“Now I am become Death, the destroyer of worlds". यानी “अब मैं मृत्यु बन गया हूं, दुनिया का विनाशक.”
रूस ने 'सबसे ताकतवर' न्यूक्लियर मिसाइल Sarmat बना ली, एकसाथ कितने वॉरहेड ले जाएगी?
मंगलवार, 13 मई को पुतिन ने ऐलान किया कि रूस इस साल के अंत तक Sarmat मिसाइल को पूरी तरह तैनात कर देगा. उन्होंने रूस के टॉप सैन्य अधिकारियों के साथ टीवी पर प्रसारित एक बैठक की. उसी दौरान इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बारे में ऐलान किया.


16 जुलाई, 1945 को न्यूक्लियर बम के जनक कहे जाने वाले ओपनहाइमर ने ये बात कही थी. आज इसकी याद यूं आई कि दुनिया परमाणु बम बनाने या उसे लॉन्च करने की होड़ में एक कदम और आगे बढ़ गई है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु क्षमता वाले नए मिसाइल सिस्टम Sarmat के बारे में दुनिया को बता दिया है. पुतिन ने इसे ‘दुनिया की सबसे ताकतवर’ मिसाइल बताया है.
मंगलवार, 13 मई को पुतिन ने ऐलान किया कि रूस इस साल के अंत तक Sarmat मिसाइल को पूरी तरह तैनात कर देगा. उन्होंने रूस के टॉप सैन्य अधिकारियों के साथ टीवी पर प्रसारित एक बैठक की. उसी दौरान इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बारे में ऐलान किया. उनके इस कदम को दुनियाभर में फैली अशांति और तनाव के बीच हथियारों की ताकत दिखाने की एक और कोशिश माना जा रहा है.
Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने दावा किया कि Sarmat मिसाइल में लगे न्यूक्लियर वॉरहेड्स की कुल ताकत पश्चिमी देशों की किसी भी मिसाइल से चार गुना ज्यादा है. आसान शब्दों में कहें तो, रूस ये मैसेज देना चाहता है कि उसका नया मिसाइल सिस्टम अमेरिका और NATO देशों की मौजूदा रणनीतिक मिसाइलों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और खतरनाक है. इसे 'Satan II' भी कहा जा रहा है.
Sarmat मिसाइल की खासियत
- मिसाइल और उनके सिस्टम को लेकर नजर रखने वाले अमेरिकी NGO डिफेंस एडवोकेसी अलायंस का कहना है कि सारमैट इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल की अनुमानित रेंज 10,000 किलोमीटर से ज्यादा है. यानी इसकी पहुंच पश्चिमी देशों तक है.
- पुतिन का तो ये भी दावा है कि इसकी रेंज 35,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है.
- ये एक साथ 16 न्यूक्लियर वॉरहेड्स ले जा सकता है जो एक ही वक्त में अलग-अलग लक्ष्यों पर अटैक करने में सक्षम हैं.
- ये मिसाइल लगभग 10 मीट्रिक टन तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है.

रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर Sergey Karakayev ने बैठक के दौरान पुतिन को हथियार के सफल परीक्षण की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सारमैट मिसाइल से लैस पहली रेजिमेंट को साल के अंत तक रूस के क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र में कॉम्बैट ड्यूटी पर तैनात कर दिया जाएगा. यानी ये मिसाइल अब सिर्फ परीक्षण स्तर पर नहीं रहेगी, बल्कि सेना की सक्रिय तैनाती का हिस्सा बनेगी.
मिसाइल विशेषज्ञ Pavel Podvig के अनुसार, हालिया लॉन्च इस मिसाइल का सिर्फ दूसरा सफल परीक्षण था. उनके मुताबिक 2022 के बाद बीच के समय में कम-से-कम दो परीक्षण असफल भी रहे. उन्होंने कहा, ‘यह एक राजनीतिक निवेश है.’
उनका दावा है कि रूस इस मिसाइल प्रोग्राम का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक और वैश्विक ताकत दिखाने के लिए ज्यादा कर रहा है. पावेल ने ये भी कहा कि सैन्य दृष्टि से यह मिसाइल दुनिया में न्यूक्लियर डेटरेंस पॉलिसी को बहुत ज्यादा नहीं बदलेगी. यानी विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि पुतिन के बड़े दावों के बावजूद Sarmat से वैश्विक न्यूक्लियर बैलेंस में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आने वाला.
इन मिसाइलों का भी जिक्र
बैठक के दौरान पुतिन ने रूस के कई और हथियारों और हथियार प्रणालियों का नाम लिया. उनके बारे में भी जानिए:
1. Avangard हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम — एक हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम, जो बहुत तेज़ रफ्तार से उड़ सकता है और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए बनाया गया है.
2. Kinzhal हाइपरसोनिक मिसाइल — हवा से लॉन्च की जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है.
3. Oreshnik मिसाइल सिस्टम — मीडियम रेंज मिसाइल सिस्टम है.
4. Poseidon underwater vehicle — बिना चालक वाला अंडरवॉटर न्यूक्लियर व्हीकल या ड्रोन है.
पुतिन ने ये भी जानकारी दी कि Burevestnik cruise मिसाइल पर काम लगभग पूरा हो चुका है. यह एक ऐसी क्रूज़ मिसाइल है जिसे छोटे न्यूक्लियर इंजन से चलाया जाएगा. रूस का दावा है कि इसकी रेंज काफी दूर तक होगी और यह लंबे समय तक हवा में रह सकती है.
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