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10 साल पुराना बदला लेने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर नेहा को 4 साल की भतीजी के सामने गोली मारी

आरोपी लाइसेंस रद्द होने से था नाराज.

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ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी
ड्रग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात नेहा शौरी के लिए 29 मार्च का दिन थोड़ा खास था. पहली बार उनकी भतीजी उनके ऑफिस आई थी. ऑफिस में अन्य दिनों की तरह सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था. सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर एक व्यक्ति नेहा के ऑफिस में घुसा. वह फर्स्ट फ्लोर पर गया जहां नेहा का केबिन था. उसने रिलॉल्वर निकाली और 38 साल की नेहा पर फायरिंग कर दी. पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय नेहा शौरी की रास्ते में ही मौत हो गई. आरोपी ने खुद को भी गोली मार ली. अस्पताल में आरोपी की भी मौत हो गई. क्या है मामला अधिकारी नेहा शौरी पंजाब के मोहाली और रोपड़ जिलों के लिए लाइसेंस का काम संभालती थीं. शौरी चंडीगढ़ के पास खरड़ में दवा और खाद्य रासायनिक प्रयोगशाला में तैनात थीं. शुक्रवार (29 मार्च) को मोरिंडा का रहने वाला आरोपी बलविंदर सिंह नेहा के ऑफिस में घुसा और अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से नेहा को तीन गोलियां मारीं. इसके बाद वो तेजी से नीचे आया और पार्किंग की ओर भागा, जहां उसने अपनी बाइक खड़ी की थी. लैब के अटेंडेंट सुरेश कुमार ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़ लिया. आरोपी ने पहले सुरेश पर फायरिंग करनी चाही, लेकिन वो बाइक सहित रोड पर गिर गया. इसके बाद उसने खुद को गोली मार ली. घटना के बाद नेहा को खरड़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया. वहां से नेहा को प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया. गंभीर हालत में नेहा को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. drug inspector neha shoree 4 साल की भतीजी के सामने मारी गोली द ट्रिब्यून अखबार में छपी खबर के मुताबिक आरोपी ने जिस समय नेहा शौरी को गोली मारी उस समय कमरे में उनकी 4 साल की भतीजी भी मौजूद थी. इस घटना के बाद बच्ची को गहरा सदमा लगा है और वह नहीं समझ पा रही है कि हुआ क्या. नेहा के सहकर्मियों ने बताया कि नेहा की भतीजी पहली बार ऑफिस आई थी. परिवार के घटना स्थल पर पहुंचने तक नेहा के सहकर्मियों ने बच्ची की देखभाल की. हत्या की वजह क्या है पुलिस के मुताबिक आरोपी बलविंदर सिंह मोरिंडा में दवा की दुकान चलाता था. 2009 में नेहा ने उसकी दुकान पर छापा मारा था. कथित रूप से बलिविंदर की दुकान से नशीली दवाएं बरामद हुईं थी. इसके बाद नेहा ने उसकी दवा दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया था. मामला 10 साल पुराना है. पुलिस को शक है कि लाइसेंस रद्द करने की वजह से नेहा की हत्या की गई होगी. यह भी बताया जा रहा है कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस कैंसिल होने के बाद आरोपी ने अस्पताल खोल लिया था,लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर नेहा ने उसे भी बंद करा दिया था. सब कुछ तबाह हो जाने के बाद आरोपी बलविंदर किसी अस्पताल में प्राइवेट नौकरी करने लगा. इसलिए उसने बदला लेने की सोची और नेहा शौरी की गोली मारकर हत्या कर दी. हालांकि पुलिस ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया है. जांच जारी है. स्टेट ड्रग कंट्रोलर प्रदीप महतो ने कहा-
नेहा की हत्या के आरोपी बलविंदर सिंह को 2005 में दवा की दुकान चलाने के लिए लाइसेंस मिला था. यह लाइसेंस 2010 तक वैलिड था. रोपड़ की ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी ने 2008 में उसकी शॉप में रेड डाली थी और नशीली दवाएं बरामद की थी. इसके बाद उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया था.
पुलिस हत्या के कारणों का पता लगा रही है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता को अधिकारी नेहा शौरी की हत्या के मामले की जांच जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं. नेहा शौरी की दो साल की बच्ची है. उनके पति वरुण मोंगा एक बैंक में काम करते हैं. उनकी भतीजी इसलिए उनके ऑफिस गई थी क्योंकि इस समय स्कूल बंद हैं. नेहा की हत्या के आरोपी बलविंदर के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है.
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