्चियों को सेक्शुअली हैरेस करने का ये सिलसिला 1996 से 2006 के बीच यानी पूरे 10 सालों तक चला.

मुहम्मद हाजी सादिक
सरकारी वकील सुजेन थॉमस ने लड़कियों के खौफनाक अनुभव कोर्ट में बताए.
एक लड़की का कहना है, 'मैं रात को डर जाती थी, मुझे डरावने ख्वाब आते थे, मैं खुद को महफूज़ महसूस नहीं करती थी.'ब्रिटिश कोर्ट ने सादिक को 13 साल की तो सजा सुनाई ही, साथ ही उसे अनिश्चितकाल के लिए यौन अपराधी के तौर पर रजिस्टर कर लिया. इस केस में कोर्ट ने शिकायत दर्ज कराने वाली चारों लड़कियों की तारीफ की है. कहा कि इन लड़कियों ने बहादुरी दिखाई है. और दोषी को सजा दिलाने के लिए किसी भी चुनौती की परवाह नहीं की.
एक दूसरी लड़की ने बताया, 'मुझे लगता था कि मेरे जिस्म पर मेरा हक नहीं है. जहां मुझे खुद को महसूस करना चाहिए था, वहां मैं खुद को डरा हुआ महसूस करती थी, मोहम्मद सादिक ने मुझे मेरे धर्म से दूर कर दिया था.'
इस स्टोरी को पढ़वाने पर कुछ लोग ये एतराज़ जता सकते हैं कि ये मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश है. लेकिन ये कोई साजिश नहीं. बल्कि आंख पर पड़े उस पर्दे को उठाने की कोशिश है, जो हम मान लेते हैं कि बच्चे मदरसे में सेफ हैं. क्योंकि धर्म वो पर्दा बनके हमारी आंखों पर पड़ जाता है, जिसकी वजह से हम शक भी नहीं करते. मैंने खुद देखा है बच्चों को छड़ी से पिटते हुए. और कई ऐसे किस्से भी सुने, जब मौलवी ने सिर्फ लड़कियों को ही नहीं बल्कि लड़कों को भी पढ़ाने के बहाने सेक्शुअली हैरेस किया हो. गलत को गलत की नजर से ही देखा जाना चाहिए. सिर्फ ये सोचके बचाव नहीं करना चाहिए कि वो मौलवी है या मदरसे से जुड़ा मामला.
मौलवी समझ के छोड़ देना ही ऐसे लोगों को जुर्म करने में मदद करता है. इसी का फायदा उठाते हैं ऐसे लोग और बच्चे खौफ की वजह से घर में वो बात भी नहीं बता पाते, जो उनके साथ होता है. बच्चों को अच्छे बुरे-छूने के तरीकों को ज़रूर ही बताया जाना चाहिए. ताकि ऐसी नौबत न आए.
























