पुदुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी. गो बैक बेदी के स्लोगन के साथ. (फोटो- नारायणसामी ट्विटर)
दिल्ली और पुदुचेरी में क्या कॉमन है? जवाब- दो बातें.
पहली- दोनों केंद्र शासित प्रदेश हैं. दूसरी- दोनों जगह मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की नहीं बनती.
अब दो कॉमन बातें जानने के बाद चौंकिएगा नहीं अगर हम आपको बताएं कि पुदुचेरी में भी मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गए हैं. कांग्रेस के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी धरने पर बैठे हैं. तीन दिन से. राजभवन के पास. मांग- केंद्र पुदुचेरी की राज्यपाल को वापस बुलाए. कौन हैं पुदुचेरी की राज्यपाल? किरण बेदी. वही किरण बेद, जिन्होंने कभी दिल्ली चुनाव में बीजेपी की बागडोर संभाली थी. उस असफल कैंपेन के बाद उन्हें पुदुचेरी का राज्यपाल बना दिया गया था. राज्यपाल बनने के बाद से किरण बेदी और नारायणसामी की नहीं बनी. अब 8 जनवरी से नारायणसामी अपने तमाम दल-बल के साथ धरने पर बैठ गए. उनका कहना है –
“वो (किरण बेदी) चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहीं और रोज के काम-काज में दख़लअंदाजी कर रही हैं.”
बेदी बनाम नारायणसामी
किरण बेदी मई 2016 में पुदुचेरी की राज्यपाल बनी थीं. छह महीने में ही सरकार और एलजी की खटकनी शुरू हो गई थी. जनवरी 2017 में ये मतभेद पहली बार सामने आए थे. किरण बेदी ने नारायणसामी के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उन्होंने किसी भी सरकारी कम्युनिकेशन के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी. किरण बेदी ने फैसला पलटने की जानकारी भी ट्विटर पर देते हुए लिखा था कि ये फैसला नॉन-टेक्नॉलजी युग की ओर ले जाने वाला है. इसके बाद तो CM और LG आमने-सामने आते ही रहे. किरण बेदी का कहना रहा है कि सरकार ठीक से काम नहीं कर रही. नारायणसामी का कहना रहा है कि पहले LG काम करने तो दें. अब बात धरने और ‘किरण बेदी गो बैक’ तक पहुंच गई है. आगे जो हलचल होगी, बताएंगे.